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युवा IAS प्रतीक जैन की कार्यशैली बनी चर्चा का विषय,, काम के साथ कला, लोक भाषा और जनसंवाद में भी आगे,, कमिश्नर दीपक रावत से हो रही तुलना, प्रशासन में नई ऊर्जा

इन्तजार रजा हरिद्वार- युवा IAS प्रतीक जैन की कार्यशैली बनी चर्चा का विषय,,

काम के साथ कला, लोक भाषा और जनसंवाद में भी आगे,,

कमिश्नर दीपक रावत से हो रही तुलना, प्रशासन में नई ऊर्जा

उत्तराखंड के युवा और ऊर्जावान IAS अधिकारी प्रतीक जैन इन दिनों प्रदेश भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। वर्ष 2018 बैच के IAS अधिकारी प्रतीक जैन इस समय रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी के रूप में तैनात हैं और अपने कार्यशैली, संवेदनशील प्रशासन तथा अलग पहचान के कारण लगातार सुर्खियों में हैं।

प्रतीक जैन की पहचान केवल एक सख्त या फाइलों तक सीमित अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि जनता से सीधे जुड़ने वाले, संवादशील और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर प्रशासक के रूप में बनती जा रही है। वे जहां एक ओर प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता से निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटीज के जरिए भी लोगों का दिल जीत रहे हैं।

अक्सर देखा गया है कि प्रतीक जैन कभी भजन गाते हुए, तो कभी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत गीतों के माध्यम से युवाओं और आमजन में नई ऊर्जा का संचार करते नजर आते हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया और जन चर्चाओं में वे तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

लोक भाषा सीखने की ललक, जनसंवाद की मजबूत मिसाल

प्रतीक जैन की एक बड़ी खासियत यह है कि वे स्थानीय लोक भाषा और संस्कृति को समझने व सीखने की निरंतर कोशिश करते हैं। आम लोगों से सहजता से मिलना, उनकी समस्याएं सुनना और त्वरित समाधान देना उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा बन चुका है। यही कारण है कि लोग उन्हें एक “जनता के डीएम” के रूप में देख रहे हैं।

उनकी यही खूबियां लोगों को वरिष्ठ IAS अधिकारी, कुमाऊं कमिश्नर और मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत की याद दिला रही हैं। जन चर्चाओं में कहा जा रहा है कि प्रतीक जैन का काम करने का तरीका, फील्ड में सक्रियता, लोकभाषा से जुड़ाव और समस्याओं के समाधान का अंदाज़ काफी हद तक कमिश्नर दीपक रावत सरीखा है।

शुरुआती पोस्टिंग से ही दिखी अलग पहचान

प्रतीक जैन की प्रशासनिक यात्रा की बात करें तो वे अपनी शुरुआती पोस्टिंग के दौरान बेतालघाट के एसडीएम और नैनीताल के ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। उन पदों पर रहते हुए भी उन्होंने अपने नवाचारी फैसलों, संवेदनशीलता और जनता से जुड़ाव के जरिए अलग पहचान बनाई थी।

आज रुद्रप्रयाग जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण जिले में डीएम के रूप में कार्य करते हुए प्रतीक जैन प्रशासन में नई सोच, नई ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टिकोण का उदाहरण बनते नजर आ रहे हैं। उनकी कार्यशैली यह संदेश देती है कि प्रशासन केवल आदेश देने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, संवाद और संवेदनशीलता का नाम है

यही वजह है कि उत्तराखंड में प्रतीक जैन को भविष्य के एक प्रभावशाली और जनप्रिय प्रशासनिक अधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।

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