अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सियासत तेज,, बीजेपी का कांग्रेस पर पलटवार, ‘राजनीति कर दिवंगत आत्मा का अपमान,, सबूत हों तो जांच एजेंसियों को दें, सोशल मीडिया ट्रायल बंद करे कांग्रेस

इन्तजार रजा हरिद्वार- अंकिता भंडारी हत्याकांड पर सियासत तेज,,
बीजेपी का कांग्रेस पर पलटवार, ‘राजनीति कर दिवंगत आत्मा का अपमान,,
सबूत हों तो जांच एजेंसियों को दें, सोशल मीडिया ट्रायल बंद करे कांग्रेस

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राज्य में बढ़ते जनाक्रोश, प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर उफान के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस इस संवेदनशील मामले को न्याय के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है और दिवंगत अंकिता की आत्मा को अपमानित कर रही है। पार्टी ने दो टूक कहा है कि यदि कांग्रेस के पास कोई ठोस और नया सबूत है, तो उसे जांच एजेंसियों के सामने पेश करे, न कि आरोपों और अफवाहों के जरिए समाज में भ्रम फैलाए।
बीजेपी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम समेत कुछ नेताओं पर अंकिता को शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और दोनों दल आमने-सामने आ गए हैं।
बीजेपी का आरोप: कांग्रेस कर रही है मृतका की आत्मा से राजनीति
बीजेपी प्रवक्ताओं ने प्रेस वार्ता में कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड अत्यंत दुखद और संवेदनशील मामला है, जिस पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बिना किसी ठोस प्रमाण के बयानबाजी कर रही है, जिससे न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, बल्कि पीड़ित परिवार के जख्म भी हरे हो रहे हैं।
बीजेपी का कहना है कि राज्य सरकार ने इस मामले में शुरू से ही सख्त रुख अपनाया है और मुख्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। मामले की जांच एसआईटी द्वारा की गई, चार्जशीट दाखिल हुई और न्यायिक प्रक्रिया अपने तय रास्ते पर आगे बढ़ रही है। इसके बावजूद कांग्रेस पुराने मामलों को बार-बार उछालकर जनता की भावनाओं से खेलने का काम कर रही है।
पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस के पास कोई नया सबूत है, तो वह उसे सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर उछालने के बजाय जांच एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपती? बीजेपी नेताओं ने इसे “सोशल मीडिया ट्रायल” करार देते हुए कहा कि इससे केवल भ्रम और अस्थिरता फैलती है।
कांग्रेस के आरोपों से बढ़ा विवाद, सड़कों से सोशल मीडिया तक हलचल
कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद राज्य के कई हिस्सों में फिर से विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सोशल मीडिया पर भी अंकिता भंडारी हत्याकांड ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग वीआईपी एंगल की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है और सच्चाई सामने नहीं आई है।
वहीं, अंकिता के परिवार और समर्थकों का भी कहना है कि उन्हें अब तक पूरी तरह संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। परिवार लगातार यह मांग करता रहा है कि मामले में यदि किसी भी स्तर पर वीआईपी की संलिप्तता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यही वजह है कि जनाक्रोश समय-समय पर फिर से उभर आता है।
उर्मिला राठौर के आरोपों ने डाली राजनीति में नई चिंगारी
इस पूरे विवाद को और हवा तब मिली, जब पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला राठौर ने पार्टी के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस ने इन आरोपों को अपने बयानों में प्रमुखता से उठाया और बीजेपी को घेरने की कोशिश की। हालांकि, बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कांग्रेस की “राजनीतिक साजिश” बताया है।
बीजेपी का कहना है कि उर्मिला राठौर के आरोप व्यक्तिगत और असंबंधित हैं, जिन्हें जानबूझकर अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़कर भ्रम फैलाया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी नाकामी और सबूतों की कमी को छिपाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है।
सीबीआई जांच की मांग पर सरकार का रुख, विपक्ष हमलावर
इस बीच, राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की मांग पर “विचार” करने की बात कही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कांग्रेस लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रही है और सरकार पर दबाव बना रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और राजनीतिक दबाव में निर्णय लेना उचित नहीं होगा।
बीजेपी नेताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल और केवल न्याय दिलाना है, न कि राजनीतिक शोर के आगे झुकना। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
न्याय बनाम राजनीति की लड़ाई में उलझा मामला
अंकिता भंडारी हत्याकांड अब एक बार फिर न्याय और राजनीति की जंग में उलझता नजर आ रहा है। जहां एक ओर जनता और पीड़ित परिवार को न्याय का इंतजार है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में जुटे हैं। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस को बयानबाजी बंद कर जांच प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए, जबकि कांग्रेस इसे “सच्चाई की लड़ाई” बता रही है।
फिलहाल, राज्य की निगाहें सरकार के अगले कदम और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या यह मामला राजनीति से ऊपर उठकर अपने अंजाम तक पहुंचेगा, या फिर आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच सच्चाई एक बार फिर पीछे छूट जाएगी।



