रुद्रप्रयाग में गुलदार का कहर,, मासूम की मौत से शोक में डूबा गांव,, DM प्रतीक जैन ने परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढस

इन्तजार रजा हरिद्वार- रुद्रप्रयाग में गुलदार का कहर,,
मासूम की मौत से शोक में डूबा गांव,,
DM प्रतीक जैन ने परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढस

रुद्रप्रयाग।
रुद्रप्रयाग जिले में गुलदार के हमले में मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। यह हृदयविदारक घटना न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए गहरा सदमा बनकर सामने आई है। मृतक बच्चा दो बहनों का इकलौता भाई था, जिसकी असमय मौत ने परिवार की खुशियां छीन लीं।
घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी प्रतीक जैन स्वयं पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की। डीएम ने शोकाकुल माता-पिता और परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि प्रशासन इस दुःख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है और हर संभव मदद सुनिश्चित की जाएगी।
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुलदार की गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से नियंत्रण किया जाए। वन विभाग को क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, पिंजरे लगाने और ट्रैप कैमरे सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
डीएम ने कहा कि यह केवल एक हादसा नहीं बल्कि गंभीर चेतावनी है, जिसे प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ ले रहा है। उन्होंने मृतक बच्चे के परिवार को अनुमन्य सहायता राशि शीघ्र उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया और कहा कि पीड़ित परिवार को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की आवाजाही बनी हुई है, जिससे बच्चों और महिलाओं में भय का माहौल है। लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग की।
डीएम प्रतीक जैन ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि जन सुरक्षा सर्वोपरि है और वन विभाग तथा जिला प्रशासन संयुक्त रूप से ठोस कदम उठाएंगे।
मृतक बच्चे की मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि बहनें अपने इकलौते भाई को याद कर बेसुध हैं। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। यह घटना एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह सच्चाई को उजागर करती है।
प्रशासन की त्वरित सक्रियता के बावजूद, यह सवाल बना हुआ है कि आखिर कब तक मासूमों की जान इस संघर्ष की भेंट चढ़ती रहेगी। ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी और प्रभावी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।



