हरिद्वार पंचायत विभाग में बड़ा एक्शन! ₹26.06 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सुशील सती निलंबित, डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ने जारी किया आदेश…… क्या हुआ, क्यों हुई कार्रवाई, कैसे निकली धनराशि और कौन है जिम्मेदार? चार ग्राम पंचायतों के अनुदान पर उठे गंभीर सवाल; ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर योजना अपलोड किए बिना रकम निकालने का आरोप, अब विभागीय जांच में खुलेगी पूरी परत!

हरिद्वार पंचायत विभाग में बड़ा एक्शन! ₹26.06 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सुशील सती निलंबित, डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ने जारी किया आदेश……
क्या हुआ, क्यों हुई कार्रवाई, कैसे निकली धनराशि और कौन है जिम्मेदार? चार ग्राम पंचायतों के अनुदान पर उठे गंभीर सवाल; ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर योजना अपलोड किए बिना रकम निकालने का आरोप, अब विभागीय जांच में खुलेगी पूरी परत!
हरिद्वार। सरकारी धन के इस्तेमाल में कथित अनियमितता के आरोप पर हरिद्वार के पंचायतीराज विभाग में बड़ी कार्रवाई हुई है। जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) अतुल प्रताप सिंह ने लक्सर विकासखंड में तैनात ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सुशील सती को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। 17 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में चार ग्राम पंचायतों के लिए आवंटित अनुदान की पहली किस्त से कुल 26.06 लाख रुपये की कथित नियमविरुद्ध निकासी का मामला उठाया गया है।
आदेश के अनुसार, संबंधित ग्राम पंचायतों की ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) को पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किए बिना धनराशि आहरित किए जाने का आरोप है। इसके अलावा, विभाग की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने को भी अनुशासनहीनता से जोड़कर देखा गया है। विभाग ने आरोपपत्र अलग से जारी करने की बात कही है। अब सवाल यह है कि आखिर मामला क्या है, कार्रवाई क्यों हुई, धनराशि कैसे निकाली गई और जिम्मेदारी किसकी बनती है?
क्या हुआ? चार ग्राम पंचायतों की रकम के आहरण पर उठे सवाल
डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह के हस्ताक्षर से जारी निलंबन आदेश में चार ग्राम पंचायतों की धनराशि का विवरण दिया गया है—
- अकबरपुर ऊद: 6.66 लाख रुपये
- दरगाहपुर: 9.45 लाख रुपये
- मुंडाखेड़ा कलां: 9.44 लाख रुपये
- नेतवाला सैदाबाद: 0.51 लाख रुपये
इन सभी रकम का कुल योग 26.06 लाख रुपये है। आदेश में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य वित्त आयोग की संस्तुति पर आवंटित अनुदान की पहली किस्त से यह रकम निकाली गई। विभाग का आरोप है कि संबंधित ग्राम पंचायत विकास योजनाएं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किए बिना धनराशि का आहरण किया गया, जो निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत है।
क्यों हुई कार्रवाई? वित्तीय अनियमितता के साथ जवाब नहीं देने का आरोप
विभागीय आदेश में इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से जुड़ा बताया गया है। सरकारी अनुदान ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए दिया जाता है। इसलिए योजना और धनराशि के आहरण से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण है।
आदेश में एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी दर्ज है। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), लक्सर ने 22 अगस्त 2026 को सुशील सती से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन आदेश के अनुसार उसका जवाब नहीं दिया गया। अन्य मामलों में भी उच्चाधिकारियों के स्पष्टीकरण का उत्तर नहीं देने संबंधी शिकायतों का उल्लेख किया गया है।
विभाग ने इन तथ्यों को अनुशासनहीनता और अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना माना है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित कर्मचारी का पक्ष सुनने और विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।
कैसे निकली धनराशि? अब इन बिंदुओं पर होगी पड़ताल
इस प्रकरण का सबसे अहम सवाल धनराशि निकालने की प्रक्रिया को लेकर है। निलंबन आदेश में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत विकास योजना को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किए बिना रकम आहरित की गई। लेकिन आदेश में धनराशि निकालने के लिए इस्तेमाल किए गए प्रत्येक दस्तावेज, भुगतान की पूरी प्रक्रिया या रकम के वास्तविक उपयोग का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
ऐसे में जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि धनराशि आहरित करने के लिए कौन-से अभिलेख प्रस्तुत किए गए, भुगतान की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई, संबंधित रकम किन कार्यों में खर्च की गई और निर्धारित नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी।यही वे सवाल हैं जिनके जवाब जांच से सामने आने चाहिए। केवल निलंबन से पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट नहीं होगी; इसके लिए वित्तीय अभिलेखों और संबंधित ग्राम पंचायतों के रिकॉर्ड की पड़ताल जरूरी होगी।
कौन है कार्रवाई करने वाला अधिकारी और किसके खिलाफ हुआ एक्शन?
इस मामले में कार्रवाई करने वाले अधिकारी जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह हैं, जो आदेश में नियुक्ति प्राधिकारी एवं अनुशासनिक प्राधिकारी के रूप में हस्ताक्षरकर्ता हैं। कार्रवाई लक्सर विकासखंड में तैनात ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सुशील सती के विरुद्ध की गई है।आदेश के मुताबिक, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सुशील सती को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें खंड विकास अधिकारी, बहादराबाद के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। उन्हें सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), बहादराबाद की पूर्व अनुमति के बिना कार्यालय समय में अनुपस्थित नहीं रहने का निर्देश दिया गया है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता और अन्य अनुमन्य भत्ते दिए जाने का भी प्रावधान है। कुछ भत्तों का भुगतान वास्तविक व्यय और निर्धारित शर्तों के अधीन होगा।
आगे क्या होगा? आरोपपत्र से खुलेगी जांच की अगली कड़ी
डीपीआरओ के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आरोपपत्र अलग से जारी किया जाएगा। इसका अर्थ है कि निलंबन के बाद विभागीय कार्रवाई की अगली महत्वपूर्ण कड़ी आरोपों का औपचारिक विवरण और उनका परीक्षण होगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि आरोप स्थापित होने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध दीर्घ शास्ति तक की कार्रवाई संभव है।
अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि आरोप किस हद तक प्रमाणित होते हैं, धनराशि का वास्तविक उपयोग कहां हुआ और प्रक्रिया में किसी अन्य स्तर पर भी जिम्मेदारी बनती है या नहीं।हरिद्वार के पंचायतीराज विभाग में 26.06 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले ने सरकारी अनुदान के इस्तेमाल और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ने सुशील सती को निलंबित कर दिया है। अब असली परीक्षा विभागीय जांच की होगी—क्या अभिलेख आरोपों की पुष्टि करेंगे, धनराशि के उपयोग की पूरी तस्वीर सामने आएगी और जिम्मेदारी तय हो पाएगी? इन सवालों का जवाब जांच के परिणाम से ही मिलेगा।



