गढ़मीरपुर में हुए हत्याकांड से 11 महीने बाद उठा खून का पर्दा,, एसएसपी हरिद्वार प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने प्रेसवार्ता के दौरान किया लैब टेक्नीशियन वसीम हत्याकांड का सनसनीखेज़ खुलासा,, प्रेम-त्रिकोण में होमगार्ड निकला कातिल,, 18 जनवरी की रात, गढमीरपुर की सड़क पर पड़े शव और दफन हो जाने वाला था सच,, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला था राज, सड़क हादसा नहीं बल्कि हत्या, SSP के निर्देश पर नई टीम, तकनीक बनी सबसे बड़ा हथियार मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP ने जांच की कमान SP सिटी अभय प्रताप सिंह को सौंपी थी। इसके बाद रानीपुर कोतवाल शांति कुमार गंगवार, CIU प्रभारी नरेंद्र सिंह बिष्ट और SSI नितिन चौहान के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने पुराने साक्ष्यों को दोबारा खंगाला
इन्तज़ार रज़ा हरिद्वार- गढ़मीरपुर में हुए हत्याकांड से 11 महीने बाद उठा खून का पर्दा,,
एसएसपी हरिद्वार प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने प्रेसवार्ता के दौरान किया लैब टेक्नीशियन वसीम हत्याकांड का सनसनीखेज़ खुलासा,,
प्रेम-त्रिकोण में होमगार्ड निकला कातिल,, 18 जनवरी की रात, गढमीरपुर की सड़क पर पड़े शव और दफन हो जाने वाला था सच,,
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला था राज, सड़क हादसा नहीं बल्कि हत्या,
SSP के निर्देश पर नई टीम, तकनीक बनी सबसे बड़ा हथियार
मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP ने जांच की कमान SP सिटी अभय प्रताप सिंह को सौंपी थी।
इसके बाद रानीपुर कोतवाल शांति कुमार गंगवार, CIU प्रभारी नरेंद्र सिंह बिष्ट और SSI नितिन चौहान के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने पुराने साक्ष्यों को दोबारा खंगाला

हरिद्वार जनपद के रानीपुर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गढ़मीरपुर में लगभग एक वर्ष पूर्व हुए लैब टेक्नीशियन वसीम हत्याकांड से आखिरकार पुलिस ने पर्दा उठा दिया है। यह ऐसा मामला था, जिसने 11 महीने तक पुलिस, परिजनों और पूरे इलाके को असमंजस में डाले रखा।
मंगलवार को कोतवाली रानीपुर परिसर में आयोजित एक अहम प्रेसवार्ता में SSP हरिद्वार प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने इस ब्लाइंड मर्डर केस का सनसनीखेज़ खुलासा करते हुए बताया कि हत्या प्रेम-त्रिकोण के चलते की गई थी और इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि होमगार्ड अभिमन्यु निकला।
18 जनवरी की रात, सड़क पर पड़ा शव और दफन हो जाने वाला था सच
दिनांक 18 जनवरी 2025 की शाम रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम गढ़मीरपुर में उस समय सनसनी फैल गई थी, जब गांव के रास्ते पर बीच सड़क 21 वर्षीय वसीम पुत्र मुस्तकीम का शव पड़ा मिला।
वसीम बहादराबाद स्थित एक पैथोलॉजी लैब में कार्यरत था और रोज़ की तरह ड्यूटी खत्म कर बाइक से घर लौट रहा था।
शुरुआती हालात देखकर यह माना गया कि वसीम किसी सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ है। आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि उसे चलती बाइक से गिरते हुए देखा गया था और कमर से खून निकल रहा था, जिससे अंदाजा लगाया गया कि शायद किसी नुकीली वस्तु से चोट लगी होगी।
लेकिन किस्मत ने सच को दफन होने से बचा लिया।
अगले दिन जब धार्मिक परंपराओं के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक से पहले शव को नहलाया जा रहा था, तभी परिजनों की नजर वसीम की कमर में बने संदिग्ध छेद पर पड़ी। यह साधारण चोट नहीं लग रही थी।
शक गहराया, ग्रामीणों ने विरोध किया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला राज, सड़क हादसा नहीं बल्कि हत्या
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को पलट कर रख दिया। रिपोर्ट में साफ हुआ कि वसीम की गोली मारकर हत्या की गई थी। इसके बाद मृतक के पिता मुस्तकीम की तहरीर पर कोतवाली रानीपुर में मु0अ0सं0 36/25, धारा 103(1) बीएनएस के तहत अज्ञात अभियुक्त के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
यहीं से यह मामला एक ब्लाइंड मर्डर केस बन गया।
ना कोई प्रत्यक्षदर्शी,
ना कोई दुश्मनी का रिकॉर्ड,
ना ही घटनास्थल से ऐसा सुराग, जिससे हत्यारे तक पहुंचा जा सके।
11 महीने तक भटकती रही जांच, परिजनों की आंखें इंसाफ को तरसती रहीं
समय बीतता गया।
पुलिस ने गांव-गांव पूछताछ की, संदिग्धों को बुलाया, पुराने झगड़ों की पड़ताल की, लेकिन हत्याकांड का रहस्य बरकरार रहा।
वसीम के परिजन हर रोज़ एक ही सवाल पूछते रहे —
“आखिर मेरे बेटे का कसूर क्या था?”
गांव में चर्चा थी कि शायद यह केस कभी नहीं खुलेगा और सच वक्त की गर्द में दब जाएगा।
लेकिन SSP प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने इसे व्यक्तिगत चुनौती के रूप में लिया।
SSP के निर्देश पर नई टीम, तकनीक बनी सबसे बड़ा हथियार
मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP ने जांच की कमान SP सिटी अभय प्रताप सिंह को सौंपी थी।
इसके बाद रानीपुर कोतवाल शांति कुमार गंगवार, CIU प्रभारी नरेंद्र सिंह बिष्ट और SSI नितिन चौहान के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने पुराने साक्ष्यों को दोबारा खंगाला —

इलाके के CCTV कैमरों का नए सिरे से अध्ययन
मृतक के मोबाइल नंबर की CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) का गहन विश्लेषण
सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच
संदिग्ध वाहनों की पहचान
इसी तकनीकी जांच के दौरान पुलिस की नजर एक ग्रे रंग की जुपिटर स्कूटी पर जाकर ठहर गई।
ग्रे जुपिटर स्कूटी ने खोला कत्ल का रास्ता
CCTV फुटेज में यह स्कूटी घटना के समय मृतक के आसपास घूमती नजर आई।
स्कूटी का नंबर ट्रेस किया गया — UK 08 AQ 2050।
लगातार तलाश और चेकिंग के बाद 22 दिसंबर 2025 की रात सुमननगर क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस ने इसी स्कूटी के साथ एक व्यक्ति को रोका।
नाम पूछा गया — अभिमन्यु पुत्र अर्जुन सिंह, निवासी ग्राम सकौती, गुरुकुल नारसन, मंगलौर।
उम्र — 32 वर्ष
पेशा — होमगार्ड
सख्त पूछताछ में टूटा आरोपी, सामने आया प्रेम-त्रिकोण
पुलिस की सख्ती और तकनीकी सबूतों के सामने आरोपी ज्यादा देर टिक नहीं पाया।
पूछताछ में उसने जो कहानी बताई, वह चौंकाने वाली थी।
आरोपी ने बताया कि वर्ष 2024 में उसकी दोस्ती एक महिला होमगार्ड से हुई थी।
लेकिन उस महिला के पहले से वसीम से संबंध थे।
आरोपी के अनुसार, वसीम लगातार उस महिला को फोन और मैसेज कर परेशान करता था।
यहीं से ईर्ष्या, शक और गुस्सा अपराध में बदल गया।
अभिमन्यु ने सोशल मीडिया के जरिए वसीम की दिनचर्या की जानकारी जुटाई, उसकी आवाजाही की रेकी की और 17 जनवरी 2025 की शाम महिला होमगार्ड की स्कूटी दूसरी चाबी से निकालकर वसीम का पीछा किया।
चलती बाइक पर मारी गोली, मौके से फरार
जब वसीम बहादराबाद से घर लौट रहा था, तभी गढ़मीरपुर के पास आरोपी को मौका मिल गया।
अभिमन्यु ने चलती बाइक पर पीछे से 315 बोर के तमंचे से वसीम की पीठ में गोली मार दी।
वसीम बाइक समेत गिर पड़ा और आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया।
यही वजह थी कि शुरू में यह मामला सड़क हादसा प्रतीत हुआ।
तमंचा और स्कूटी बरामद, महिला होमगार्ड की भूमिका साफ
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर धनौरी तेली वाला रोड, करवला के जंगल से घटना में प्रयुक्त 315 बोर का तमंचा और जिंदा कारतूस बरामद कर लिया।
स्कूटी पहले ही कब्जे में ली जा चुकी थी।
SSP ने साफ किया कि जांच में महिला होमगार्ड की किसी भी प्रकार की संलिप्तता नहीं पाई गई है।
महिला अविवाहित है, जबकि आरोपी शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं।
SSP प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने कहा कि
“यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण ब्लाइंड मर्डर केस था। रानीपुर पुलिस और CIU टीम ने धैर्य, तकनीक और प्रोफेशनल जांच के दम पर इसे सुलझाया है। यह पूरी टीम के लिए गर्व का विषय है।”
11 महीने बाद परिजनों को मिली इंसाफ की उम्मीद
करीब एक साल बाद इस खुलासे से वसीम के परिवार की आंखों में पहली बार सुकून नजर आया।
परिजनों ने पुलिस का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि देर से ही सही, लेकिन सच सामने आया।
गढ़मीरपुर गांव में भी इस खुलासे के बाद चर्चाओं का दौर थम गया है।

क्या अदालत आरोपी को उसके गुनाह की सजा दिला पाएगी?
फिलहाल पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
🔴 यह मामला न सिर्फ एक हत्या का खुलासा है, बल्कि यह भी साबित करता है कि तकनीक, धैर्य और ईमानदार पुलिसिंग से कोई भी अपराध ज्यादा दिन छिपा नहीं रह सकता।
पुलिस टीम •
1. शान्ति कुमार, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रानीपुर
2- 30नि0 नितिन चौहान, कोतवाली रानीपुर
3. उ0नि0 अर्जुन कुमार, चोकी प्रभारी सुमननगर, कोतवाली रानीपुर हरिद्वार
4- 30नि0 विकास रावत, चौकी प्रभारी गैस प्लान्ट, कोतवाली रानीपुर
5- कानिD 1329 दीप गौड, कोतवाली रानीपुर
6- का0 721 महेन्द्र तोमर, कोतवाली रानीपुर
7- का0 678 रविन्द्र विष्ट, कोतवाली रानीपुर
8- का0 1521 नरेन्द्र राणा, कोतवाली रानीपुर
सी०आई०यू० टीम-
1. निरीक्षक नरेन्द्र सिंह बिष्ट, प्रभारी
2. उ0नि0 पवन डिमरी
3- का० वसीम
4. का0 उमेश
5- का० हरवीर



