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स्वामी विवेकानन्द जयंती पर देहरादून में ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का भव्य आयोजन,, युवाओं में राष्ट्रप्रेम, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी चेतना को सशक्त करने का संकल्प,, ‘वोकल फॉर लोकल’ से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम

इन्तजार रजा हरिद्वार- स्वामी विवेकानन्द जयंती पर देहरादून में ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का भव्य आयोजन,,

युवाओं में राष्ट्रप्रेम, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी चेतना को सशक्त करने का संकल्प,,

‘वोकल फॉर लोकल’ से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम

देहरादून। स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती के पावन अवसर पर देहरादून में आयोजित ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ ने राष्ट्रप्रेम, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी चेतना का सशक्त संदेश दिया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का फ्लैग ऑफ कर दौड़ की शुरुआत की गई, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह आयोजन न केवल एक खेल गतिविधि था, बल्कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का एक प्रभावी मंच भी साबित हुआ।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। उन्होंने युवाओं को अपने सामर्थ्य पर विश्वास करने, आत्मबल को पहचानने और राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा दी। ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत’ का उनका संदेश आज के युवाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहा है।

युवाओं में आत्मविश्वास और राष्ट्रनिर्माण की भावना का संचार

‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ का मुख्य उद्देश्य युवाओं में आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूती देना और उन्हें स्वदेशी उत्पादों, स्वदेशी विचारों तथा भारतीय संस्कृति से जोड़ना रहा। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि राष्ट्र का भविष्य युवा शक्ति के हाथों में है और जब युवा आत्मविश्वास से भरे होंगे, तभी देश आत्मनिर्भरता की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी ने युवाओं को सदैव शक्ति, साहस और आत्मगौरव का पाठ पढ़ाया। आज के समय में उनके विचार युवाओं को न केवल व्यक्तिगत उन्नति बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के निर्वहन की भी प्रेरणा देते हैं। ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ इसी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रयास है।

‘वोकल फॉर लोकल’ और स्वदेशी का व्यापक संदेश

कार्यक्रम में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘स्वदेशी’ के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और उद्यमिता को सशक्त करने का संकल्प भी है। जब हम स्वदेशी उत्पादों को अपनाते हैं, तो हम अपने कारीगरों, उद्यमियों और स्थानीय उद्योगों को मजबूती देते हैं।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना तभी साकार होगी जब हर नागरिक स्वदेशी को अपने जीवन का हिस्सा बनाए। यह दौड़ इसी सोच का प्रतीक है, जो युवाओं को जागरूक करने और उन्हें राष्ट्रहित में छोटे-छोटे कदम उठाने के लिए प्रेरित करती है।

विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे, जिनमें माननीय प्रदेश महामंत्री (संगठन) श्री अजय कुमार जी, माननीय विधायक श्री खजान दास जी, प्रदेश महामंत्री श्री तरुण बंसल जी, मेयर श्री सौरभ थपलियाल जी तथा देहरादून महानगर अध्यक्ष श्री सिद्धार्थ अग्रवाल जी प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी अतिथियों ने स्वामी विवेकानन्द जी के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

*LIVE: देहरादून में स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती के अवसर पर आयोजित ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ कार्यक्रम*

अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। खेल, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का समन्वय ही सशक्त भारत की नींव रखता है। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ जैसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता और ऊर्जा का संचार करते हैं।

उत्साह, अनुशासन और देशभक्ति का अद्भुत संगम

दौड़ के दौरान युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। हाथों में तिरंगा, स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के संदेश लिखी तख्तियां और नारों के साथ प्रतिभागियों ने पूरे जोश के साथ दौड़ में हिस्सा लिया। यह दृश्य राष्ट्रप्रेम और अनुशासन का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रहा था।

कार्यक्रम का समापन स्वामी विवेकानन्द जी के विचारों को आत्मसात करने और उन्हें अपने जीवन में उतारने के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के आयोजन भविष्य में भी निरंतर होते रहेंगे और युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे।

कुल मिलाकर, देहरादून में आयोजित ‘स्वदेशी संकल्प दौड़’ स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती पर युवाओं को राष्ट्रप्रेम, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी के प्रति जागरूक करने का एक प्रेरणादायी और सफल प्रयास साबित हुई।

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