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अवैध अस्पतालों, पैथोलॉजी लैबों पर सख्त नकेल की तैयारी,, बिना NOC किराए पर नहीं दे सकेंगे दुकान–मकान,, स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला, मालिक और किराएदार दोनों पर होगी कार्रवाई

इन्तजार रजा हरिद्वार- अवैध अस्पतालों, पैथोलॉजी लैबों पर सख्त नकेल की तैयारी,,

बिना NOC किराए पर नहीं दे सकेंगे दुकान–मकान,,

स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला, मालिक और किराएदार दोनों पर होगी कार्रवाई

हरिद्वार– शहर में अवैध अस्पतालों, पैथोलॉजी लैबों और बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे मेडिकल प्रतिष्ठानों पर अब स्वास्थ्य विभाग ने निर्णायक कार्रवाई की शुरुआत कर दी है। विभाग ने एक अहम आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब कोई भी संपत्ति मालिक अपने भवन, दुकान या मकान को किसी अस्पताल, क्लीनिक या लैब को किराए पर देने से पहले स्वास्थ्य विभाग की ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) अनिवार्य रूप से प्राप्त करेगा।

संपत्ति मालिकों पर भी कसेगा शिकंजा

नए निर्देशों के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सिर्फ अवैध अस्पताल या लैब चलाने वाला ही दोषी नहीं माना जाएगा, बल्कि वह संपत्ति मालिक भी समान रूप से जिम्मेदार होगा जिसने बिना अनुमति के अपनी जगह किराए पर दी है। शहर में बड़ी संख्या में संचालित हो रहे बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल, गैर-मानक पैथोलॉजी और अवैध क्लीनिकों को देखते हुए यह फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब तक कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां भवन मालिकों ने किराएदारी समझौता कर अपनी दुकानें और मकान मेडिकल प्रतिष्ठानों को दे दिए, लेकिन न तो लाइसेंस जांचा और न ही विभागीय अनुमति। ऐसे स्थानों में गलत इलाज, फर्जी टेस्ट, मशीनों की कमी और प्रशिक्षित कर्मचारियों के अभाव जैसी शिकायतें आम हैं।

मुख्य नियम और कार्रवाई की तैयारी

आदेश में कहा गया है कि—

  • अब किसी भी मेडिकल प्रतिष्ठान को स्थान देने से पहले स्वास्थ्य विभाग से NOC लेना अनिवार्य होगा।
  • बिना NOC पकड़े जाने पर संपत्ति मालिक और किराएदार दोनों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
  • यह कदम अवैध लैबों और अस्पतालों के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है।
  • जल्द ही जिले में व्यापक निरीक्षण अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें नियम तोड़ने वालों पर त्वरित कार्रवाई होगी।

अधिकारियों ने साफ कहा है कि अवैध मेडिकल गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे प्रतिष्ठान न सिर्फ कानून का उल्लंघन करते हैं, बल्कि मरीजों की जान को भी खतरे में डालते हैं।

शहर से लेकर देहात तक में बड़ा असर—किराए पर देने वालों की बढ़ी जिम्मेदारी

नए आदेश के बाद अब संपत्ति मालिकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। यदि वे अपनी दुकान या मकान को अस्पताल, लैब या मेडिकल क्लीनिक के रूप में किराए पर देना चाहते हैं, तो उन्हें पहले विभागीय अनुमति लेकर ही अनुबंध करना होगा। यह व्यवस्था मेडिकल सेक्टर में पारदर्शिता और सुरक्षा को मजबूत करेगी।

शहर में अवैध मेडिकल प्रतिष्ठानों के लगातार बढ़ते मामलों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों को चिंता में डाल रखा था। कई जगहों पर बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के ऑपरेशन तक किए जाने की शिकायतें मिली थीं। ऐसे में नया आदेश हरिद्वार में स्वास्थ्य सेवाओं को सुरक्षित, नियंत्रित और मानकीकृत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग जल्द ही सभी क्षेत्रों में व्यापक जांच अभियान चलाने वाला है। नियम तोड़ने वाले न सिर्फ सीलिंग बल्कि जुर्माना और मुकदमे जैसी कार्रवाई झेलेंगे। आदेश लागू होते ही शहर में किराएदारी और मेडिकल प्रतिष्ठानों के संचालन पर बड़ा प्रभाव दिखाई देने लगा है।

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