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बहादराबाद के ज्या मैक्सवेल हॉस्पिटल पर लापरवाही के गंभीर आरोप,, इलाज के दौरान लाखन की मौत के बाद भड़का लोगों का आक्रोश, CMO कार्यालय का घेराव,, आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी का प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की उठी मांग,, डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित के नाम एसडीएम सदर को सौंपा ज्ञापन 

इन्तजार रजा हरिद्वार- बहादराबाद के ज्या मैक्सवेल हॉस्पिटल पर लापरवाही के गंभीर आरोप,,

इलाज के दौरान लाखन की मौत के बाद भड़का लोगों का आक्रोश, CMO कार्यालय का घेराव,,

आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी का प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की उठी मांग,,

डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित के नाम एसडीएम सदर को सौंपा ज्ञापन 

इन्तजार रजा, हरिद्वार। हरिद्वार के बहादराबाद क्षेत्र स्थित जय मैक्सवेल हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण विवादों के केंद्र में आ गया है। अस्पताल में उपचार के दौरान लाखन नामक व्यक्ति की मौत के बाद स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। मामले को लेकर गुरुवार को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी भारत एकता मिशन के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय हरिद्वार का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रबंधन पर मरीजों के साथ दुर्व्यवहार, इलाज में लापरवाही और भारी भरकम शुल्क वसूलने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


इलाज के दौरान लाखन की मौत से मचा हड़कंप

जानकारी के अनुसार बहादराबाद क्षेत्र के एक परिवार के सदस्य लाखन को गंभीर हालत में उपचार के लिए जय मैक्सवेल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद मरीज को उचित उपचार नहीं मिला और इलाज के दौरान गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही बरती गई।

परिजनों का कहना है कि लाखन की तबीयत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने समय रहते पर्याप्त उपचार नहीं दिया। उनका आरोप है कि इलाज के दौरान न तो मरीज की स्थिति की स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही यह बताया गया कि किस डॉक्टर की देखरेख में उपचार किया जा रहा है।

परिवार के लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल समय पर उचित उपचार करता तो संभवतः लाखन की जान बचाई जा सकती थी। मौत की खबर फैलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों में भी अस्पताल के प्रति नाराजगी बढ़ने लगी।

घटना के बाद मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। परिजनों का कहना है कि उन्हें न तो इलाज से संबंधित दस्तावेज सही तरीके से दिखाए गए और न ही मौत के वास्तविक कारण के बारे में स्पष्ट जानकारी दी गई।


CMO कार्यालय का घेराव, जमकर हुई नारेबाजी

घटना के बाद सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवाज उठाई। गुरुवार को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी भारत एकता मिशन के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में हरिद्वार पहुंचकर CMO कार्यालय का घेराव किया।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि निजी अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद मरीजों के साथ कई बार अन्याय होता है और इलाज के नाम पर मनमानी फीस वसूली जाती है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह केवल एक परिवार के साथ अन्याय नहीं होगा बल्कि पूरे समाज के लिए एक गलत संदेश जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान संगठनों के कई पदाधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए अस्पताल की कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग की।

डॉक्टरों की डिग्री और ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच की मांग

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों की डिग्रियों और उनकी योग्यता की जांच कराई जानी चाहिए।

संगठनों का आरोप है कि कई निजी अस्पतालों में ऐसे लोग भी मरीजों का इलाज करते पाए जाते हैं जिनकी योग्यता स्पष्ट नहीं होती या जिन्हें गंभीर मरीजों का इलाज करने का अधिकार नहीं होता।

इसके अलावा उन्होंने यह भी मांग की कि अस्पताल के आईसीयू और इमरजेंसी वार्ड में पिछले कुछ दिनों के दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जाए।

संगठनों ने यह भी कहा कि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि मरीज के इलाज के दौरान क्या स्थिति थी और किस प्रकार का उपचार दिया गया।

इसके साथ ही मरीज के इलाज से जुड़े सभी मेडिकल दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग की गई है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

अस्पताल पर पहले भी लग चुके हैं आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि जय मैक्सवेल हॉस्पिटल को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। कुछ लोगों ने अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया और शुल्क को लेकर असंतोष जताया है।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हाल की घटना के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर स्वास्थ्य विभाग को नियमित निगरानी रखनी चाहिए ताकि मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।

संगठनों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

आजाद समाज पार्टी के प्रदेश संयोजक महक सिंह ने कहा कि संगठन पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अस्पताल की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं भीम आर्मी के कार्यकर्ता तेज प्रताप सैनी ने कहा कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं है बल्कि आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को मरीजों के साथ जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

 

प्रशासन ने जांच का दिया आश्वासन

इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन ने भी गंभीरता दिखाई है। अधिकारियों का कहना है कि संगठनों की ओर से प्राप्त शिकायत और ज्ञापन को संबंधित विभागों के माध्यम से जांच के लिए भेजा जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई

जय मैक्सवेल हॉस्पिटल में लाखन की मौत का मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में पहुंच चुका है। पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।

अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होती है तो इस मामले की सच्चाई सामने आ सकती है और दोषियों पर कार्रवाई भी संभव हो सकेगी।

फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मृतक के परिवार को जल्द न्याय मिलेगा।

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