बहादराबाद पीठ बाजार पर कार्रवाई से उबाल,, गरीब दुकानदारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट,, अनिश्चितकालीन धरना जारी, प्रशासन पर दमन के आरोप,, वसूली हुई, लेकिन जवाबदेही गायब,, नोटिस नहीं, विकल्प नहीं, सिर्फ कार्रवाई,,धरने के दौरान प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी
इन्तजार रजा हरिद्वार- बहादराबाद पीठ बाजार पर कार्रवाई से उबाल,,
गरीब दुकानदारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट,,
अनिश्चितकालीन धरना जारी, प्रशासन पर दमन के आरोप,, वसूली हुई, लेकिन जवाबदेही गायब,, नोटिस नहीं, विकल्प नहीं, सिर्फ कार्रवाई,,धरने के दौरान प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी
हरिद्वार।बहादराबाद क्षेत्र के पीठ बाजार को लेकर चल रहा विवाद अब और तेज़ हो गया है। सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद जहां एक ओर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दर्जनों गरीब दुकानदार सड़क पर आ गए हैं। वर्षों से सब्जी, फल और दैनिक जरूरतों का व्यापार कर अपने परिवार का पेट पाल रहे लोग आज खुद को अपराधी की तरह ट्रीट किए जाने से आहत हैं।
पीठ बाजार बंद होने से 50 से अधिक परिवार बेरोज़गार हो चुके हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों के घरों में चूल्हा ठंडा पड़ गया है और बच्चों की पढ़ाई व भोजन दोनों संकट में हैं। इसी के विरोध में भादराबाद में धरना-प्रदर्शन जारी है, जो अब अनिश्चितकालीन आंदोलन का रूप ले चुका है।
“भूमाफियाओं पर कार्रवाई नहीं, गरीबों पर लाठी” – प्रदर्शनकारियों का आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई चयनात्मक है। जहां बड़े भूमाफियाओं ने सरकारी जमीनों पर अवैध कॉलोनियां काट रखी हैं, वहां कोई सख्ती नहीं होती, लेकिन गरीब दुकानदारों पर बिना नोटिस कार्रवाई कर दी जाती है।
पीठ बाजार के दुकानदारों का कहना है कि न तो उन्हें पहले कभी अवैध बताया गया और न ही हटाने से पहले कोई लिखित सूचना दी गई। अचानक बुलडोजर चलाकर बाजार उजाड़ दिया गया, जिससे हजारों रुपये की सब्ज़ी और सामान बर्बाद हो गया।
अमित सिंघानिया (प्रदर्शनकारी)
“यह लड़ाई सिर्फ पीठ बाजार की नहीं है, यह गरीबों के सम्मान और रोज़गार की लड़ाई है। सवाल यह है कि जब वर्षों से यहां बाजार लग रहा था, तब यह अवैध नहीं था क्या? आज अचानक गरीबों को बेरोज़गार बना दिया गया। बड़े-बड़े भूमाफिया खुलेआम सरकारी जमीन हड़प रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं। प्रशासन गरीबों को डराकर गुलामी की ओर धकेल रहा है, जिसे हम किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।”
अमित सिंघानिया ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक प्रशासन पीठ बाजार के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता और दुकानदारों को रोजगार की गारंटी नहीं देता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
वसूली हुई, लेकिन जवाबदेही गायब
दुकानदारों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि उनसे नियमित रूप से 50, 60 और 70 रुपये तक की वसूली की जाती रही है। कहा जा रहा है कि पीठ का ठेका जिला पंचायत से छोड़ा गया था, लेकिन आज न तो कोई ठेकेदार सामने आ रहा है और न ही कोई अधिकारी जवाब दे रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पीठ अवैध थी, तो वसूली किस आधार पर की गई?
और अगर वैध थी, तो आज अचानक इसे बंद क्यों कर दिया गया?
प्रदर्शनकारी दुकानदार (पीठ बाजार, बहादराबाद)
“हम लोग रोज़ पैसे देते थे। कभी किसी ने नहीं कहा कि यह बाजार अवैध है। अचानक बुलडोजर चला दिया गया। हमारी सब्ज़ी खराब हो गई, नुकसान हुआ। अब कह रहे हैं यहां बैठोगे तो चालान होगा। हम क्या चोरी करें? हमारे बच्चे भूखे हैं। सरकार बताए कि हम रोज़ी-रोटी कहां से कमाएं?”
दुकानदार की आंखों में आंसू और आवाज़ में गुस्सा साफ झलक रहा था।
नोटिस नहीं, विकल्प नहीं, सिर्फ कार्रवाई
आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने न तो नोटिस दिया, न पुनर्वास की बात की और न ही कोई वैकल्पिक जगह चिन्हित की। बाजार बंद कर देने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि अपराध और मजबूरी को जन्म मिलता है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड में ऐसा लग रहा है जैसे गरीबों के लिए कोई नीति ही नहीं है। चुनाव के समय यही लोग वोट बैंक बन जाते हैं, लेकिन संकट में कोई जनप्रतिनिधि दिखाई नहीं देता।
नारों से गूंजा धरना स्थल
धरने के दौरान प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई—
बेरोज़गारों को रोजगार दो
गरीबों का शोषण बंद करो
सरकार की तानाशाही नहीं चलेगी
उत्तराखंड सरकार मुर्दाबाद
इन नारों के बीच एक ही मांग गूंजती रही— रोज़गार वापस दो।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं—
पीठ बाजार के लिए स्थायी और वैध स्थान चिन्हित किया जाए
बाजार को रजिस्टर्ड किया जाए
जिन दुकानदारों को नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवजा दिया जाए
वसूली और ठेका व्यवस्था की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो

अब सवाल प्रशासन से
बहादराबाद का यह आंदोलन अब प्रशासन के लिए एक परीक्षा बन चुका है। सवाल यह नहीं है कि अतिक्रमण हटाया जाए या नहीं, सवाल यह है कि गरीबों को उजाड़कर विकास किसका हो रहा है?
अगर समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है — जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।



