वैदिक संस्कारों की ज्योति से आलोकित हुआ आचार्यकुलम् 🔱 🔱 90 विद्यार्थियों का वैदिक परंपरा के साथ भव्य दीक्षारोहण संपन्न 🔱 🔱 स्वामी रामदेवजी व आचार्य बालकृष्णजी के सान्निध्य में विद्यार्थियों ने लिया संस्कार प्रसार का संकल्प 🔱

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔱 वैदिक संस्कारों की ज्योति से आलोकित हुआ आचार्यकुलम् 🔱
🔱 90 विद्यार्थियों का वैदिक परंपरा के साथ भव्य दीक्षारोहण संपन्न 🔱
🔱 स्वामी रामदेवजी व आचार्य बालकृष्णजी के सान्निध्य में विद्यार्थियों ने लिया संस्कार प्रसार का संकल्प 🔱

हरिद्वार। आचार्यकुलम् शिक्षण संस्थान में बुधवार को सत्र 2025-26 की कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों का दीक्षारोहण समारोह अत्यंत भव्य एवं वैदिक परंपराओं के अनुरूप सम्पन्न हुआ। योग, आध्यात्म और भारतीय संस्कारों की समृद्ध परंपरा को जीवंत करते हुए आयोजित इस पावन समारोह में 90 विद्यार्थियों ने जीवन में उच्च आदर्शों का पालन करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर आचार्यकुलम् परिसर आध्यात्मिक वातावरण और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।
समारोह में परमपूज्य स्वामीजी महाराज ने आचार्यकुलम् को विश्व का विशिष्ट शिक्षण संस्थान बताते हुए कहा कि यहाँ योग एवं आध्यात्म से प्राप्त संस्कार विद्यार्थियों को निरंतर सफलता के शिखर तक पहुँचने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्यकुलम् केवल शिक्षा देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र है, जहाँ विद्यार्थी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनते हैं।
वहीं परमश्रद्धेय आचार्यश्री ने दीक्षारोहण उत्सव को सकारात्मकता और पुरुषार्थ का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह समारोह विद्यार्थियों को अनुशासन, संस्कार और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर अग्रसर करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को योग एवं यज्ञ के अनुशासन का पालन करते हुए जीवन में सफलता प्राप्त करने का संदेश दिया।
वैदिक रीति से संपन्न हुआ 12 कुण्डीय विशेष यज्ञ
दीक्षारोहण समारोह के दौरान आचार्यकुलम् परिसर में 12 कुण्डीय विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। इस यज्ञ में सत्र 2025-26 की कक्षा 12वीं के 49 बालक और 41 बालिकाओं सहित कुल 90 विद्यार्थियों ने भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ की पवित्र अग्नि के मध्य विद्यार्थियों का दीक्षारोहण संस्कार सम्पन्न कराया गया।
समारोह के दौरान परमपूज्य स्वामीजी महाराज ने यज्ञ की प्रत्येक क्रिया और उसके महत्व की सरल एवं सारगर्भित व्याख्या की। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक कल्याण का प्रतीक है।
दीक्षारोहण के दौरान सभी विद्यार्थियों ने परमपूज्य स्वामीजी महाराज एवं परमश्रद्धेय आचार्यश्री द्वारा प्रज्ज्वलित ‘महाज्ञान ज्योति’ से अपने दीपों को प्रज्ज्वलित किया। यह क्षण अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायी रहा, जब विद्यार्थियों ने शिक्षा एवं संस्कारों को समाज में प्रसारित करने की प्रतिज्ञा ली। इस दौरान पूरे परिसर में आध्यात्मिक उल्लास और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला।
विद्यार्थियों को मिला आशीर्वाद और प्रतीकचिह्न
समारोह के समापन अवसर पर परमपूज्य स्वामीजी महाराज और परमश्रद्धेय आचार्यश्री ने सभी विद्यार्थियों को अपने करकमलों से प्रतीकचिह्न भेंट किए और सुमनवृष्टि कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में सदैव सत्य, अनुशासन और सेवा भावना को अपनाने का संदेश दिया।
आचार्यकुलम् की उपाध्यक्षा परमादरणीया डॉ. ऋतंभरा शास्त्री ‘बहनजी’ ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आचार्यकुलम् से प्राप्त संस्कार जीवनभर मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को आगामी बोर्ड परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएँ देते हुए आत्मविश्वास और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
प्राचार्या श्रीमती स्वाति मुंशी ने भी विद्यार्थियों को शुभाशीष प्रदान करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं बल्कि चरित्र निर्माण और समाज सेवा है। उन्होंने विद्यार्थियों को आचार्यकुलम् के आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
दीक्षारोहण समारोह में अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एन. पी. सिंह, आदरणीया बहन आशु जी और पारुल जी, हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष जयदीप आर्य, भारत स्वाभिमान के मुख्य केंद्रीय प्रभारी राकेश मित्तल सहित कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व समारोह में उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त साधना एवं समर्पण के पर्याय पूज्य संन्यासीवृंद, श्रद्धामयी साध्वी बहनों ने भी समारोह की गरिमा बढ़ाई। पतंजलि प्रोजेक्ट एवं इन्फ्रा के सीईओ रवि पंडित, पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य अनिल यादव, पतंजलि कैरियर अकादमी के प्रमुख प्रदीप जी ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में आचार्यकुलम् के उप-प्राचार्य तापस जी, क्रीड़ाध्यक्ष एवं प्रधान छात्रपाल अमित जी, समन्वयिका श्रीमती दीपा जी सहित सभी आचार्यगण, कर्मचारीगण और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
संस्कार और शिक्षा के समन्वय का अद्भुत उदाहरण
दीक्षारोहण समारोह ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि आचार्यकुलम् केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों का संवाहक है। यहाँ विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का ज्ञान प्रदान किया जाता है, जो उन्हें समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है।
समारोह के अंत में विद्यार्थियों ने आचार्यकुलम् से प्राप्त ज्ञान और संस्कारों को जीवन में आत्मसात करने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। यह पावन अवसर विद्यार्थियों के जीवन में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आया।



