हर काम देश के नाम,,’ भारतीय सेना की रैम डिविजन का शक्ति–प्रदर्शन,, सैन्य अभ्यास ‘रैम प्रहार’ का हरिद्वार में सफल आयोजन,, आधुनिक युद्धक्षेत्र के लिए तैयार—तेजी, तकनीक और तालमेल का अनूठा प्रदर्शन,, अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रयोग—“नई पीढ़ी की सेना” की झलक

इन्तजार रजा हरिद्वार- ‘हर काम देश के नाम,,’
भारतीय सेना की रैम डिविजन का शक्ति–प्रदर्शन,,
सैन्य अभ्यास ‘रैम प्रहार’ का हरिद्वार में सफल आयोजन,,
आधुनिक युद्धक्षेत्र के लिए तैयार—तेजी, तकनीक और तालमेल का अनूठा प्रदर्शन,,
अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रयोग—“नई पीढ़ी की सेना” की झलक
भारतीय सेना की खड़ग कोर के अंतर्गत आने वाली रैम डिविजन ने आधुनिक युद्ध सिद्धांतों पर आधारित भव्य एवं व्यापक सैन्य अभ्यास ‘रैम प्रहार’ को सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह अभ्यास हाल के वर्षों में पश्चिमी सीमांत पर आयोजित प्रमुख सैन्य अभियानों में से एक माना जा रहा है।
शनिवार को हरिद्वार में आयोजित इस युद्धाभ्यास के समापन अवसर पर पश्चिमी कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने स्वयं उपस्थित होकर पूरे अभियान का निरीक्षण और मान्यकरण किया। उन्होंने रैम डिविजन की युद्धक क्षमताओं और सैनिकों के उत्साह की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह अभ्यास भारतीय सेना की फुर्ती, सटीकता और तकनीकी दक्षता का स्पष्ट प्रमाण है।
आधुनिक युद्धक्षेत्र के लिए तैयार—तेजी, तकनीक और तालमेल का अनूठा प्रदर्शन
‘रैम प्रहार’ का सबसे बड़ा उद्देश्य—युद्ध के दौरान बहु-क्षेत्रीय सैन्य क्षमताओं (Multi-Domain Operations) को परखना और वास्तविक परिस्थितियों में उनकी प्रभावशीलता बढ़ाना था।
वर्तमान क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में, जहां दुश्मन लगातार अपनी तकनीक बदल रहा है, इस अभ्यास ने भारतीय सेना को अपने प्रतिरोधक बल और परिचालनिक तैयारी को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
इस दौरान सेना ने—
- भूमि, वायु एवं साइबर तीनों मोर्चों पर रियल-टाइम निर्णय-क्षमता को परखा
- अत्याधुनिक AI आधारित निर्णय सहयोग प्रणाली का उपयोग किया
- ISR (इंटेलिजेंस–सर्विलांस–रिकॉनिसेंस) नेटवर्क को एकीकृत किया
- नेटवर्क-सक्षम कमांड & कंट्रोल सिस्टम का प्रदर्शन किया
- टैक्टिक्स, टेक्नीक और प्रोसीजर (TTPs) को वास्तविक युद्धक्षेत्र पर सत्यापित किया
अभ्यास में क्वचित सेना, पैदल सेना, इंजीनियर यूनिट्स और आर्मी एविएशन ने तालमेल के साथ उन जटिल परिस्थितियों पर काम किया, जिन्हें भविष्य के युद्धों की वास्तविक चुनौतियों के रूप में देखा जा रहा है।
अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रयोग—“नई पीढ़ी की सेना” की झलक
सेना ने अभ्यास में कई उन्नत उपकरणों और हथियार प्रणालियों का उपयोग किया, जिनमें—
- थल और वायु तत्वों का संयुक्त समन्वय
- मशीन लर्निंग आधारित ट्रैकिंग सिस्टम
- लक्ष्य-सटीक फायर असॉल्ट
- तेज गतिशीलता और पुनः तैनाती क्षमता
इन सभी ने एक स्पष्ट संदेश दिया—
भारतीय सेना भविष्य के तकनीक प्रधान युद्धक्षेत्र में विजय हासिल करने की पूरी क्षमता रखती है।
लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने इस अवसर पर कहा—
“हमारी सेना केवल आज की नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है। भारतीय सैनिकों का उत्साह, पेशेवर दृष्टि और अनुकूलनशीलता हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”
रणनीतिक दृढ़ता का संदेश—“राष्ट्रहित सर्वोपरि”
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि हाल के समय में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और सीमा पर लगातार बदलते खतरे के बीच यह अभ्यास भारत की तैयारी और आक्रामक रक्षा रणनीति का सशक्त संकेत है।
यह अभ्यास न केवल सेना की परिचालनिक गति को बढ़ाने वाला है बल्कि—
- राष्ट्र के हितों की रक्षा
- घुसपैठ—आतंकी खतरों को निष्क्रिय
- क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने
जैसे मुख्य उद्देश्यों को केंद्र में रखकर आयोजित किया गया।
रैम डिविजन ने अभ्यास के दौरान स्थानीय प्रशासन, नागरिक संसाधनों एवं आपदा प्रबंधन प्रणालियों के साथ समन्वय का भी परीक्षण किया, जो किसी भी व्यापक संघर्ष में निर्णायक भूमिका निभाता है।
जनता का विश्वास—सेना की सबसे बड़ी शक्ति
भारतीय सेना की कार्यप्रणाली का एक अहम स्तंभ है—जनता के साथ अटूट संबंध।
‘रैम प्रहार’ ने पुनः यह प्रमाणित कर दिया कि—
सेना अपनी शक्ति जनता से ही प्राप्त करती है और राष्ट्र की सुरक्षा ही उसका सर्वोच्च धर्म है।
यह अभ्यास राष्ट्र को संदेश देता है कि भारतीय सेना—
- फुर्तीली है
- लचीली है
- और भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार है
कुल मिलाकर ‘रैम प्रहार’ ने दर्शाया कि भारत की सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं और सेनानियों का संकल्प अडिग—
“हर काम—देश के नाम!”
प्रेषक
लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव
जनसंपर्क अधिकारी (रक्षा)
देहरादून, उत्तराखंड
मो.: +91 9799974163
ईमेल: prodefencedehradun@gmail.com



