विधानसभा सत्र में मैदानी इलाकों पर बयानबाजी के बाद मचा घमासान,, कांग्रेस से मुकर्रम अंसारी ने कर दी इस्तीफे की बात,, हरिद्वार ग्रामीण की जनता ने उठाए सवाल, कांग्रेस नेता मुकर्रम अंसारी ने साधा निशाना,, “हरिद्वार की आवाज विधानसभा में क्यों खामोश रही?” — मुकर्रम अंसारी
इन्तजार रजा हरिद्वार – विधानसभा सत्र में मैदानी इलाकों पर बयानबाजी के बाद मचा घमासान,, कांग्रेस से मुकर्रम अंसारी ने कर दी इस्तीफे की बात,,
हरिद्वार ग्रामीण की जनता ने उठाए सवाल, कांग्रेस नेता मुकर्रम अंसारी ने साधा निशाना,,
“हरिद्वार की आवाज विधानसभा में क्यों खामोश रही?” — मुकर्रम अंसारी
हरिद्वार, 09 नवंबर 2025। रिपोर्ट : इंतज़ार रज़ा
उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में मैदानी और पहाड़ी इलाकों के बीच विकास व संसाधनों को लेकर हुई बयानबाजी अब सियासी रंग ले चुकी है। हरिद्वार जिले में इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराज़गी देखने को मिल रही है। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता और पूर्व प्रत्याशी मुकर्रम अंसारी ने प्रेस क्लब हरिद्वार में प्रेस वार्ता कर विधायक अनुपमा रावत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अंसारी ने कहा कि जब विधानसभा में हरिद्वार के खिलाफ बातें की जा रही थीं, तब हरिद्वार की जनता की प्रतिनिधि चुप क्यों रहीं? उन्होंने कहा कि यह खामोशी जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात के समान है।
हरिद्वार के विधायकों की चुप्पी पर उठे सवाल
कांग्रेस नेता मुकर्रम अंसारी ने कहा कि विधानसभा के विशेष सत्र में मैदानी क्षेत्रों को लेकर कई विधायकों द्वारा असंवेदनशील टिप्पणियां की गईं। उन्होंने कहा —
“जब हरिद्वार और मैदानों के बारे में गलत बातें कही जा रही थीं, तब यहां के प्रतिनिधियों को आवाज उठानी चाहिए थी। लेकिन अफसोस, हरिद्वार जिले के आठ में से तीन विधायक ही कुछ बोल पाए, बाकी सभी चुप रहे।”
अंसारी ने कहा कि यह न सिर्फ लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की अनदेखी है, बल्कि हरिद्वार के लाखों लोगों के अपमान के बराबर है। उन्होंने कहा कि यह चुप्पी दर्शाती है कि कुछ विधायकों को हरिद्वार की जनता के दर्द से कोई सरोकार नहीं है।उन्होंने विशेष रूप से हरिद्वार ग्रामीण की विधायक अनुपमा रावत पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की विधायक होने के बावजूद उन्होंने न तो विरोध दर्ज कराया और न ही जनता की तरफ से कोई समर्थन दिया।
“अनुपमा रावत को उस वक्त हरिद्वार की जनता का पक्ष रखना चाहिए था, लेकिन उन्होंने चुप रहकर यह साबित कर दिया कि अब वो जनता से दूर और सत्ता की चकाचौंध के करीब हैं।” — मुकर्रम अंसारी, कांग्रेस नेता
जनता में नाराज़गी, कांग्रेस में उबाल
हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र के कई लोगों ने विधायक की इस चुप्पी पर नाराज़गी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब विधानसभा में उनके जिले को लेकर टिप्पणियां की गईं, तब उनके प्रतिनिधियों की खामोशी चुभने वाली थी।स्थानीय समाजसेवी मोहम्मद अकरम ने कहा कि जनता ने विधायक को अपनी आवाज़ उठाने के लिए चुना था, लेकिन जब जरूरत पड़ी तो उन्होंने सिर झुका लिया।जनता में इस मुद्दे को लेकर चर्चा है कि अब विधानसभा में हरिद्वार के हितों की रक्षा कौन करेगा? कुछ लोगों ने कहा कि अगर विधायकों ने जनता के मुद्दे नहीं उठाए तो अगले चुनाव में जनता उन्हें जवाब देगी।
मुकर्रम अंसारी बोले — “हरिद्वार की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं”
प्रेस वार्ता के दौरान मुकर्रम अंसारी ने कहा कि वे पिछले लंबे समय से हरिद्वार ग्रामीण के मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन जब विधानसभा में जिले का नाम बदनाम किया गया तो कांग्रेस के नेताओं की चुप्पी से वे आहत हैं।
उन्होंने कहा —
“मैंने हमेशा कांग्रेस के सिद्धांतों के साथ चलने की कोशिश की, लेकिन जब पार्टी के अपने लोग जनता की भावनाओं की अनदेखी करने लगें, तब साथ निभाना मुश्किल हो जाता है।”
अंसारी ने इस दौरान संकेत दिए कि वे जल्द ही कांग्रेस पार्टी छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे अब जनता के साथ हैं और अगर पार्टी हरिद्वार की उपेक्षा करती रही, तो वे किसी भी कीमत पर यह अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे।
“हरिद्वार कोई छोटा इलाका नहीं है, यह राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी है। इसे बार-बार पिछड़ा कहने या नकारात्मक रूप से दिखाने की कोशिश की जा रही है। मैं इस अपमान के खिलाफ आवाज उठाता रहूंगा, चाहे इसके लिए मुझे पार्टी से अलग ही क्यों न होना पड़े।” — मुकर्रम अंसारी
कांग्रेस में बढ़ रही अंदरूनी कलह
अंसारी के बयान से हरिद्वार कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में उबाल आ गया है। पहले से ही गुटबाजी का सामना कर रही पार्टी के लिए यह नया विवाद सिरदर्द बन सकता है। पार्टी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि ऐसे बयान संगठन को कमजोर करते हैं, वहीं अंसारी समर्थक इसे “जनता की सच्ची आवाज़” बता रहे हैं।
“मुकर्रम अंसारी पार्टी के समर्पित नेता रहे हैं, लेकिन जिस तरह से हरिद्वार के मुद्दों की अनदेखी की जा रही है, वह चिंताजनक है। अगर नेतृत्व ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो यह असंतोष और गहराएगा।”
हरिद्वार की जनता की भावनाओं से जुड़ा मामला
विधानसभा के विशेष सत्र में मैदानी इलाकों के संबंध में हुई टिप्पणियां सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक मुद्दा भी बन गई हैं। हरिद्वार, जो कि गंगा तट पर बसा धार्मिक और औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण जिला है, को लेकर “मैदानियों का वर्चस्व” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कई लोगों को नागवार गुज़रा। अंसारी ने कहा कि राज्य की नींव में हरिद्वार की भी भूमिका है — चाहे वह आंदोलन का इतिहास हो, धार्मिक धरोहर हो या पर्यटन से मिलने वाला राजस्व। इसलिए इस क्षेत्र को नीचा दिखाना, राज्य की अस्मिता के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष, दोनों को यह समझना होगा कि उत्तराखंड पहाड़ और मैदान — दोनों से मिलकर बना है, और दोनों का समान विकास ही राज्य को आगे ले जा सकता है।
अंत में — जनता के प्रति जवाबदेही की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में मुकर्रम अंसारी ने कहा कि वह आने वाले दिनों में हरिद्वार के जनप्रतिनिधियों से मिलकर एक ज्ञापन तैयार करेंगे, जिसमें यह मांग की जाएगी कि विधानसभा में हरिद्वार के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि जनता ने प्रतिनिधियों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए चुना है, न कि सत्ता में मौन दर्शक बने रहने के लिए।
“यह मामला सिर्फ राजनीति का नहीं, हरिद्वार की गरिमा का है। अगर हमारे प्रतिनिधि अपनी ही भूमि के पक्ष में नहीं बोलेंगे, तो यह जनता के साथ अन्याय होगा।” — मुकर्रम अंसारी, नेता हरिद्वार



