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दरगाह प्रबंधक पर प्रशासनिक शिकंजा कसा,, डीएम मयूर दीक्षित ने दरगाह प्रबंधक रजिया को थमाया कारण बताओ नोटिस,, 7 दिन में जवाब नहीं तो होगी विभागीय कार्रवाई,, गबन के आरोपों में ही पहले भी सस्पेंड हो चुका है एक सुपरवाइजर

हरिद्वार जनपद की ऐतिहासिक दरगाह हज़रत साबिर पाक में चल रही प्रबंधन की अनियमितताओं पर आखिरकार जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठा लिया है। लंबे समय से चल रहे विवाद, वित्तीय अनियमितताओं और फंड के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने दरगाह प्रबंधक रजिया बेगम को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, डीएम ने तत्काल प्रभाव से दरगाह के सभी वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक अधिकारों को निलंबित कर दिया है। अब दरगाह की सभी गतिविधियां वक्फ बोर्ड और जिला प्रशासन की सीधी निगरानी में रहेंगी।

इन्तजार रजा हरिद्वार -दरगाह प्रबंधक पर प्रशासनिक शिकंजा कसा,,
डीएम मयूर दीक्षित ने दरगाह प्रबंधक रजिया को थमाया कारण बताओ नोटिस,,
7 दिन में जवाब नहीं तो होगी विभागीय कार्रवाई,, गबन के आरोपों में ही पहले भी सस्पेंड हो चुका है एक सुपरवाइजर

हरिद्वार / पिरान कलियर — (08 नवंबर 2025)

हरिद्वार जनपद की ऐतिहासिक दरगाह हज़रत साबिर पाक में चल रही प्रबंधन की अनियमितताओं पर आखिरकार जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठा लिया है। लंबे समय से चल रहे विवाद, वित्तीय अनियमितताओं और फंड के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने दरगाह प्रबंधक रजिया बेगम को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, डीएम ने तत्काल प्रभाव से दरगाह के सभी वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक अधिकारों को निलंबित कर दिया है। अब दरगाह की सभी गतिविधियां वक्फ बोर्ड और जिला प्रशासन की सीधी निगरानी में रहेंगी।

🔹 वक्फ बोर्ड की जांच में सामने आईं चौंकाने वाली गड़बड़ियां

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा कराई गई विशेष जांच रिपोर्ट में दरगाह के ठेकों, खातों और खर्चों में भारी वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार,

  • कई ठेके बिना अनुमोदन के जारी किए गए,
  • बैंक खातों से निकासी बिना स्वीकृति के की गई,
  • और खर्चों का कोई समुचित लेखा-जोखा नहीं रखा गया।

प्रारंभिक जांच में ₹10.88 लाख की सीधी वित्तीय गड़बड़ी और करीब ₹2.33 करोड़ रुपये तक की संदिग्ध वित्तीय अनियमितता का अनुमान जताया गया है। डीएम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो दरगाह की आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हो सकती थी।

🔹 डीएम का आदेश — “कोई भुगतान, कोई साइन नहीं”

डीएम मयूर दीक्षित ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक,

  • दरगाह प्रबंधक किसी भी प्रकार का वित्तीय या प्रशासनिक निर्णय नहीं लेंगी,
  • उनके हस्ताक्षर से कोई भी फाइल, भुगतान या लेनदेन नहीं किया जाएगा,
  • सभी कार्य अब संयुक्त मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र शेट की निगरानी में होंगे।

उन्होंने कहा कि “पारदर्शिता और जवाबदेही ही आस्था स्थलों की आत्मा है, कोई भी मनमानी अब नहीं चलेगी।

🔹 पहले भी उठ चुके हैं सवाल, बीते दिनों सस्पेंड हुआ था एक सुपरवाइजर

यह कोई पहली बार नहीं है जब दरगाह प्रबंधन पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) ने दरगाह की वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों को लेकर कई रिपोर्टें शासन को भेजी थीं। बीते महीनों में दरगाह से जुड़े एक सुपरवाइजर को वित्तीय अनियमितताओं और दानपात्र से पैसे गबन के आरोपों में निलंबित किया गया था, मगर उसके बाद भी सुधार के संकेत नहीं मिले। अधिकारियों का कहना है कि “प्रबंधन ने बार-बार चेतावनी के बावजूद सुधार नहीं किया।”

🔹 राजनीतिक स्तर पर भी गूंजा मामला

दरगाह प्रबंधन की गड़बड़ियों को लेकर स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधि और विधायकों ने कई बार विरोध प्रदर्शन किए। पिरान कलियर क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देने की घटनाएं आम हो गई थीं। स्थानीय नेताओं ने कहा था कि “दरगाह की पवित्रता को कुछ लोग निजी लाभ का साधन बना रहे हैं, और प्रशासन मौन दर्शक बना हुआ है।” इन आवाज़ों के बाद अब जाकर प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाया है।

🔹 असंतोषजनक जवाब पर होगी कड़ी कार्रवाई

डीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि रजिया बेग का जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो उनके खिलाफ

  • विभागीय कार्रवाई की जाएगी,
  • और मामले को उच्च स्तर (वक्फ बोर्ड मुख्यालय देहरादून) को भेजा जाएगा

वक्फ बोर्ड के अधिकारी भी अब पूरे प्रकरण पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं। बोर्ड सूत्रों के मुताबिक, “दरगाह से जुड़ी हर पाई का हिसाब अब मांगा जाएगा, और फर्जी भुगतान या हेराफेरी की एक-एक परत खोली जाएगी।

🔹 स्थानीय स्तर पर मचा हड़कंप, “शायद सालों से चल रहा खेल उजागर”

डीएम के आदेश के बाद दरगाह प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। कर्मचारी और अनुयायी दोनों सकते में हैं। स्थानीय स्तर पर लोग इसे “वर्षों से चली आ रही फंड की राजनीति और बंदरबांट पर प्रशासन का बड़ा प्रहार” मान रहे हैं। दरगाह से जुड़े कई पुराने सेवक और मुतवल्ली अब खुलकर बोल रहे हैं कि “सालों से जो मनमानी चल रही थी, अब जाकर कोई तो कार्रवाई हुई।

🔹 वक्फ बोर्ड का रुख सख्त, पारदर्शिता होगी सुनिश्चित

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने भी जिलाधिकारी की कार्रवाई का समर्थन किया है और कहा है कि “यह कदम आस्था की मर्यादा और संस्थागत जवाबदेही को बहाल करने की दिशा में अहम है।
बोर्ड का मानना है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो समाज का भरोसा धार्मिक संस्थाओं से उठ सकता है।

🔹 जनता की अपेक्षा, डीएम साहब– “आस्था स्थल को राजनीति और लालच से मुक्त करिऐ”

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से यह भी अपील की है कि दरगाह को राजनीति और व्यक्तिगत स्वार्थ से दूर रखकर एक पारदर्शी, सामुदायिक और उत्तरदायी प्रबंधन प्रणाली स्थापित की जाए।

एक स्थानीय श्रद्धालु का कहना है –

“साबिर पाक की दरगाह हमारी आस्था का केंद्र है, यहां से जुड़ा हर रुपया जनसेवा और धार्मिक कार्यों में लगना चाहिए, न कि किसी के निजी स्वार्थ में।”

🔹दरगाह प्रबंधन पर यह कार्रवाई न केवल एक वित्तीय अनुशासन की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आस्था के नाम पर भ्रष्टाचार को अब बख्शा नहीं जाएगा
डीएम मयूर दीक्षित की सख्ती से यह संदेश स्पष्ट है –

“धर्मस्थल प्रशासन के नाम पर चल रही मनमानी अब नहीं चलेगी।”

 रिपोर्ट : इंतज़ार रज़ा, “Daily Live Uttarakhand” विशेष संवाददाता

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