ऋषिकेश में संस्कृति और राष्ट्रचेतना का संगम,, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया ‘कल्याण’ पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन,, गीता प्रेस की 100 वर्षों की साधना को बताया भारतीय मूल्यों का अमूल्य धरोहर

इन्तजार रजा हरिद्वार- ऋषिकेश में संस्कृति और राष्ट्रचेतना का संगम,,
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया ‘कल्याण’ पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन,,
गीता प्रेस की 100 वर्षों की साधना को बताया भारतीय मूल्यों का अमूल्य धरोहर
ऋषिकेश।
धार्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक चेतना की त्रिवेणी के रूप में पहचाने जाने वाले ऋषिकेश में आज एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण देखने को मिला, जब केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी विशेषांक का विधिवत विमोचन किया। इस गरिमामय समारोह में संत-महात्माओं, धर्माचार्यों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण, वैदिक मंत्रोच्चार और भारतीय संस्कृति की झलक साफ देखने को मिली। मंच पर गीता प्रेस से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी, संत समाज के प्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों से आए अतिथि मौजूद रहे।
अमित शाह बोले—‘कल्याण’ केवल पत्रिका नहीं, राष्ट्र निर्माण का वैचारिक आंदोलन
शताब्दी अंक का विमोचन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘कल्याण’ पत्रिका बीते 100 वर्षों से भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और नैतिक चेतना की रक्षा का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जब देश विदेशी शासन, सामाजिक विघटन और सांस्कृतिक भ्रम के दौर से गुजर रहा था, तब ‘कल्याण’ ने भारतीय समाज को आत्मबोध और आत्मगौरव से जोड़े रखा।
अमित शाह ने कहा—
“गीता प्रेस और ‘कल्याण’ ने बिना किसी व्यावसायिक लाभ के, केवल सेवा और साधना के भाव से समाज को दिशा देने का काम किया है। यह पत्रिका पीढ़ियों के संस्कार निर्माण में मील का पत्थर रही है।”
उन्होंने इसे भारत की आत्मा को जीवित रखने वाला प्रकाश स्तंभ बताते हुए कहा कि आज भी इसके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सौ वर्ष पहले थे।
गीता प्रेस की 100 वर्षों की यात्रा को किया नमन
अपने संबोधन में अमित शाह ने गीता प्रेस की स्थापना, उसके संस्थापकों और आज तक की यात्रा को नमन किया। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस ने सस्ती, शुद्ध और प्रमाणिक धार्मिक साहित्य उपलब्ध कराकर करोड़ों भारतीयों को धर्म, कर्म और कर्तव्य से जोड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल युग में भी ‘कल्याण’ जैसी पत्रिकाओं की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है, क्योंकि यह समाज को भटकाव से बचाकर मूल्यों की ओर लौटने का मार्ग दिखाती हैं।
संत समाज और वक्ताओं ने की गीता प्रेस की भूमिका की सराहना
कार्यक्रम में मौजूद संत-महात्माओं और वक्ताओं ने गीता प्रेस के योगदान को अद्वितीय बताया। उन्होंने कहा कि ‘कल्याण’ ने केवल धार्मिक विषयों तक सीमित न रहते हुए सामाजिक सुधार, राष्ट्रीय एकता और चरित्र निर्माण पर भी निरंतर लेखन किया।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आज जब समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब ‘कल्याण’ का शताब्दी अंक नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
शताब्दी अंक में समाहित हैं 100 वर्षों की वैचारिक धरोहर
‘कल्याण’ का यह विशेषांक भारतीय दर्शन, सनातन संस्कृति, स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े दुर्लभ लेखों और विचारों का संग्रह है। इसमें देश-विदेश के विद्वानों, संतों और विचारकों के लेख शामिल किए गए हैं, जो इसे ऐतिहासिक दस्तावेज का स्वरूप प्रदान करते हैं।
ऋषिकेश से देश को सांस्कृतिक संदेश
इस आयोजन के माध्यम से ऋषिकेश से पूरे देश को यह संदेश गया कि भारत की सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है और उसे सहेजने वाले संस्थान आज भी पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। अमित शाह की उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाई।
कार्यक्रम का समापन वैदिक शांति पाठ के साथ हुआ, वहीं उपस्थित जनसमूह में उत्साह, गर्व और सांस्कृतिक चेतना की स्पष्ट झलक देखने को मिली।
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