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सनातन के नए चेहरे — ‘धर्म रक्षक धामी,, धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभाव को समर्पित एक वैचारिक दस्तावेज,, ऋषिकुल सभागार हरिद्वार में भव्य समारोह के बीच हुआ पुस्तक विमोचन

इन्तजार रजा हरिद्वार- सनातन के नए चेहरे — ‘धर्म रक्षक धामी,,

धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभाव को समर्पित एक वैचारिक दस्तावेज,,

ऋषिकुल सभागार हरिद्वार में भव्य समारोह के बीच हुआ पुस्तक विमोचन

हरिद्वार।
आज ऋषिकुल सभागार, हरिद्वार में सनातन संस्कृति, राष्ट्रभाव और धार्मिक चेतना को समर्पित पुस्तक ‘धर्म रक्षक धामी’ का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। यह पुस्तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व, वैचारिक प्रतिबद्धता और सनातन मूल्यों के संरक्षण के संकल्प को केंद्र में रखकर लिखी गई है। कार्यक्रम में संत समाज, बुद्धिजीवियों, जनप्रतिनिधियों, भाजपा पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ‘धर्म रक्षक धामी’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि उस वैचारिक संघर्ष और सांस्कृतिक चेतना का दस्तावेज है, जो आज के समय में सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए आवश्यक है। पुस्तक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने सत्ता को सेवा और धर्म को कर्तव्य के रूप में स्वीकार किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने धर्म, संस्कृति और विकास के बीच संतुलन की नई परिभाषा गढ़ी है। चाहे समान नागरिक संहिता (UCC) का ऐतिहासिक निर्णय हो, लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर कठोर रुख, या फिर चारधाम, कांवड़ यात्रा और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा — हर मोर्चे पर धामी सरकार ने सनातन मूल्यों की स्पष्ट रक्षा की है। यही कारण है कि आज उन्हें “धर्म रक्षक” के रूप में देखा जा रहा है।

पुस्तक विमोचन के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है, जो सत्य, करुणा, राष्ट्रभक्ति और मानवता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और इसकी सांस्कृतिक व धार्मिक विरासत की रक्षा करना सरकार का दायित्व ही नहीं, बल्कि संकल्प है।

कार्यक्रम में भाजपा उत्तराखंड के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि ‘धर्म रक्षक धामी’ पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को यह समझाने का कार्य करेगी कि राजनीति और धर्म का संबंध सत्ता के लिए नहीं, बल्कि समाज की दिशा तय करने के लिए होता है। पुस्तक युवाओं को राष्ट्रवादी विचारधारा, सांस्कृतिक गौरव और कर्तव्यबोध से जोड़ने का कार्य करेगी।

ऋषिकुल सभागार में आयोजित यह समारोह पूरी तरह सनातन भाव, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत रहा। मंच से उठे जयघोष, संतों के आशीर्वचन और उपस्थित जनसमूह का उत्साह यह दर्शा रहा था कि ‘धर्म रक्षक धामी’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि आज के उत्तराखंड और देश की भावना बन चुका है।

कुल मिलाकर, यह पुस्तक विमोचन समारोह न केवल एक साहित्यिक आयोजन रहा, बल्कि सनातन संस्कृति और राष्ट्रभाव के प्रति प्रतिबद्धता का सार्वजनिक उद्घोष भी साबित हुआ।

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