सिडकुल बहादराबाद हाईवे अवैध खनन भंडारों की बढ़ती तादाद ,अवैध खनन माफिया बेलगाम,, कई स्टोन क्रेशर बंद — लेकिन सिडकुल बहादराबाद हाइवे किनारे दर्जनों अवैध खनन भंडारों पर अवैध खनन व्यापार 24 घंटे चालू,, सिडकुल बहादराबाद हाईवे किनारे अवैध खनन भंडारों पर— माइनिंग की “चौथी आंख” भी हुई बंद?,, सिडकुल-बहादराबाद हाइवे बना अवैध खनन का नया अड्डा* नया व्यापार,, मिनी ट्रैक्टर ट्रॉली — अवैध खनन भंडारों के नया व्यापार मॉडल या प्रशासनिक लापरवाही?
इन्तजार रजा हरिद्वार- सिडकुल बहादराबाद हाईवे अवैध खनन भंडारों की बढ़ती तादाद ,अवैध खनन माफिया बेलगाम,,
कई स्टोन क्रेशर बंद — लेकिन सिडकुल बहादराबाद हाइवे किनारे दर्जनों अवैध खनन भंडारों पर अवैध खनन व्यापार 24 घंटे चालू,,
सिडकुल बहादराबाद हाईवे किनारे अवैध खनन भंडारों पर— माइनिंग की “चौथी आंख” भी हुई बंद?,, सिडकुल-बहादराबाद हाइवे बना अवैध खनन का नया अड्डा* नया व्यापार,,
मिनी ट्रैक्टर ट्रॉली — अवैध खनन भंडारों के नया व्यापार मॉडल या प्रशासनिक लापरवाही?

हद तो यह है कि कुछ माफियाओं ने तो हाईवे के किनारे ईंट, रेत और बजरी का सार्वजनिक अतिक्रमण कर सड़क को ही गोदाम में बदल दिया है। इन अतिक्रमणों के कारण कई बार राहगीर और वाहन दुर्घटनाओं का शिकार हुए, लेकिन सिस्टम की कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
स्टोन क्रेशर बंद — लेकिन सिडकुल बहादराबाद हाइवे किनारे दर्जनों अवैध खनन भंडारों पर अवैध खनन व्यापार 24 घंटे चालू
हरिद्वार में 50 से अधिक स्टोन क्रेशर बंद कर दिए जाने के बाद माना जा रहा था कि अवैध खनन की आपूर्ति कम हो जाएगी। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है।
जहां क्रेशर बंद हो गए, वहीं हाइवे किनारे अवैध भंडारण और खुलेआम बिकती खनन सामग्री नए स्वरूप में उभर आई है।
यहां न कोई पोर्टल रजिस्ट्रेशन की जरूरत, न ई-चालान का डर और न ही लाइसेंस की पूछ—सब कुछ खुलेआम और बेशर्मी के साथ।
इन जगहों पर मिनी ट्रैक्टर-ट्रॉली लगातार आवाजाही कर रही है और रेत-बजरी की अवैध आपूर्ति धड़ल्ले से जारी है। सवाल यह है कि जब खनन क्रेशर बंद हैं तो यह सामग्री आ कहां से रही है?
बीते दिनों प्रशासनिक कार्रवाई हुई—लेकिन ठोस नहीं, इसलिए बढ़ते गए अवैध भंडार
जिलाधिकारी हरिद्वार ने कई बार टीम गठित कर अभियान चलाया। जिला खान अधिकारी और क्षेत्रीय एसडीएम की मौजूदगी में कई अवैध भंडारण सीज भी हुए, कई वाहनों पर जुर्माना भी लगा।
लेकिन कार्रवाई एक दिन की और अवैध कारोबार 365 दिन का।जैसे ही कार्रवाई थमती है, अवैध खनन ठेकेदार दोबारा सक्रिय हो जाते हैं—और यह समस्या फिर वहीं खड़ी हो जाती है।
मिनी ट्रैक्टर ट्रॉली — अवैध खनन भंडारों के नया व्यापार मॉडल या प्रशासनिक लापरवाही?
हाइवे पर खनन सामग्री ढोने के लिए बड़े डंपर या ट्रक नहीं, बल्कि मिनी ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल हो रहा है। यही सबसे बड़ा loophole है।
ये छोटे वाहन न तो आसानी से पकड़े जाते हैं और शायद न ही इनका रजिस्ट्रेशन कमर्शियल कैटेगरी में आता है। यही वजह है कि कई कब्जाधारक और माफिया आज इन्हीं ट्रॉली के सहारे करोड़ों का “कैश-आधारित” अवैध कारोबार चला रहे हैं। क्या यही उद्देश्य था इन वाहनों को सड़क पर उतारने का?
या फिर इन्हें अब खनन माफियाओं की गुप्त डिलीवरी मशीन बना दिया गया है?
आखिर सवाल अब ये— हरिद्वार कई इलाकों सहित सिडकुल बहादराबाद हाईवे पर कब तक चलेगा ये मिनी ट्रैक्टर ट्राली से अवैध खनन भंडारों से खनन सामग्री परिवहन का नया खेल?
- क्या प्रशासन बड़े अभियान का इंतजार कर रहा है?
- क्या खनन माफिया राजनीतिज्ञों और अधिकारियों के संरक्षण में फल-फूल रहे हैं?
- क्या अब यह हाईवे कानून से ज्यादा खनन माफियाओं का शासन क्षेत्र बन चुका है?
जनता की मांग — अब सिडकुल बहादराबाद हाईवे पर अवैध खनन भंडारों पर सिर्फ बयान नहीं, टारगेटेड कार्रवाई होनी चाहिए
✔ सभी अवैध भंडारण सील हों
✔ मिनी ट्रैक्टर-ट्रॉली की खनन में उपयोग पर तत्काल रोक लगे
✔ लाइसेंस और ई-चालान व्यवस्था लागू की जाए
✔ जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए
क्योंकि अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जनता पूछ रही है—
“जब खनन पर रोक है, तो फिर यह अवैध खनन भंडारों पर कहा से आ रही खनन सामग्री और बिक कैसे रही है खनन सामग्री?”
और इस सवाल का जवाब सरकार और प्रशासन दोनों को देना होगा।
🔥 अब वक्त है—फाइलों की कार्रवाई नहीं, ज़मीन पर कार्रवाई की। क्योंकि कानून से बड़ा अगर कोई बन रहा है, तो वह कानून नहीं—प्रशासनिक कमजोरियां हैं।



