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पैतृक गांव पंचूर में सीएम योगी का सादगी भरा अंदाज़,, मां की मिट्टी, अपनों का साथ और कंडाली के साग का स्वाद,, सत्ता से दूर गांव की पगडंडियों पर दिखे यूपी के मुख्यमंत्री

इन्तजार रजा हरिद्वार- पैतृक गांव पंचूर में सीएम योगी का सादगी भरा अंदाज़,,

मां की मिट्टी, अपनों का साथ और कंडाली के साग का स्वाद,,

सत्ता से दूर गांव की पगडंडियों पर दिखे यूपी के मुख्यमंत्री

अपने पैतृक गांव की मिट्टी की खुशबू और मां के आशीर्वाद के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर अपने मूल से जुड़ते नजर आए। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद स्थित उनके पैतृक गांव पंचूर में सीएम योगी का ऐसा रूप देखने को मिला, जो अक्सर सत्ता की चकाचौंध में नजर नहीं आता। यहां न कोई औपचारिक प्रोटोकॉल था और न ही राजनीतिक भाषण—बस गांव, अपने लोग और बचपन की यादें।

गांव की संकरी पगडंडियों पर पैदल चलते हुए सीएम योगी बच्चों से घुलते-मिलते दिखे। किसी बच्चे के सिर पर स्नेह भरा हाथ, तो किसी बुजुर्ग से आत्मीय बातचीत—उनका यह सरल और आत्मीय अंदाज़ ग्रामीणों के लिए यादगार बन गया। गांव के लोग भी अपने “योगी” को अपने बीच पाकर भावुक नजर आए।

पैतृक गांव में सीएम योगी ने परंपरागत गढ़वाली भोजन का भी आनंद लिया। खास तौर पर पहाड़ की पहचान माने जाने वाले कंडाली के साग का स्वाद लेते हुए उनका सहज भाव देखने लायक था। कंडाली का साग केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति, श्रम और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यही वजह है कि इस सादे भोजन के साथ सीएम योगी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव आने पर सीएम योगी हर बार इसी तरह सामान्य व्यक्ति की तरह रहते हैं। न कोई दूरी, न कोई दिखावा। वे गांव की समस्याओं, युवाओं की पढ़ाई और बुजुर्गों के हालचाल तक की जानकारी लेते हैं। यही वजह है कि गांव में आज भी उन्हें सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि अपना बेटा और भाई माना जाता है।

पंचूर गांव में बिताए गए इन पलों के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ मां की मिट्टी का आशीर्वाद लेकर उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो गए। जाते-जाते उन्होंने ग्रामीणों से फिर मिलने का भरोसा भी दिया। यह दौरा भले ही निजी रहा हो, लेकिन इसने यह साफ कर दिया कि ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद भी अपनी जड़ों से जुड़ा रहना ही सच्ची पहचान होती है।

सीएम योगी का यह गांव प्रवास न सिर्फ उनके व्यक्तित्व के सादे और संस्कारी पक्ष को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि नेतृत्व वही प्रभावशाली होता है, जो अपनी मिट्टी और संस्कृति को कभी नहीं भूलता।

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