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ई-रिक्शा संचालन पर बड़ा फैसला | सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त प्रशासन | हरिद्वार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की अहम बैठक,, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा पर मंथन, ई-रिक्शा सत्यापन हेतु SOP को मिली मंजूरी,, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और जन-जागरूकता—तीनों स्तरों पर चलेगा अभियान

बैठक में अधीक्षण अभियंता लोनिवि डी.के. सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दीपक कुमार, अधिशासी अभियंता एनएचआई अतुल शर्मा, सहायक परिवहन अधिकारी नेहा झा, निखिल शर्मा, कृष्ण चंद्र पलाड़िया सहित सभी उपजिलाधिकारी वीसी के माध्यम से उपस्थित रहे।

इन्तजार रजा हरिद्वार- ई-रिक्शा संचालन पर बड़ा फैसला | सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त प्रशासन | हरिद्वार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की अहम बैठक,,

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा पर मंथन, ई-रिक्शा सत्यापन हेतु SOP को मिली मंजूरी,,

प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और जन-जागरूकता—तीनों स्तरों पर चलेगा अभियान

हरिद्वार जनपद में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं, यातायात अव्यवस्था और अनियमित ई-रिक्शा संचालन को लेकर जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में 15 दिसम्बर 2025 को जिला कार्यालय सभागार में जिला सड़क सुरक्षा समिति एवं दुर्घटना न्यूनीकरण अनुस्वरण समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने की।

बैठक में जनपद में सड़क दुर्घटनाओं की वर्तमान स्थिति, प्रवर्तन की प्रभावशीलता, इंजीनियरिंग सुधारों तथा जन-जागरूकता अभियानों की समीक्षा की गई। विशेष रूप से ई-रिक्शाओं के अनियमित संचालन से उत्पन्न यातायात अव्यवस्था और सड़क सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सड़क सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है और इसके लिए प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग तथा लोक निर्माण विभाग को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।

19 जनवरी से 18 फरवरी 2026 तक चलेगा ई-रिक्शा सत्यापन व निरीक्षण अभियान

बैठक में ई-रिक्शा संचालन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से ई-रिक्शा सत्यापन एवं निरीक्षण हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को स्वीकृति प्रदान की गई। इस SOP के अंतर्गत 19 जनवरी 2026 से 18 फरवरी 2026 तक हरिद्वार एवं रुड़की नगर क्षेत्रों में एक विशेष अभियान संचालित किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अवैध, अप्रमाणित एवं नियमों का उल्लंघन कर रहे ई-रिक्शाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके तहत:

  • ई-रिक्शा चालकों एवं स्वामियों को पुलिस सत्यापन कराने हेतु एक माह का समय दिया गया है।
  • 19 जनवरी से प्रतिदिन लगभग 500 ई-रिक्शाओं को चरणबद्ध रूप से भौतिक निरीक्षण के लिए बुलाया जाएगा।
  • जिन ई-रिक्शाओं का पुलिस सत्यापन पूर्ण होगा और जिनका परिवहन विभाग द्वारा तकनीकी निरीक्षण सफलतापूर्वक किया जाएगा, केवल उन्हीं को विशेष पहचान स्टिकर जारी किया जाएगा।
  • स्टिकर प्राप्त ई-रिक्शा ही नगर क्षेत्र में संचालन के लिए अधिकृत माने जाएंगे।

जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना स्टिकर के ई-रिक्शा संचालन को अवैध माना जाएगा और उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नगर क्षेत्र को जोनों में बांटने का निर्णय, तय क्षेत्र में ही चलेगा ई-रिक्शा

यातायात व्यवस्था को और अधिक सुचारू बनाने के लिए बैठक में नगर क्षेत्र को विभिन्न जोनों में विभाजित करने का भी निर्णय लिया गया। प्रत्येक ई-रिक्शा चालक को एक निर्धारित जोन आवंटित किया जाएगा और चालक केवल उसी जोन में ई-रिक्शा का संचालन कर सकेगा।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि जोन प्रणाली से न केवल यातायात दबाव कम होगा, बल्कि अव्यवस्थित पार्किंग, जाम और दुर्घटनाओं की संभावनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जोन निर्धारण व्यावहारिक और जनहित को ध्यान में रखते हुए किया जाए।

हेलमेट और ओवरलोडिंग पर सख्ती, हरिद्वार-लक्सर मार्ग के सुधार कार्य एक सप्ताह में पूरे करने के निर्देश

बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी ठोस निर्णय लिए गए। जिलाधिकारी ने दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनने के नियम का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही ओवरलोड वाहनों के विरुद्ध सख्त प्रवर्तन कार्रवाई करने को कहा।

इसके अतिरिक्त, हरिद्वार-लक्सर मार्ग के निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट भी बैठक में प्रस्तुत की गई। निरीक्षण के दौरान चिन्हित कमियों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग (एनएच खंड) को निर्देशित किया कि सभी अनुशंसित सुधारात्मक कार्य एक सप्ताह के भीतर पूर्ण किए जाएं, ताकि दुर्घटनाओं की संभावनाओं को न्यूनतम किया जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बेहतर सड़क इंजीनियरिंग और आम जनता की सहभागिता भी अत्यंत आवश्यक है।

प्रवर्तन, इंजीनियरिंग और जन-जागरूकता—तीनों स्तरों पर चलेगा अभियान

बैठक के अंत में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर प्रवर्तन, इंजीनियरिंग एवं जन-जागरूकता—तीनों स्तरों पर निरंतर कार्रवाई करेगा। भविष्य में भी ऐसे समन्वित प्रयास जारी रहेंगे, ताकि हरिद्वार जनपद को सड़क दुर्घटनाओं से सुरक्षित बनाया जा सके।

बैठक में अधीक्षण अभियंता लोनिवि डी.के. सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दीपक कुमार, अधिशासी अभियंता एनएचआई अतुल शर्मा, सहायक परिवहन अधिकारी नेहा झा, निखिल शर्मा, कृष्ण चंद्र पलाड़िया सहित सभी उपजिलाधिकारी वीसी के माध्यम से उपस्थित रहे।

जिला प्रशासन की यह पहल निश्चित रूप से ई-रिक्शा संचालन में अनुशासन लाने, यातायात व्यवस्था सुधारने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम और दूरगामी कदम मानी जा रही है।

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