शीतलहर, वन्यजीव खतरे और भूस्खलन पर जिला प्रशासन सख्त,, जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने ली समीक्षा बैठक, दिए स्पष्ट और कड़े निर्देश,, लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क में तेजी, जनजीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
शीतलहर के बढ़ते प्रकोप, वन्यजीवों से हो रहे नुकसान और भूस्खलन की लगातार चुनौती को देखते हुए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने शनिवार को जिला कार्यालय स्थित एनआईसी सभागार में जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। बैठक में शीतलहर से जनजीवन पर पड़ रहे प्रभाव, वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता और लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि जनसुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभाग अलर्ट मोड पर रहते हुए समन्वय के साथ कार्य करें।

इन्तजार रजा हरिद्वार- शीतलहर, वन्यजीव खतरे और भूस्खलन पर जिला प्रशासन सख्त,,
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने ली समीक्षा बैठक, दिए स्पष्ट और कड़े निर्देश,,
लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क में तेजी, जनजीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

रुद्रप्रयाग।
शीतलहर के बढ़ते प्रकोप, वन्यजीवों से हो रहे नुकसान और भूस्खलन की लगातार चुनौती को देखते हुए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने शनिवार को जिला कार्यालय स्थित एनआईसी सभागार में जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। बैठक में शीतलहर से जनजीवन पर पड़ रहे प्रभाव, वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता और लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि जनसुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभाग अलर्ट मोड पर रहते हुए समन्वय के साथ कार्य करें।
बैठक में जहां एक ओर वन विभाग की आपत्तियों के चलते सड़क निर्माण दायी संस्थाओं से जुड़े मामलों पर गहन चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर शीतलहर के कारण संभावित आपदाओं और वन्यजीवों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए ठोस रणनीति तय की गई।
शीतलहर को लेकर प्रशासन अलर्ट, स्वास्थ्य और यातायात पर विशेष फोकस
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि जनपद के कई क्षेत्रों में शीतलहर का असर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को 24×7 अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण यदि कहीं भी सड़क मार्ग बाधित होता है, तो तत्काल जेसीबी और अन्य मशीनरी लगाकर मार्ग खोलना सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्थिति में आवागमन पूरी तरह ठप नहीं होना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि शीतलहर से प्रभावित लोगों, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों पर विशेष नजर रखी जाए। सभी सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड में रखते हुए आवश्यक दवाइयों और स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि शीतलहर के दौरान किसी भी तरह की जनहानि न हो, यह प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
वन्यजीवों से बढ़ते खतरे पर चिंता, जागरूकता और गश्त बढ़ाने के निर्देश
बैठक में वन्यजीवों से हो रहे हमलों और नुकसान को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के कई ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ी है, जिससे लोगों में भय का माहौल है।
उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिए कि संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव के उपायों की जानकारी मिल सके।
जिलाधिकारी ने साफ किया कि वन्यजीव हमले की किसी भी घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही वन्यजीवों की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन ने बैठक में जानकारी दी कि वन्यजीवों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सरकार की ओर से कई प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संवेदनशील इलाकों में चेनलिंक फेंसिंग, सोलर फेंसिंग और अन्य तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं, ताकि वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश न कर सकें।
लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क पर सख्ती, सड़क सुरक्षा सर्वोपरि
जिलाधिकारी ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे लैंडस्लाइड प्रोटेक्शन वर्क की भी बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने सड़क निर्माण दायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर और तय समयसीमा में पूरा किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि शीतलहर और संभावित बर्फबारी के बीच सड़कों की स्थिति सुरक्षित और सुचारू रहनी चाहिए, ताकि आम लोगों के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं को भी किसी तरह की परेशानी न हो।
जिलाधिकारी ने कहा कि वन विभाग और सड़क निर्माण एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय बेहद जरूरी है। वन विभाग की आपत्तियों को समय रहते सुलझाया जाए, ताकि विकास कार्य अनावश्यक रूप से प्रभावित न हों, लेकिन पर्यावरणीय संतुलन से भी कोई समझौता न किया जाए।
समन्वय और तत्परता से ही आपदा से निपटना संभव
बैठक के अंत में जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विभागों की जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं और मैदानी स्तर पर निरंतर निगरानी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि शीतलहर, वन्यजीव खतरे और भूस्खलन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासनिक तत्परता और विभागीय समन्वय ही सबसे बड़ा हथियार है।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल कुमार शुक्ला, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग रुद्रप्रयाग इंद्रजीत बोस एवं ऊखीमठ राकेश प्रकाश नैथानी, जल संस्थान के अनीश पिल्लई, जल निगम के नवल कुमार, उप प्रभागीय वनाधिकारी डी.एस. पुंडीर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।



