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ऐतिहासिक दरगाह हज़रत सैय्यद बाबा मंसूर अली शाह को लेकर अतिक्रमण का आरोप निराधार बोले ग्रामीण,, ग्रामीणों ने बताया वैध है कब्रिस्तान में बनी मजार बोले ग्रामीण– जांच में सामने आएगा सच,, गलत खसरा नंबर को लेकर है प्रशासन को भ्रम, निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण,, ग्रामीणों का पक्ष: दरगाह है वैध, गलत खसरा संख्या को लेकर हुआ है प्रशासन को भ्रम

ऐतिहासिक दरगाह हज़रत सैय्यद बाबा मंसूर अली शाह को लेकर अतिक्रमण का आरोप निराधार बोले ग्रामीण,,
ग्रामीणों ने बताया वैध है कब्रिस्तान में बनी मजार बोले ग्रामीण– जांच में सामने आएगा सच,,
गलत खसरा नंबर को लेकर है प्रशासन को भ्रम, निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण,, ग्रामीणों का पक्ष: दरगाह है वैध, गलत खसरा संख्या को लेकर हुआ है प्रशासन को भ्रम

हरिद्वार, 19 जुलाई 2025।
हरिद्वार की बहादराबाद तहसील के ग्राम पदार्था उर्फ धनपुरा स्थित ऐतिहासिक दरगाह हज़रत सैय्यद बाबा मंसूर अली शाह को लेकर अतिक्रमण के आरोप में प्रशासन द्वारा जारी नोटिस से विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर प्रशासन ने इसे जोहड़ तालाब की जमीन पर बना अतिक्रमण बताया है, वहीं ग्रामीणों ने इस आरोप को निराधार बताते हुए कहा है कि दरगाह वैध है और वास्तविक खसरा संख्या 231 है, न कि 234 जैसा कि नोटिस में उल्लेख किया गया है।

ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए साफ किया है कि यदि सही सर्वेक्षण कराया जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी और धार्मिक भावनाएं आहत होने से बच जाएंगी।

प्रशासन का नोटिस और आरोप

उपजिलाधिकारी हरिद्वार श्री जितेन्द्र कुमार की ओर से 15 जुलाई 2025 को जारी नोटिस संख्या 3992 के अनुसार, गांव के खसरा संख्या 234 – जिसे राजस्व रिकॉर्ड में जोहड़ तालाब (जलभराव क्षेत्र) बताया गया है – पर धार्मिक संरचना के रूप में बनी मजार को अवैध अतिक्रमण माना गया है। नोटिस में मजार के सेवादारों — शेखदीन शाह और अब्दुल गनी — को 22 जुलाई तक अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया गया है, अन्यथा विधिसम्मत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

ग्रामीणों का पक्ष: दरगाह वैध, खसरा संख्या को लेकर हुआ है प्रशासन को भ्रम

ग्रामीणों ने एसडीएम सदर हरिद्वार जितेन्द्र कुमार को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि दरगाह खसरा संख्या 234 में नहीं बल्कि खसरा संख्या 231मे बनी हुई है, जो कि कब्रिस्तान के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, में स्थित है। यह दरगाह कई सौ साल पुरानी है और स्थानीय मुस्लिम समाज और सर्व धर्म की आस्था का ऐतिहासिक केंद्र है।

ज्ञापन में कहा गया कि कुछ साल पहले अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा कब्रिस्तान की चारदीवारी बनवाई गई थी, जिसमें लेखपाल, कानूनगो और तहसीलदार की मौजूदगी में पैमाइश कराई गई थी। उस समय भी मजार की उपस्थिति दर्ज की गई थी और कहीं भी इसे अवैध नहीं कहा गया।

प्रशासन को गुमराह किया गया “गलत खसरा नंबर के चक्कर में बनाया जा रहा विवाद” – वैध है कब्रिस्तान में बनी मजार बोले ग्रामीण

ग्राम वासियों ने साफ शब्दों में आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना समुचित सर्वे और दस्तावेजी जांच किए गलत खसरा नंबर के आधार पर दरगाह को विवादित बनाने की कोशिश की है। क्षेत्र पंचायत सदस्य धनपुरा 2 मौ० मुस्तफा और पूर्व उपप्रधान धनपुरा घिस्सुपुरा मौ. सलीम अहमद सहित कई सामाजिक प्रतिनिधियों और ग्रामीणो ने कहा कि:

ऐतिहासिक दरगाह हज़रत सैय्यद बाबा मंसूर अली शाह कब्रिस्तान में बनी है जिसका असल खसरा संख्या 231 में है, जो कि कब्रिस्तान की ज़मीन है और वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। खसरा 234 को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि जानबूझकर किया गया षड्यंत्र प्रतीत होता है प्रशासन को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए”

ग्रामीणों ने वक्फ संपत्ति और धार्मिक स्वतंत्रता की ओर ध्यान दिलाया

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि संबंधित दरगाह जिस कब्रिस्तान में स्थित है, वह उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में पंजीकृत संपत्ति है, जिसका पंजीकरण क्रमांक UKHD3305 है। ऐसे में वक्फ अधिनियम 1995 के अनुसार, वक्फ संपत्तियों से संबंधित कोई विवाद हो तो पहले वक्फ बोर्ड की राय या आदेश आवश्यक होता है।

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब वक्फ बोर्ड में  कब्रिस्तान दर्ज हैं और मजार कब्रिस्तान में बनी हुई है, तो शायद प्रशासन ने बिना बोर्ड को सूचना दिए कैसे नोटिस जारी कर दिया?

निष्पक्ष जांच की मांग: “प्रशासन निष्पक्ष जांच करवा लें, सच्चाई सामने आ जाएगी”

ग्राम वासियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम सदर हरिद्वार जितेन्द्र कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और  मांग की है कि प्रशासन तत्काल एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सर्वे टीम गठित करे जिसमें राजस्व विभाग, वक्फ बोर्ड, ग्राम पंचायत और दोनों पक्षों के प्रतिनिधि शामिल हों। इस सर्वेक्षण से यह साफ हो जाएगा कि दरगाह किस खसरा नंबर पर स्थित है।

क्षेत्र पंचायत सदस्य मौ० मुस्तफा ने कहा:

“हम न तो कानून के खिलाफ हैं और न ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विरोध में। परंतु हमें बिना सुने, बिना जांच के हमारी धार्मिक धरोहर को अवैध बताना गलत है। निष्पक्ष जांच करवा ली जाए, सब कुछ साफ हो जाएगा।”

विवाद के बीच बढ़ रही संवेदनशीलता

प्रशासन के नोटिस और समाज की आपत्ति के चलते गांव में संवेदनशीलता बढ़ गई है। हालांकि अभी तक कोई उग्र प्रदर्शन नहीं हुआ है, परंतु ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि प्रशासन ने जबरन कार्रवाई की तो वे शांतिपूर्ण विरोध, वक्फ ट्रिब्यूनल या उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

क्या कहते हैं एसडीएम सदर हरिद्वार जितेन्द्र कुमार

एसडीएम सदर हरिद्वार जितेन्द्र कुमार ने कहा कि ग्रामीणों ने नोटिस का जवाब प्रस्तुत किया है। सभी तथ्यों और दस्तावेजों की विधिवत जांच कराई जाएगी। यदि मजार  वैध रूप से स्थित है, तो प्रशासन निष्पक्षता से कार्य करेगा।

पूर्व में प्रशासनिक स्वीकृति, अब क्यों बदलाव?

ज्ञापन में यह भी जिक्र किया गया है कि जब चारदीवारी निर्माण हुआ था, तब दरगाह की मौजूदगी को प्रशासन ने स्वीकृत किया था। ऐसे में अब उसी संरचना को अवैध बताना विरोधाभासी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रशासनिक लापरवाही या जानबूझकर की गई नजरअंदाजी का परिणाम है।

धार्मिक भावना और कानूनी प्रक्रिया: दोनों का संतुलन आवश्यक

ग्राम वासियों ने प्रशासन से यह अपील की है कि धर्मस्थलों से जुड़ी किसी भी कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों की धार्मिक भावना, ऐतिहासिकता, वक्फ अधिनियम, और संवैधानिक अधिकारों का ध्यान रखा जाना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार नागरिकों को दिया गया है, जिसे किसी भ्रम या त्रुटिपूर्ण दस्तावेज के आधार पर छीना नहीं जा सकता।

ग्रामीणों की गुहार समाधान की ओर बढ़े प्रशासन, ना बने विवाद की जड़

हज़रत सैय्यद बाबा मंसूर अली शाह की दरगाह को लेकर उत्पन्न हुआ यह विवाद केवल एक ज़मीन के खसरा नंबर का विवाद नहीं है, बल्कि यह समुदाय की आस्था, इतिहास और धर्मनिरपेक्षता की परीक्षा भी है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले को गहराई से समझे, निष्पक्ष जांच कराए और केवल गलत और तथ्यहीन रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय लेने की बजाय समाज की भावनाओं और कानूनी पहलुओं को भी ध्यान में रखे।

यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा हो सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। समाधान का रास्ता संवाद, समन्वय और निष्पक्षता से होकर ही निकलेगा।

इस दौरान मौ सलीम घिस्सुपुरा, सलीम अहमद अंसारी पूर्व उपप्रधान धनपुरा,मौ मुस्तफा क्षैत्र पंचायत सदस्य,तसलीम प्रधान प्रतिनिधि इलियास शाहजी, मास्टर मुरसलीन आदि गणमान्य लोग मौजूद थे

इन्तजार रजा हरिद्वार: Daily Live Uttarakhand

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