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उत्तराखंड में हरिद्वार से आंगनबाड़ी कर्मियों का बड़ा ऐलान,, 13 अक्टूबर से राज्यभर में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी  सरकार के वादाखिलाफी से नाराज़गी चरम पर, आंदोलन तेज करने की चेतावनी,, सरकार के वादों पर धूल, 1.5 साल से अटका मानदेय वृद्धि का फैसला,, ‘अब जुमले नहीं चलेंगे, हम अपने हक के लिए सड़क पर उतरेंगे’ — आंगनबाड़ी संघ

इन्तजार रजा हरिद्वार- उत्तराखंड में हरिद्वार से आंगनबाड़ी कर्मियों का बड़ा ऐलान,,

13 अक्टूबर से राज्यभर में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी 

सरकार के वादाखिलाफी से नाराज़गी चरम पर, आंदोलन तेज करने की चेतावनी,,

सरकार के वादों पर धूल, 1.5 साल से अटका मानदेय वृद्धि का फैसला,,

‘अब जुमले नहीं चलेंगे, हम अपने हक के लिए सड़क पर उतरेंगे’ — आंगनबाड़ी संघ

 

उत्तराखंड में एक बार फिर आंगनबाड़ी विभाग की गर्मी बढ़ गई है। प्रदेश भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 13 अक्टूबर 2025 से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर जाने का ऐलान कर चुकी हैं। संगठन ने स्पष्ट कहा है—“अब आधे-अधूरे वादे नहीं, लिखित आदेश चाहिए। वरना लड़ाई और तेज होगी।” उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में सरकार के रवैये पर गहरी नाराज़गी जताई है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुशीला खत्री ने चेतावनी दी है कि “1 साल 6 महीने हो गए, लेकिन सरकार सिर्फ आश्वासन दे रही है… फैसला नहीं। अब प्रदेश की सभी कार्यकर्ता मजबूरी में आंदोलन का रास्ता पकड़ रही हैं।”

सरकार के वादों पर धूल, 1.5 साल से अटका मानदेय वृद्धि का फैसला

पत्र में आंगनबाड़ी संघ ने साफ कहा है कि:

  • 20 फरवरी 2024 को प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल हुई थी।
  • 3 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री आवास पर प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हुई।
  • सरकार ने मानदेय बढ़ाने के लिए तीन सचिवों की कमेटी बनाने का आश्वासन दिया।
  • 7 मार्च 2024 को निदेशालय में बैठक हुई और कहा गया कि कमेटी बन चुकी है।
  • इस भरोसे पर संघ ने 13 मार्च 2024 को हड़ताल खत्म कर दी।

लेकिन आज 1 साल 6 माह बाद भी कोई फैसला नहीं। न मानदेय बढ़ा, न रिपोर्ट आई, न कोई आदेश। संघ का आरोप है कि सरकार केवल मीठे वादे करती रही, जबकि जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदला। इसी लापरवाही से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बेहद नाराज़ हैं।

ममता बादल, प्रदेश महामंत्री आंगनबाड़ी संघ उत्तराखंड ने कहा कि

“सरकार हमें आश्वासन देकर भूल जाती है। अब हम चुप नहीं रहेंगे। 13 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में काम बंद होगा। जब तक लिखित आदेश नहीं मिलता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगी।”

13 अक्टूबर से सभी केंद्र खुले रहेंगे, लेकिन काम पूरी तरह बंद

संगठन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं—

  • सभी आंगनबाड़ी केंद्र खुले रहेंगे
  • लेकिन ऑनलाइन/ऑफलाइन सभी सरकारी और गैर-सरकारी कार्यों का बहिष्कार
  • पोषण, रूटीन स्वास्थ्य, सर्वे, फीडिंग, ऐप एंट्री — सब कुछ पूरी तरह बंद
  • जब तक सरकार लिखित में ठोस फैसला नहीं करती, बहिष्कार जारी रहेगा संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने फिर टालमटोल की तो आंदोलन को राज्यव्यापी उग्र रूप दिया जाएगा।
    आंगनबाड़ी संगठन की छह प्रमुख माँगें — ‘वादे नहीं, अब फैसला चाहिए’

1. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा

संघ ने कहा कि कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारियाँ लगातार बढ़ाई गईं, लेकिन सुविधाएँ बढ़ाना सरकार भूल गई।
राज्य कर्मचारी का दर्जा मिलने तक
👉 मानदेय 24,000 रुपये प्रतिमाह (800 रुपये प्रतिदिन) किया जाए।

2. सेवा निवृत्ति पर सम्मानजनक पेंशन

सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली एकमुश्त राशि को
👉 कम से कम 5 लाख रुपये किया जाए।

3. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ग्रेच्युटी लागू की जाए

4. सुपरवाइज़र के खाली पदों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से ही पदोन्नति

संघ ने माँग की है कि प्रमोशन के लिए तुरंत विज्ञप्ति जारी की जाए।

5. मार्च 2024 में बनी कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक हो

संघ का कहना है कि—
“कमेटी बनी या नहीं? बनी तो रिपोर्ट कहाँ है? सरकार बताए।”

6. एफ.आर.एस. (Face Capture) प्रणाली तुरंत बंद की जाए

संघ के अनुसार इस तकनीक की वजह से
👉 “वास्तविक लाभार्थी ही लाभ से वंचित हो रहे हैं।”

‘अब जुमले नहीं चलेंगे, हम अपने हक के लिए सड़क पर उतरेंगे’ — संघ

एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री ने कहा है कि कार्यकर्ता दिन-रात बच्चों, महिलाओं, गर्भवती माताओं की सेवा करती हैं, लेकिन सरकार उनका हक देने से पीछे हटती जा रही है।

उनका कहना है —
“हम लोगों का घर-परिवार भी है। जरूरतें हैं। लेकिन सरकार हमें सिर्फ आश्वासन देकर चलाना चाहती है। अब नहीं। हम सब एकजुट हैं।” प्रदेश महामंत्री ममता बादल और संरक्षक लक्ष्मी बिष्ट ने भी तीखा रुख अपनाते हुए कहा है कि लगातार बढ़ते काम, कम मानदेय और असुरक्षित भविष्य ने कार्यकर्ताओं को लड़ने पर मजबूर कर दिया है।

सरकार की चुप्पी से नाराज़गी, आंदोलन का बिगुल बज चुका है

संघ ने साफ कहा है कि यह आंदोलन किसी पार्टी या विपक्ष का हिस्सा नहीं बल्कि हक और सम्मान की लड़ाई है। पूरे राज्य में लगभग हर जिला, हर केंद्र की कार्यकर्ता इस आंदोलन के समर्थन में है। पत्र की प्रति कैबिनेट मंत्री, निदेशक, जिला कार्यक्रम अधिकारियों, सभी परियोजना अधिकारियों और सुपरवाइज़र को भी भेज दी गई है।

13 अक्टूबर से ठप होगा काम, सरकार पर दबाव बढ़ेगा

अब गेंद सरकार के पाले में है।
13 अक्टूबर से:

  • राशन वितरण
  • पोषण अभियान
  • ऐप एंट्री
  • गृह सर्वे
  • बच्चों और गर्भवती महिलाओं से जुड़े सभी रिकॉर्ड

सब कुछ ठप रहेगा।आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साफ कह दिया है—
“लिखित आदेश के बिना काम नहीं होगा।”यदि सरकार जल्द फैसला नहीं लेती, तो उत्तराखंड में बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक संकट खड़ा हो सकता है।

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