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राष्ट्रपति मुर्मु बोलीं — “महिलाओं की भागीदारी ही विकसित भारत का अग्रिम स्वरूप है,, पतंजलि विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने साझा किया ‘विकसित भारत’ का दृष्टिकोण,, राष्ट्रपति ने दीक्षांत में बेटियों को सराहा, राज्यपाल ने कहा — योग और आयुर्वेद भारत की आत्मा, मुख्यमंत्री बोले — उत्तराखंड शिक्षा नवाचार में अग्रणी बनेगा

हरिद्वार के पवित्र पतंजलि विश्वविद्यालय परिसर में आज एक ऐतिहासिक क्षण बना जब महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। अपनी प्रेरणादायक वाणी में उन्होंने कहा कि “आज उपाधि प्राप्त करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को मेरी हार्दिक बधाई और आशीर्वाद! यह दिवस न केवल विद्यार्थियों के लिए बल्कि उनके माता-पिता और शिक्षकों के लिए भी गर्व का क्षण

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 राष्ट्रपति मुर्मु बोलीं — “महिलाओं की भागीदारी ही विकसित भारत का अग्रिम स्वरूप है,,
पतंजलि विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने साझा किया ‘विकसित भारत’ का दृष्टिकोण,,
राष्ट्रपति ने दीक्षांत में बेटियों को सराहा, राज्यपाल ने कहा — योग और आयुर्वेद भारत की आत्मा, मुख्यमंत्री बोले — उत्तराखंड शिक्षा नवाचार में अग्रणी बनेगा

LIVE link of Hon’ble President Droupadi Murmu’s prog at University of Patanjali, Haridwar

हरिद्वार, 02 नवंबर 2025,हरिद्वार के पवित्र पतंजलि विश्वविद्यालय परिसर में आज एक ऐतिहासिक क्षण बना जब महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। अपनी प्रेरणादायक वाणी में उन्होंने कहा कि “आज उपाधि प्राप्त करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को मेरी हार्दिक बधाई और आशीर्वाद! यह दिवस न केवल विद्यार्थियों के लिए बल्कि उनके माता-पिता और शिक्षकों के लिए भी गर्व का क्षण है।”

राष्ट्रपति ने कहा कि “आज उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों में 64 प्रतिशत संख्या बेटियों की है। पदक प्राप्त करने वाली बेटियों की संख्या छात्रों की तुलना में चार गुना अधिक है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि भारत की उस सशक्त तस्वीर का संकेत है जिसमें महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में हैं। यह वही परंपरा है जो गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं की ज्ञान-परंपरा से प्रेरणा पाती है।”

उन्होंने कहा कि हरिद्वार की पावन धरती जहां ‘हर’ और ‘हरि’ दोनों के दर्शन का द्वार खुलता है, वही ज्ञान और साधना की भूमि है। “हिमालय के इस अंचल से जैसे पवित्र नदियां प्रवाहित होती हैं, वैसे ही यहां से ज्ञान-गंगा की अनेक धाराएं भी निकलती हैं। पतंजलि विश्वविद्यालय भी ऐसी ही एक अविरल धारा है जो आधुनिक भारत को वैदिक मूल्यों से जोड़ रही है,” राष्ट्रपति ने कहा।

🔶 शिक्षा, संस्कृति और समरसता — राष्ट्रपति मुर्मु का सन्देश

महामहिम ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षा को भारतीय संस्कृति के अनुरूप आगे बढ़ाने का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने महर्षि पतंजलि के योगदान को याद करते हुए कहा, “महर्षि पतंजलि ने योग से चित्त की, व्याकरण से वाणी की और आयुर्वेद से शरीर की अशुद्धियों को दूर किया। ऐसे महान ऋषि के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय ज्ञान का तीर्थ है।”

उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान और शिक्षा कार्यों की सराहना की। “यह प्रयास स्वस्थ भारत के निर्माण में सहायक हैं। मैं इस भारत-केंद्रित शिक्षा दृष्टि से अत्यंत प्रभावित हूं, जिसमें विश्व बंधुत्व, प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय है,” उन्होंने कहा।

राष्ट्रपति ने छात्रों से कहा कि उन्हें जीवन में “स्वाध्याय, तपस्या और आर्जव” जैसे मूल्यों को अपनाना चाहिए। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उदाहरण देते हुए कहा, “स्वाध्याय का अर्थ है निरंतर अध्ययन और मनन, तप का अर्थ है कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्य निभाना, और आर्जव का अर्थ है अंतःकरण की सरलता। यही तीन गुण जीवन को सार्थक बनाते हैं।”

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे भगीरथ के संकल्प को अपना आदर्श बनाएं। “भगीरथ ने अपनी तपस्या से मां गंगा को धरती पर अवतरित किया। उसी प्रकार आप भी अपने कर्म और समर्पण से राष्ट्र निर्माण के संकल्पों को सिद्ध करें।”

🔶 राज्यपाल गुरमीत सिंह बोले — योग और आयुर्वेद भारत का वैश्विक संदेश

कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने महामहिम राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि “देवभूमि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि योग, आयुर्वेद और अध्यात्म का प्राण-केंद्र है। यह वह धरती है जहां से सद्भाव, स्वास्थ्य और संतुलन का संदेश पूरी दुनिया में गया।”

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक मान्यता मिली है, जिससे भारत की ऋषि परंपरा को सम्मान मिला। उन्होंने कहा, “हमारे मुनियों ने ज्ञान केवल अपने लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण के लिए अर्जित किया था। पतंजलि विश्वविद्यालय उसी भावना को आज भी जीवित रखे हुए है।”

उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “आप सभी स्वास्थ्य योद्धा हैं जो योग और आयुर्वेद के माध्यम से मानवता की सेवा करेंगे। आपकी शिक्षा केवल आत्म-विकास के लिए नहीं, बल्कि विश्व कल्याण के लिए भी होनी चाहिए।”

राज्यपाल ने इस अवसर पर राष्ट्रपति को ‘फ्लोरा ऑफ राष्ट्रपति भवन’ और ‘मेडिसिनल प्लांट्स ऑफ राष्ट्रपति भवन’ शीर्षक दो विशेष पुस्तकों की प्रतिलिपियां भेंट कीं।

🔶 मुख्यमंत्री धामी बोले — “नवाचार और संस्कार से बनेगा उत्तराखंड अग्रणी”

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “आज का दिन विद्यार्थियों के लिए गर्व और प्रेरणा दोनों लेकर आया है। दीक्षांत केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि यह आपके परिश्रम और समर्पण का प्रमाण है।”

उन्होंने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति का संघर्षपूर्ण जीवन, मातृत्व की भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण हर युवा के लिए प्रेरणा है। “राफेल विमान में उड़ान भरकर राष्ट्रपति जी ने राष्ट्रभक्ति और साहस का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया,” उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षा को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है। “यह गुरुकुल परंपरा की पुनर्स्थापना का जीवंत उदाहरण है, जहाँ विज्ञान और अध्यात्म का संगम देखने को मिलता है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने राज्य की शिक्षा नीति और नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा, “नई शिक्षा नीति के तहत हमने विश्वविद्यालयों में Artificial Intelligence, Machine Learning और Big Data जैसे कोर्स शुरू किए हैं। साथ ही, दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना की है ताकि हमारी संस्कृति और दर्शन का गहन अध्ययन हो सके।”मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को ‘फ्यूचर-रेडी’ बनाने के लिए स्टार्टअप और इनोवेशन को प्रोत्साहन दे रही है। “हम चाहते हैं कि हमारे युवा केवल नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें। इसी लक्ष्य के तहत हमने इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए हैं,” उन्होंने कहा।उन्होंने यह भी जोड़ा कि उत्तराखंड ने देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिससे पारदर्शिता आई है और पिछले साढ़े चार वर्षों में 26,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं।

🔶 स्वामी रामदेव बोले — “पतंजलि विश्वविद्यालय शिक्षा में स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है”

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योग ऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि “आज महामहिम राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित यह समारोह पतंजलि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा का स्वर्णिम अध्याय है।”

उन्होंने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में कुल 1,424 विद्यार्थियों को उपाधियाँ दी गईं, जिनमें 54 स्वर्ण पदक विजेता, 62 शोधार्थी (PhD) और 3 डी.लिट. विद्वान शामिल हैं।

राष्ट्रपति द्वारा मेडल प्राप्त करने वालों में प्रमुख रहे —

  • साध्वी देवपूजा जी, 90% अंकों के साथ विश्वविद्यालय टॉपर
  • देवेन्द्र सिंह (स्वामी इन्द्रदेव), एम.ए. संस्कृत व्याकरण 94%
  • मानसी (साध्वी देववाणी)ट्रिपल गोल्ड मेडलिस्ट (बी.ए. संस्कृत व्याकरण, एम.ए. संस्कृत व्याकरण, एम.ए. योगा साइंस)
  • अजय कुमार (स्वामी आर्षदेव), एम.ए. दर्शन 92%
  • रीता कुमारी (साध्वी देवसुधा), एम.ए. संस्कृत व्याकरण 90%
  • शालू भदौरिया (साध्वी देवशीला), बी.ए. दर्शन 90%
  • अंशिका, बी.ए. योगा साइंस 87%
  • प्रीति पाठक, एम.ए. साइकोलॉजी 87%
  • पूर्वा, एम.एससी. योगा साइंस 85%
  • मैत्रेई, बी.एससी. योगा साइंस 83%

🔶 पतंजलि की उपलब्धियाँ और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि द्वारा सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि “विश्वविद्यालय न केवल योग और आयुर्वेद की शिक्षा दे रहा है, बल्कि अनुसंधान, नवाचार और मानवता की सेवा में भी अग्रणी है।”

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी, पूर्व कैबिनेट मंत्री यतिश्वरानंद महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, भाजपा जिला अध्यक्ष अशुतोष शर्मा, रुड़की की डॉ. मधु सिंह, आयुष सचिव दीपेंद्र कुमार चौधरी, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, डीएम मयूर दीक्षित, एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोभाल, सीडीओ ललित नारायण मिश्रा, एसपी क्राइम जितेंद्र मेहरा, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, एसपी ग्रामीण शेखर सुयाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद सेठ, एडीएम पी.आर. चौहान, सीटी मजिस्ट्रेट कुशम चौहान सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, छात्र-छात्राएँ और अभिभावक उपस्थित रहे।

🔶 समारोह ने जगाया ‘ज्ञान से राष्ट्र निर्माण’ का संकल्प

यह दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इसने राष्ट्र निर्माण, समरसता और भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण का संदेश दिया। हरिद्वार की पवित्र धरती पर जब महामहिम राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को आशीर्वाद दिया, तो पूरा वातावरण “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से गुंजायमान हो उठा।

राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के प्रेरणादायी उद्बोधनों ने पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और उद्देश्यबोध का संचार किया। यह समारोह भारत के उस भविष्य की झलक था जहां शिक्षा केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, संस्कारों और वैश्विक कल्याण का माध्यम बनती है।

“व्यक्ति-निर्माण से राष्ट्र-निर्माण का मार्ग यहीं से प्रशस्त होता है” — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

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