संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया तो रुकी सैलरी,, यूपी में 68 हजार से ज्यादा कर्मचारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन सैलरी पर लगा ब्रेक,, मानव संपदा पोर्टल पर जानकारी अपलोड न करने वालों को साफ संदेश – पहले पारदर्शिता, फिर वेतन

इन्तजार रजा हरिद्वार- संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया तो रुकी सैलरी,,
यूपी में 68 हजार से ज्यादा कर्मचारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन सैलरी पर लगा ब्रेक,,
मानव संपदा पोर्टल पर जानकारी अपलोड न करने वालों को साफ संदेश – पहले पारदर्शिता, फिर वेतन

उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति को और अधिक सख्ती से लागू करते हुए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सेवा में पारदर्शिता कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। इसी नीति के तहत मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अपलोड न करने वाले 68,236 राज्य कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है।
सरकार के इस फैसले से प्रदेशभर के विभागों में हड़कंप मच गया है। शासन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक कर्मचारी अपनी संपत्ति का पूरा और सही विवरण ऑनलाइन दर्ज नहीं करेंगे, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई न केवल एक प्रशासनिक कदम है, बल्कि भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार भी मानी जा रही है।
मानव संपदा पोर्टल बना पारदर्शिता का हथियार
उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से अपनी चल-अचल संपत्ति का वार्षिक विवरण देना अनिवार्य किया हुआ है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सेवा में रहते हुए किसी भी कर्मचारी की आय और संपत्ति में असामान्य वृद्धि पर नजर रखी जा सके।
हालांकि, बार-बार निर्देश और समयसीमा बढ़ाने के बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने अब तक संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया। शासन स्तर पर कई बार चेतावनी दी गई, परंतु इसके बावजूद लापरवाही बरती गई। अंततः सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए वेतन रोकने का फैसला किया।
68,236 कर्मचारियों की सैलरी पर लगा ब्रेक
शासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जिन कर्मचारियों की सैलरी रोकी गई है, उनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, राजस्व, विकास, नगर निकाय सहित कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। यह संख्या बताती है कि आदेशों को हल्के में लेना कर्मचारियों को कितना महंगा पड़ सकता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की प्रशासनिक प्रक्रिया है। जैसे ही कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करेंगे, उनकी सैलरी स्वतः बहाल कर दी जाएगी।
भ्रष्टाचार पर सरकार की सख्ती, साफ संदेश
योगी आदित्यनाथ सरकार पहले ही भ्रष्टाचार को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। चाहे वह भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई हो, विजिलेंस जांच हो या संपत्ति की जांच, सरकार लगातार कड़े फैसले ले रही है।
संपत्ति विवरण न देने पर सैलरी रोकने का फैसला यह साफ संदेश देता है कि अब सरकारी नौकरी सिर्फ अधिकार नहीं, जवाबदेही भी है। सरकार मानती है कि संपत्ति का विवरण सार्वजनिक और पारदर्शी होने से न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि ईमानदार कर्मचारियों की छवि भी मजबूत होगी।
कर्मचारियों में बढ़ी बेचैनी, पोर्टल पर बढ़ी गतिविधि
सरकार के इस एक्शन के बाद मानव संपदा पोर्टल पर अचानक गतिविधि तेज हो गई है। बड़ी संख्या में कर्मचारी अब जल्द से जल्द अपनी संपत्ति का विवरण अपलोड करने में जुट गए हैं। कई विभागों में अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
वहीं, कुछ कर्मचारी संगठनों ने इसे कठोर कदम बताया है, लेकिन सरकार का कहना है कि नियम सभी के लिए समान हैं और पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जा सकता।
भविष्य में और सख्ती के संकेत
शासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में संपत्ति विवरण की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी द्वारा गलत या अधूरी जानकारी देने की बात सामने आती है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अनुशासनात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।
सरकार का मानना है कि यह कदम राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को स्वच्छ, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल है।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला साफ दर्शाता है कि अब नियमों की अनदेखी करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। पहले पारदर्शिता, फिर सुविधाएं—यही संदेश सरकार ने 68 हजार से अधिक कर्मचारियों को दिया है, और यह संदेश पूरे सिस्टम के लिए एक कड़ा अलर्ट भी है।



