उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त, नई शिक्षा व्यवस्था की ओर बड़ा कदम,, जुलाई 2026 से नए नाम और ढांचे में संचालित होंगे मदरसे,, सरकार का दावा – आधुनिक शिक्षा और पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा

इन्तजार रजा हरिद्वार- उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त, नई शिक्षा व्यवस्था की ओर बड़ा कदम,,
जुलाई 2026 से नए नाम और ढांचे में संचालित होंगे मदरसे,,
सरकार का दावा – आधुनिक शिक्षा और पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि जुलाई 2026 से प्रदेश के मदरसे एक नई व्यवस्था और नए नाम के तहत संचालित किए जाएंगे। इस फैसले को राज्य में शिक्षा सुधार और आधुनिक शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था के जरिए मदरसों में पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे छात्रों को रोजगार और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
नई व्यवस्था के तहत मदरसों का होगा पुनर्गठन
प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय के तहत अब मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अंतर्गत नई व्यवस्था लागू की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना और छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नई प्रणाली में मदरसों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसके तहत विज्ञान, गणित, कंप्यूटर शिक्षा, अंग्रेजी और तकनीकी विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से मदरसों के छात्रों को भविष्य में उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
राज्य सरकार के अनुसार, मदरसों में शिक्षा की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नई गाइडलाइन भी जारी की जाएगी। इसके तहत शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्यक्रम निर्धारण और परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा मिले।
सरकार का तर्क – शिक्षा में समानता और रोजगार के अवसर बढ़ाने का प्रयास
सरकार का कहना है कि यह फैसला किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा सुधार की दिशा में उठाया गया कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य सभी बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
सरकार का दावा है कि कई मदरसों में आधुनिक शिक्षा की कमी के कारण छात्रों को रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने से छात्रों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों की पढ़ाई भी करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका भविष्य अधिक सुरक्षित और मजबूत हो सकेगा।
अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव के दौरान किसी भी मदरसे को बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें नई व्यवस्था में समायोजित किया जाएगा। सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि छात्रों और शिक्षकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से बदलाव लागू किया जाएगा और सभी मदरसों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
फैसले पर मिल रही मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
सरकार के इस फैसले पर समाज के विभिन्न वर्गों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने इस निर्णय को शिक्षा सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है, जबकि कुछ संगठनों ने इसे लेकर चिंता भी व्यक्त की है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई व्यवस्था सही तरीके से लागू की जाती है तो इससे मदरसों के छात्रों को बड़ा लाभ मिल सकता है। उनका कहना है कि आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि छात्र अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहते हुए आधुनिक समाज में भी सफल हो सकें।
वहीं कुछ अल्पसंख्यक संगठनों ने सरकार से इस फैसले को लागू करने से पहले व्यापक संवाद करने की मांग की है। उनका कहना है कि मदरसों की परंपरा और धार्मिक शिक्षा की संरचना को बनाए रखना भी जरूरी है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक शिक्षा में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा और केवल आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा।
जुलाई 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार ने घोषणा की है कि जुलाई 2026 से नई शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार जल्द ही नई गाइडलाइन और पाठ्यक्रम की रूपरेखा जारी करेगी।
अधिकारियों का कहना है कि राज्य के सभी मदरसों का सर्वे भी किया जाएगा, ताकि उनकी स्थिति और जरूरतों का आकलन किया जा सके। इसके आधार पर आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मदरसों के छात्र भी आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जुड़कर देश और समाज के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकें।
उत्तराखंड सरकार का यह फैसला राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि नई व्यवस्था किस प्रकार लागू होती है और इसका मदरसों तथा छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है। सरकार का दावा है कि यह बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेगा और छात्रों को बेहतर भविष्य की ओर ले जाएगा।



