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#बजट2026 में अल्पसंख्यक कल्याण को मजबूती,, मोदी सरकार ने मुस्लिम समाज के विकास पर फिर दिखाया भरोसा,, शिक्षा, बुनियादी सुविधाएं और सशक्तिकरण योजनाओं को मिला बढ़ावा

इन्तजार रजा हरिद्वार-#बजट2026 में अल्पसंख्यक कल्याण को मजबूती,,

मोदी सरकार ने मुस्लिम समाज के विकास पर फिर दिखाया भरोसा,,

शिक्षा, बुनियादी सुविधाएं और सशक्तिकरण योजनाओं को मिला बढ़ावा

नई दिल्ली।
केंद्रीय बजट 2026–27 में मोदी सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सबका साथ, सबका विकास सिर्फ नारा नहीं बल्कि नीति है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए 3400 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो बीते वित्त वर्ष 2025 के मुकाबले अधिक है। खास बात यह है कि मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सरकार ने अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में कोई कटौती नहीं की, बल्कि विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने का मजबूत संकेत दिया है।

यह बजट विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय सहित सभी अल्पसंख्यक वर्गों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सरकार का फोकस साफ है—विकास योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना और लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना।

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम को मिली नई ऊर्जा

बजट का बड़ा हिस्सा प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के लिए निर्धारित किया गया है। इस योजना के तहत देश के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूलों, छात्रावासों, आईटीआई, स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक भवनों और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाता है। बजट 2026–27 में इस कार्यक्रम को प्राथमिकता देना इस बात का संकेत है कि सरकार शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं को अल्पसंख्यक समाज के विकास की रीढ़ मानती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पीएमजेवीके के माध्यम से ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में रहने वाले मुस्लिम युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने में मदद मिल रही है। इससे न सिर्फ सामाजिक असमानता कम हो रही है, बल्कि मुख्यधारा में भागीदारी भी बढ़ रही है।

महिलाओं और युवाओं पर विशेष फोकस

इस बजट में अल्पसंख्यक महिलाओं और युवाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर भी खास ध्यान दिया गया है। शिक्षा से लेकर कौशल विकास और स्वरोजगार तक, सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में इन योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से छात्रवृत्ति योजनाएं, कौशल प्रशिक्षण और उद्यमिता से जुड़ी पहलों को जारी रखने की प्रतिबद्धता दिखाई गई है। इससे मुस्लिम समाज की बेटियां शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से जुड़ सकेंगी।

बजट आंकड़े बताते हैं सरकार की मंशा

पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह साफ दिखता है कि अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में समय-समय पर उतार-चढ़ाव जरूर आया है, लेकिन मोदी सरकार ने मंत्रालय को कभी नजरअंदाज नहीं किया। जरूरत के अनुसार बजट में बढ़ोतरी की गई और योजनाओं को लगातार जारी रखा गया।

सरकार का रुख स्पष्ट है—कल्याणकारी योजनाओं को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि सामाजिक आवश्यकता के आधार पर लागू करना। यही वजह है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समाज को लगातार लाभ मिल रहा है।

सबका विकास, सबका विश्वास

बजट 2026–27 यह संदेश देता है कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय को सिर्फ योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि देश की प्रगति का साझेदार मानती है। मुस्लिम समाज के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाकर उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में यह बजट एक मजबूत कदम है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बजट Minority BJP और सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें विकास को धर्म और जाति से ऊपर रखा गया है। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर और अधिक देखने को मिलेगा।

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर मुस्लिम समाज के लिए सकारात्मक संदेश लेकर आया है। शिक्षा, बुनियादी सुविधाएं, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के विकास पर दिया गया जोर यह साबित करता है कि मोदी सरकार का एजेंडा समावेशी विकास का है।

इसी के साथ देशभर में बजट को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है और लोग टीम नरेंद्र मोदी को इस संतुलित और विकासोन्मुखी बजट के लिए बधाई एवं आभार जता रहे हैं।

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