शहीद की अंतिम विदाई पर विवाद,, वर्दी का अपमान या सत्ता का घमंड? विधायक खुशहाल अधिकारी की टिप्पणी पर उठा तूफान,, एडवोकेट अरुण भदौरिया ने भेजा कानूनी नोटिस, 5 दिन में शहीद के परिजनों से मांगे सार्वजनिक माफी

इन्तजार रजा हरिद्वार 🚨 शहीद की अंतिम विदाई पर विवाद,,
वर्दी का अपमान या सत्ता का घमंड? विधायक खुशहाल अधिकारी की टिप्पणी पर उठा तूफान,,
एडवोकेट अरुण भदौरिया ने भेजा कानूनी नोटिस, 5 दिन में शहीद के परिजनों से मांगे सार्वजनिक माफी

उत्तराखंड के चंपावत जनपद के लोहाघाट क्षेत्र में उस समय गहरा भावनात्मक माहौल शोक और सम्मान से आक्रोश में बदल गया, जब जम्मू–कश्मीर के पुंछ सेक्टर में सेवा के दौरान वीरगति प्राप्त अग्निवीर दीपक सिंह का पार्थिव शरीर 24 नवंबर 2025 को उनके पैतृक गांव पाटी पहुंचा। जहां पूरा क्षेत्र देश के इस वीर सपूत को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था, वहीं इसी दौरान एक विवादित घटना सामने आई जिसने पूरे जनपद में चर्चाओं और आलोचनाओं की लहर पैदा कर दी।
🔥 सब इंस्पेक्टर से अभद्र टिप्पणी, ग्रामीणों में नाराज़गी
मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, श्रद्धांजलि समारोह के दौरान विधायक खुशहाल अधिकारी ने ड्यूटी पर तैनात उत्तराखंड पुलिस के सब इंस्पेक्टर विपुल जोशी से कथित रूप से अभद्र शब्दों में कहा:
“तूने मुझे नमस्कार क्यों नहीं किया?
क्या तुम मुझे नहीं पहचानते?”
यह टिप्पणी उस समय की गई जब सभी लोग शहीद को अंतिम सलामी देने की प्रक्रिया में थे। माहौल की गंभीरता को देखते हुए वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने विधायक को समझाया कि ऐसी औपचारिकताएं इस क्षण उपयुक्त नहीं हैं, क्योंकि पूरा वातावरण केवल शहीद को सम्मान देने का था। लेकिन विधायक की इस टिप्पणी से वहां मौजूद ग्रामीणों में असहजता उत्पन्न हो गई और कई लोगों ने इसे वर्दी और शहीद सम्मान का अपमान बताया।
🎥 वीडियो वायरल होते ही बढ़ा विवाद
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि:
👉 क्या सत्ता में बैठे लोग प्रोटोकॉल और अहंकार को शहीदों के सम्मान से ऊपर समझने लगे हैं?
⚖️ एडवोकेट अरुण भदौरिया ने भेजा कानूनी नोटिस
घटना के बाद हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने विधायक खुशहाल अधिकारी को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में निम्न प्रमुख मांगें की गई हैं—
- विधायक 5 दिवस के अंदर शहीद दीपक सिंह के परिजनों व उत्तराखंड पुलिस से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें।
- यह स्पष्ट करें कि शहीद के पार्थिव शरीर के सामने वर्दीधारी अधिकारी से अभद्रता करने का अधिकार उन्हें किसने दिया।
- अन्यथा उनके विरुद्ध हरिद्वार में फौजदारी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
नोटिस की प्रति चंपावत के एसपी को भी प्रेषित कर दी गई है।
🇮🇳 शहीद सर्वोपरि — जनता का संदेश स्पष्ट
ग्रामीणों और आम लोगों का मानना है कि —
📌 शहीदों का सम्मान राजनीतिक पद, सत्ता, और प्रोटोकॉल से कहीं ऊपर है।
📌 वर्दी देश की शान है और उसे अपमानित करने का अधिकार किसी के पास नहीं।
🛑 अब प्रतीक्षा विधायक की प्रतिक्रिया की
अब पूरे जनपद और प्रदेश की निगाहें इस बात पर हैं कि:
- क्या विधायक खुशहाल अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे,
या - कानूनी प्रक्रिया और जनविरोध का सामना करेंगे?
🕯️ शहीद दीपक सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि।
राष्ट्र आपका सदैव ऋणी रहेगा। 🇮🇳



