⚖️ अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को कानूनी नोटिस,, 📌 7 दिन में दस्तावेज और स्पष्टीकरण देने की मांग,, 🔍 तीन पूजनीय महंतों के बहिष्कार पर जवाब आवश्यक,, 🔔 मामला अब संत समाज और न्यायिक प्रक्रिया के बीच

इन्तजार रजा हरिद्वार ⚖️ अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को कानूनी नोटिस,,
📌 7 दिन में दस्तावेज और स्पष्टीकरण देने की मांग,,
🔍 तीन पूजनीय महंतों के बहिष्कार पर जवाब आवश्यक,,
🔔 मामला अब संत समाज और न्यायिक प्रक्रिया के बीच

हरिद्वार, 26 नवंबर 2025 — धर्मनगरी हरिद्वार में अखाड़ा जगत से जुड़ा मामला अब विधिक दायरे में पहुँच चुका है। अधिवक्ता अरुण भदौरिया (स्थाई अधिवक्ता बीएचईएल हरिद्वार) द्वारा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी जी महाराज को एक औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान तीन पूजनीय संतों — महंत रघुमुनि जी, महंत अग्रदास जी और कोठारी महंत दामोदरदास जी — के बहिष्कार से जुड़े तथ्यों और विधिक आधारों को स्पष्ट करने हेतु जारी किया गया है।

नोटिस में उल्लेख है कि उपरोक्त संत समाज और क्षेत्रीय जनता में सेवा, संयम और सादगी के लिए सम्मानित माने जाते हैं। नोटिस के अनुसार कोविड काल में इन संतों द्वारा मरीजों की सेवा, गरीबों की सहायता तथा धार्मिक व सामाजिक योगदान को समाज में सराहा गया है। इसीलिए इस बहिष्कार संबंधी निर्णय की प्रक्रिया, आधार और सत्यापन को स्पष्ट किए जाने की मांग की गई है।
📍 नोटिस में मांगी गई मुख्य जानकारी
नोटिस में कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं जिनके उत्तर दस्तावेजों सहित मांगे गए हैं। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
| क्रमांक | मांगी गई जानकारी |
|---|---|
| 1 | बहिष्कार का आधार, कारण और लिखित आदेश |
| 2 | क्या किसी जांच समिति का गठन किया गया था? यदि हाँ, तो उसकी रिपोर्ट |
| 3 | प्रस्ताव किस संस्था या व्यक्ति द्वारा दिया गया था? |
| 4 | प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले अखाड़ों की सूची |
| 5 | उस समय उपस्थित अखाड़ों की संख्या एवं परिषद बैठक का अभिलेख |
| 6 | निर्णय संबंधित सभी दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध कराने की मांग |
नोटिस में यह भी उल्लेख है कि यदि निर्णय दस्तावेजों पर आधारित था, तो वे दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं, ताकि समाज में इस निर्णय से जुड़े तथ्यों की पारदर्शिता स्थापित हो सके।
⏳ जवाब की समय सीमा स्पष्ट
नोटिस में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि:
नोटिस प्राप्ति से 7 दिन के भीतर सभी मांगी गई जानकारी दस्तावेजों सहित कार्यालय में प्रस्तुत की जाए और सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण जारी किया जाए।
यदि निर्धारित अवधि में जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड में विधिक याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।नोटिस के अनुसार ऐसी स्थिति में संभावित न्यायालयीन व्यय एवं हर्जाना संबंधित पक्ष पर हो सकता है।
📮 नोटिस विधिक प्रक्रिया के तहत भेजा गया
नोटिस पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजा गया है। उसकी ट्रैकिंग संख्या, तिथि और समय सहित संपूर्ण विवरण संलग्न किया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी स्तर पर प्राप्ति संबंधी विवाद की संभावना न रहे।
🔔 मामला अब संत समाज और न्यायिक प्रक्रिया के बीच

यह मामला किसी आरोप या निर्णय की घोषणा नहीं है बल्कि नोटिस आधारित तथ्य-विनियोजन और पारदर्शिता की मांग है। अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य केवल तथ्यों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करवाना है, ताकि धर्म, परंपरा और सम्मान के आधार पर संत समाज के प्रति न्याय सुनिश्चित हो सके।
🕊 आगे की राह
अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि अखाड़ा परिषद इस नोटिस का उत्तर निर्धारित समय सीमा में देती है या नहीं। धार्मिक और कानूनी दोनों ही वर्ग इस विषय को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ देख रहे हैं।



