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वन्यजीव तस्कर गिरफ्तार : हाथी दांत के साथ दबोचा गया आरोपी,, एसटीएफ और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से हुआ बड़ा खुलासा,, खानपुर रेंज में दो हाथियों की मौत के बाद सामने आया शिकारी नेटवर्क,,  पूरे नेटवर्क पर नकेल कसने की तैयारी

वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्तराखंड एसटीएफ और वन विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। खानपुर रेंज से हाथी के दांत की अवैध तस्करी करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बुग्गावाला थाना क्षेत्र के बुधवाशहीद गांव निवासी गुलाम हसन के रूप में हुई है। आरोपी के कब्जे से हाथी का दांत बरामद हुआ है। माना जा रहा है कि यह वही गिरोह है जो करीब एक महीने पहले खानपुर रेंज में मरे पाए गए दो हाथियों की घटना से जुड़ा हुआ हो सकता है।

इन्तजार रजा हरिद्वार-वन्यजीव तस्कर गिरफ्तार : हाथी दांत के साथ दबोचा गया आरोपी,,
एसटीएफ और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से हुआ बड़ा खुलासा,,
खानपुर रेंज में दो हाथियों की मौत के बाद सामने आया शिकारी नेटवर्क,,  पूरे नेटवर्क पर नकेल कसने की तैयारी

हरिद्वार में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्तराखंड एसटीएफ और वन विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। खानपुर रेंज से हाथी के दांत की अवैध तस्करी करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बुग्गावाला थाना क्षेत्र के बुधवाशहीद गांव निवासी गुलाम हसन के रूप में हुई है। आरोपी के कब्जे से हाथी का दांत बरामद हुआ है। माना जा रहा है कि यह वही गिरोह है जो करीब एक महीने पहले खानपुर रेंज में मरे पाए गए दो हाथियों की घटना से जुड़ा हुआ हो सकता है।

संयुक्त टीम की कार्रवाई में खुला बड़ा रैकेट

वन विभाग की खुफिया शाखा को पिछले कुछ दिनों से सूचना मिल रही थी कि खानपुर रेंज क्षेत्र में कुछ लोग अवैध रूप से वन्यजीवों के अंगों की तस्करी में सक्रिय हैं। इसी सूचना के आधार पर उत्तराखंड एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। टीम ने बुग्गावाला थाना क्षेत्र में बुधवाशहीद गांव में दबिश दी, जहां से गुलाम हसन को हाथी के दांत के साथ पकड़ा गया। पूछताछ में आरोपी ने माना कि वह इस दांत को बेचने की फिराक में था और उसे इसके बदले भारी रकम मिलने की उम्मीद थी। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, हाथी का दांत करीब 5 किलो वज़न का है, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये में आंकी जाती है। टीम ने बरामद दांत को जब्त कर आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9/51 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

हाथियों की मौत से जुड़ा हो सकता है कनेक्शन

गौरतलब है कि खानपुर रेंज में करीब एक महीने पहले दो हाथियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। उस समय जांच में यह आशंका जताई गई थी कि हाथियों की मौत किसी शिकारी गिरोह की करतूत हो सकती है। दोनों हाथियों के दांत गायब पाए गए थे, जिसके बाद से ही वन विभाग और एसटीएफ ने इलाके में सघन जांच शुरू कर दी थी। अब गुलाम हसन की गिरफ्तारी के बाद यह मामला और गहराता दिखाई दे रहा है। एसटीएफ के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। प्राथमिक जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी का संपर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश और नेपाल तक फैले वन्यजीव तस्करों से था। वन विभाग अब आरोपी के मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रहा है ताकि पूरे नेटवर्क को पकड़ने की दिशा में ठोस कार्रवाई की जा सके।

वन्यजीव अपराधों पर सख्त हुआ वन विभाग

उत्तराखंड में हाल के वर्षों में हाथियों, गुलदारों और अन्य वन्यजीवों की अवैध शिकार की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। राज्य सरकार और वन विभाग अब इन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं। खानपुर, राजाजी टाइगर रिजर्व और चिड़ियापुर रेंज में लगातार निगरानी बढ़ाई गई है। ड्रोन से गश्त और थर्मल कैमरों से ट्रैकिंग की व्यवस्था की जा रही है ताकि शिकारी गतिविधियों को रोका जा सके। रेंज अधिकारी के अनुसार, “वन्यजीवों के साथ किसी भी प्रकार की तस्करी या शिकार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस गिरफ्तारी के बाद अब अन्य संदिग्धों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।” उन्होंने कहा कि हाथियों की मौत के मामले में भी जांच को नए सिरे से आगे बढ़ाया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर सहयोग की अपील

वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को भी जंगल क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दें या वन्यजीवों के शिकार की जानकारी मिले तो तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचित करें। स्थानीय लोगों की सूचना से ही ऐसे गिरोहों पर अंकुश लगाया जा सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, आरोपी गुलाम हसन पिछले कुछ समय से जंगलों में बार-बार जाता था और कुछ बाहरी लोगों से उसकी मुलाकातें होती रहती थीं। गांव में यह भी चर्चा थी कि वह जंगली जानवरों के अंगों की खरीद-फरोख्त करता है। अब गिरफ्तारी के बाद गांव के लोगों में भी दहशत का माहौल है।

पूरे नेटवर्क पर नकेल कसने की तैयारी

आरोपी के कबूलनामे और बरामद साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है। टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इस गिरोह ने हाथियों के अलावा अन्य वन्यजीवों की भी तस्करी की है। जांच में यह भी सामने आ सकता है शायद अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से वन्यजीव उत्पादों को दिल्ली और मुरादाबाद होते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा रहा था। इसके लिए विशेष रूप से वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले कुछ लोगों को लालच देकर गिरोह में शामिल किया गया था।

वन विभाग ने कहा है कि यह गिरफ्तारी वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता है और आने वाले समय में इसी प्रकार की कार्रवाईयों से जंगल माफिया के हौसले पस्त होंगे।खानपुर रेंज से हाथी दांत के साथ पकड़ा गया तस्कर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित नेटवर्क की कड़ी हो सकता है। उत्तराखंड जैसे पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील राज्य में इस तरह की घटनाएं राज्य की जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा हैं। सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि इस मामले की जांच अंतरराज्यीय स्तर पर कर पूरे नेटवर्क को बेनकाब करें, ताकि भविष्य में किसी भी निर्दोष वन्यजीव की जान न जाए।

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