हरिद्वार में रिश्वतखोरी पर करारा वार,, 🔴 जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य और सहायक गौरव शर्मा ₹50 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार,, 🔴 मुख्यमंत्री धामी के जीरो टॉलरेंस अभियान से हिला भ्रष्ट तंत्र

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 हरिद्वार में रिश्वतखोरी पर करारा वार,,
🔴 जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य और सहायक गौरव शर्मा ₹50 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार,,
🔴 मुख्यमंत्री धामी के जीरो टॉलरेंस अभियान से हिला भ्रष्ट तंत्र
हरिद्वार।
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत विजिलेंस ने हरिद्वार में एक बड़ी और सनसनीखेज़ कार्रवाई को अंजाम दिया है। देहरादून से पहुंची विजिलेंस टीम ने जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य और उनके सहायक गौरव शर्मा को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई जिला पूर्ति कार्यालय परिसर में ही की गई, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया।
इस कार्रवाई ने न केवल खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि सरकार के दावों के अनुरूप अब भ्रष्टाचारियों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है।
🟥 कार्यालय के भीतर ही बिछा जाल, रिश्वत लेते ही दबोचे गए अधिकारी
जानकारी के मुताबिक, जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य ने एक राशन डीलर से उसके कार्य से संबंधित फाइल आगे बढ़ाने और अनुकूल निर्णय के बदले रिश्वत की मांग की थी। परेशान डीलर ने हिम्मत दिखाते हुए सीधे विजिलेंस विभाग से संपर्क किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस ने पूरी रणनीति के तहत जाल बिछाया। जैसे ही तय रकम ₹50,000 जिला पूर्ति कार्यालय में सौंपी गई, पहले से तैनात विजिलेंस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए श्याम आर्य और उनके सहायक गौरव शर्मा को मौके पर ही धर दबोचा। रिश्वत की पूरी रकम भी मौके से बरामद कर ली गई।
कार्रवाई इतनी अचानक और सटीक थी कि कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही विजिलेंस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, लक्सर क्षेत्र के एक राशन डीलर ने विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी कि जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य उसके काम के बदले मोटी रकम की मांग कर रहे हैं। राशन डीलर का आरोप था कि अधिकारी उसे लगातार परेशान कर रहे थे और काम निपटाने की एवज में ₹50,000 की रिश्वत मांग रहे थे।
ट्रैप लगाकर की गई गिरफ्तारी
शिकायत की पुष्टि होने के बाद, उत्तराखंड विजिलेंस की टीम ने एक जाल बिछाया। जैसे ही राशन डीलर ने तय स्थान पर श्याम आर्य को रिश्वत की राशि दी, पहले से घात लगाकर बैठी विजिलेंस टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। मौके पर मौजूद उनके सहायक गौरव कुमार को भी भ्रष्टाचार में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
🟥 पूछताछ में खुल सकते हैं बड़े राज, नेटवर्क की जांच शुरू
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह रिश्वतखोरी का एक एकल मामला है या फिर इसके पीछे कोई संगठित भ्रष्ट नेटवर्क काम कर रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि जिला पूर्ति कार्यालय में लंबे समय से अवैध वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन अब जाकर ठोस कार्रवाई हुई है। विजिलेंस इस बात की भी जांच कर रही है कि पूर्व में कितने राशन डीलरों से इसी तरह धन की मांग की गई और किन-किन मामलों में नियमों की अनदेखी कर लाभ पहुंचाया गया।
🟥 मुख्यमंत्री धामी का सख्त संदेश: भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों का परिणाम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बार-बार यह दोहरा चुके हैं कि राज्य में भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और दोषी चाहे किसी भी पद पर हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
हरिद्वार में हुई यह कार्रवाई उसी नीति की ज़मीन पर उतरी तस्वीर है। विजिलेंस की सक्रियता से यह संदेश साफ है कि अब शिकायत करने वालों की पहचान सुरक्षित रखते हुए त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
🟥 विभाग में मचा हड़कंप, आम जनता में उम्मीद
जिला पूर्ति कार्यालय में हुई इस गिरफ्तारी के बाद पूरे विभाग में अफरा-तफरी का माहौल है। कर्मचारी सहमे हुए हैं और कई फाइलों की आंतरिक जांच शुरू होने की चर्चा है। वहीं, आम जनता और राशन डीलरों के बीच यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है।
लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह हर विभाग में निष्पक्ष कार्रवाई होती रही, तो सरकारी कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार पर वास्तव में लगाम लग सकती है।
🟥 साफ संदेश: रिश्वत मांगी तो सलाखों के पीछे
हरिद्वार में विजिलेंस की इस बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अब शिकायत दबाने का नहीं, बल्कि कार्रवाई का दौर है। जिला पूर्ति अधिकारी जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का रंगे हाथ पकड़ा जाना प्रशासनिक तंत्र के लिए चेतावनी है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई अभी लंबी है, लेकिन हरिद्वार से उठा यह कदम साफ संकेत देता है—
अब रिश्वत मांगना मतलब सीधे जेल का रास्ता।




