राजाजी फिर दहला! 🐘 रेल पटरी पर कटकर शिशु हाथी की मौत,, 🚆 गुस्साए हाथियों ने रोक दी ट्रेन, घंटों बंद रहा रेल यातायात

इन्तजार रजा हरिद्वार 🚨 राजाजी फिर दहला!
🐘 रेल पटरी पर कटकर शिशु हाथी की मौत,,
🚆 गुस्साए हाथियों ने रोक दी ट्रेन, घंटों बंद रहा रेल यातायात

Daily Live Uttarakhand हरिद्वार | 1 दिसंबर 2025
राजाजी टाइगर रिजर्व एक बार फिर दर्दनाक हादसे का गवाह बना। सोमवार शाम मोतीचूर रेंज में रेलवे ट्रैक पार कर रहे हाथियों के झुंड में शामिल एक शिशु हाथी हावड़ा एक्सप्रेस की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद हाथियों का झुंड इतना आक्रोशित हो गया कि उन्होंने रेल ट्रैक पर ही डेरा डाल दिया और ट्रेन को आगे बढ़ने नहीं दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोतीचूर–रायवाला के बीच हाथियों का समूह रोज़ाना की तरह जंगल के दूसरे हिस्से में जा रहा था। तभी तेज रफ्तार से आती हावड़ा एक्सप्रेस वहां पहुंच गई। झुंड में शामिल बड़े हाथी किसी तरह पटरी पार कर गए, लेकिन लगभग 10–12 महीने के शिशु हाथी को खुद को बचाने का मौका नहीं मिल सका और वह ट्रेन की चपेट में आ गया। कुछ ही सेकंड में ट्रैक खून से लाल हो गया।
हादसे के बाद ज़मीन पर गिरी अपने बच्चे की लाश के पास हाथियों ने गुस्से में ट्रेन को घेर लिया। करीब एक घंटे तक ट्रेन ट्रैक पर खड़ी रही और कोई उसे आगे बढ़ा नहीं सका। इस दौरान हाथियों की बेचैनी और आवाज़ों ने माहौल और भयावह बना दिया था।
सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा व्यवस्था के तहत हावड़ा एक्सप्रेस को वहीं रोक दिया गया और वंदे भारत एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों को रायवाला स्टेशन पर रोकना पड़ा। यात्री परेशानी में फंसे रहे और रेल मार्ग पूरी तरह ठप हो गया।करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद वनकर्मियों ने फ्लेयर गन और गार्ड वाहन की मदद से हाथियों को ट्रैक से हटाया और उन्हें जंगल की ओर सुरक्षित मोड़ दिया। इसके बाद ट्रैक को क्लियर किया गया और रेलवे संचालन धीरे-धीरे फिर शुरू किया गया।
🛑 यह कोई पहली घटना नहीं!
राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाला यह रेल मार्ग पिछले कुछ वर्षों में कई हाथियों और वन्यजीवों की मौत की जगह बन चुका है। लगातार हादसों के बाद भी रेलवे और वन विभाग के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई देती है।
❓ कौन देगा जवाब?
- क्या रेलवे ट्रैक पर सेंसर आधारित अलर्ट सिस्टम क्यों नहीं लगाया गया?
- ट्रेन स्पीड कंट्रोल ज़ोन क्यों लागू नहीं?
- बार-बार घटनाओं के बावजूद नीतियों में बदलाव कब?
यह घटना सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर नाकामी है। सवाल यह है — कब तक विकास की दौड़ में प्रकृति और उसके जीव कुचले जाते रहेंगे?



