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बड़ा न्यायिक उलटफेर: सत्र न्यायालय ने पलटा निचली अदालत का फैसला,, विधायक आदेश चौहान समेत सभी आरोपियों को मिली राहत,, अदालत ने कहा – आरोप साबित नहीं, रानीपुर विधायक आदेश चौहान सहित सभी को क्लीन चिट

इन्तजार रजा हरिद्वार- बड़ा न्यायिक उलटफेर: सत्र न्यायालय ने पलटा निचली अदालत का फैसला,,

विधायक आदेश चौहान समेत सभी आरोपियों को मिली राहत,,

अदालत ने कहा – आरोप साबित नहीं, रानीपुर विधायक आदेश चौहान सहित सभी को क्लीन चिट

बहादराबाद क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित मामले में बड़ा न्यायिक उलटफेर सामने आया है। सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए विधायक आदेश चौहान सहित सभी आरोपियों को राहत दे दी है। अदालत ने सुनवाई के बाद स्पष्ट कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध नहीं होते, इसलिए सभी आरोपियों को क्लीन चिट दी जाती है।

इस फैसले के साथ ही निचली अदालत का पूर्व निर्णय पूरी तरह ध्वस्त हो गया और मामले का पूरा परिदृश्य बदल गया।

निचली अदालत के फैसले को सत्र न्यायालय ने किया निरस्त

मामले में पहले निचली अदालत ने आरोपियों के खिलाफ फैसला दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपियों की ओर से सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरे मामले के दस्तावेज, गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा की।

सत्र न्यायालय ने पाया कि निचली अदालत के निर्णय में कई तथ्यों पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं थी और प्रस्तुत सबूत आरोपों को ठोस रूप से साबित नहीं करते। इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया।

फैसले से बदला पूरा राजनीतिक माहौल

अदालत के इस फैसले के बाद क्षेत्र की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया है। विधायक आदेश चौहान के समर्थकों का कहना है कि यह फैसला साबित करता है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार थे।

दूसरी ओर विपक्षी दल इस मामले को लेकर पहले से ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करते रहे हैं। अब अदालत के निर्णय के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सत्र न्यायालय द्वारा निचली अदालत का फैसला पलटना न्यायिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। यदि किसी फैसले में तथ्यात्मक या साक्ष्य संबंधी कमियां पाई जाती हैं तो उच्च अदालतें उसे संशोधित या निरस्त कर सकती हैं।

इस मामले में भी अदालत ने साक्ष्यों के अभाव को प्रमुख आधार मानते हुए सभी आरोपियों को राहत दी है।

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