2026 के लिए उत्तराखण्ड पुलिस का रोडमैप तय, डीजीपी दीपम सेठ की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक,, ◼️ आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और ड्रग्स-फ्री देवभूमि मिशन पर रहेगा सख्त फोकस,, ◼️ पुलिस कल्याण, पदोन्नति, प्रशिक्षण और ई-ऑफिस से समयबद्ध निर्णय प्रणाली को मिलेगी रफ्तार

इन्तजार रजा हरिद्वार ◼️ 2026 के लिए उत्तराखण्ड पुलिस का रोडमैप तय, डीजीपी दीपम सेठ की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक,,
◼️ आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और ड्रग्स-फ्री देवभूमि मिशन पर रहेगा सख्त फोकस,,
◼️ पुलिस कल्याण, पदोन्नति, प्रशिक्षण और ई-ऑफिस से समयबद्ध निर्णय प्रणाली को मिलेगी रफ्तार

देहरादून।
उत्तराखण्ड पुलिस ने वर्ष 2026 के लिए अपनी कार्ययोजना और प्राथमिकताओं को अंतिम रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड श्री दीपम सेठ की अध्यक्षता में सरदार पटेल भवन स्थित पुलिस मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें पुलिस मुख्यालय की सभी प्रमुख शाखाओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का स्पष्ट संदेश रहा— अब पुलिसिंग में देरी नहीं, बल्कि दक्षता, पारदर्शिता और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली ही प्राथमिकता होगी।
बैठक के दौरान डीजीपी ने आगामी वर्ष के लिए उत्तराखण्ड पुलिस के विज़न को स्पष्ट करते हुए कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच पुलिस को तकनीकी रूप से सक्षम, प्रशासनिक रूप से चुस्त और जनविश्वास के प्रति जवाबदेह बनाना अनिवार्य है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आंतरिक सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, नशा मुक्त देवभूमि अभियान और पुलिस कार्मिकों के कल्याण से जुड़े कई अहम निर्देश जारी किए गए।
आंतरिक सुरक्षा और साइबर इंटेलिजेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता
डीजीपी दीपम सेठ ने एंटी टेरर कॉन्फ्रेंस-2025 में माननीय केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए राज्य की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में साइबर अपराध, डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन कट्टरपंथ जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में साइबर सर्विलांस और साइबर इंटेलिजेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
इस दिशा में साइबर यूनिट्स की क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग को सशक्त करने के निर्देश दिए गए।

ATS, ANTF और ट्रैफिक निदेशालय का होगा पुनर्गठन
बैठक में ATS (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड), ANTF (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) और ट्रैफिक निदेशालय के पुनर्गठन पर विशेष चर्चा हुई। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि एंटी टेरर कॉन्फ्रेंस में ATS की संरचना में एकरूपता को लेकर जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं, उनके अनुरूप उत्तराखण्ड में भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
वहीं माननीय मुख्यमंत्री के “ड्रग्स-फ्री उत्तराखण्ड” विज़न को साकार करने के लिए ANTF को वर्ष 2026 में और अधिक सुदृढ़, संसाधनयुक्त और प्रभावी बनाया जाएगा। नशे के नेटवर्क पर करारा प्रहार पुलिस की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
1930 हेल्पलाइन और 112 सिस्टम का होगा तकनीकी एकीकरण
साइबर अपराध पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के लिए 1930 साइबर हेल्पलाइन को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया। डीजीपी ने निर्देश दिए कि 1930 हेल्पलाइन का 112 इमरजेंसी सिस्टम से तकनीकी रूप से बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि शिकायत दर्ज होने से लेकर कार्रवाई तक की प्रक्रिया तेज और निर्बाध हो सके।
समयबद्ध निर्णय, ई-ऑफिस और लंबित फाइलों पर सख्ती
पुलिस मुख्यालय स्तर पर कार्य संस्कृति में बदलाव के स्पष्ट संकेत देते हुए डीजीपी ने कहा कि फाइलों में अनावश्यक देरी अब स्वीकार्य नहीं होगी।
माननीय मुख्यमंत्री के विज़न “सरलीकरण, समाधान और निस्तारण” का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी अनुभागों को निर्देश दिए कि ई-ऑफिस / ई-फाइल प्रणाली के माध्यम से ही फाइल मूवमेंट किया जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया समयबद्ध होगी।
इसके साथ ही विगत वर्षों की लंबित पत्रावलियों और शासन स्तर पर अटके प्रस्तावों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
पुलिस कल्याण, पदोन्नति और प्रशिक्षण पर विशेष फोकस
डीजीपी ने स्पष्ट कहा कि मजबूत पुलिसिंग की नींव प्रेरित और संतुष्ट पुलिस बल है। सभी इकाइयों को समय पर ACR भरने के निर्देश दिए गए, ताकि पुलिस कर्मियों को पदोन्नति, पदक, प्रशस्ति पत्र और अन्य प्रोत्साहन समय पर मिल सकें।
इसके साथ ही पीटीसी नरेंद्रनगर में प्रस्तावित Centre of Excellence को लेकर शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी करने के निर्देश दिए गए, जिससे पुलिस प्रशिक्षण को आधुनिक और विशेषीकृत बनाया जा सके।
उत्तराखण्ड पुलिस गीत से बढ़ेगा मनोबल
बैठक के अंत में डीजीपी दीपम सेठ ने उत्तराखण्ड पुलिस गीत के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह गीत राज्य की सांस्कृतिक पहचान, पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना का प्रतीक है।
अब यह गीत सभी प्रमुख पुलिस आयोजनों, परेडों, दीक्षांत समारोहों, स्थापना दिवस, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आधिकारिक कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से बजाया जाएगा, ताकि पुलिस बल का मनोबल और राज्य भावना और अधिक सुदृढ़ हो।
कुल मिलाकर, यह समीक्षा बैठक उत्तराखण्ड पुलिस के लिए वर्ष 2026 की स्पष्ट दिशा तय करती है— जहां तकनीक, अनुशासन, त्वरित निर्णय और जनसुरक्षा ही पुलिसिंग की पहचान होगी।



