अलर्टइन्वेस्टिगेशनउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरें

राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के आदेश पर उठा बड़ा सवाल,, हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने प्रमुख सचिव गृह को भेजा आपत्ति पत्र,, डीआईजी जन्मंजय खंडूरी के खिलाफ पारित आदेश को बताया क्षेत्राधिकार से बाहर 🚨

इन्तजार रजा हरिद्वार- राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के आदेश पर उठा बड़ा सवाल,,

हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने प्रमुख सचिव गृह को भेजा आपत्ति पत्र,,

डीआईजी जन्मंजय खंडूरी के खिलाफ पारित आदेश को बताया क्षेत्राधिकार से बाहर 🚨

हरिद्वार। उत्तराखंड में पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। हरिद्वार के एक अधिवक्ता ने राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण द्वारा पारित एक आदेश पर गंभीर आपत्ति जताते हुए प्रमुख सचिव गृह, उत्तराखंड सरकार को पत्र भेजा है।

अधिवक्ता ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण द्वारा पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार और वर्तमान डीआईजी उत्तराखंड जन्मंजय खंडूरी के विरुद्ध पारित आदेश क्षेत्राधिकार से बाहर है और यह आदेश कानून तथा प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

उन्होंने मांग की है कि इस मामले की विधिक और प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई जाए ताकि भविष्य में किसी भी अधिकारी के खिलाफ बिना अधिकार क्षेत्र के आदेश पारित करने की पुनरावृत्ति न हो।


अधिवक्ता ने उठाए कानूनी और क्षेत्राधिकार से जुड़े सवाल

हरिद्वार के अधिवक्ता द्वारा प्रमुख सचिव गृह को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण को जिस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार है, उसी दायरे में उसे कार्रवाई करनी चाहिए।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि जिस मामले में आदेश पारित किया गया है, वह प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र से बाहर प्रतीत होता है।

अधिवक्ता का कहना है कि किसी भी संवैधानिक या वैधानिक संस्था को अपने अधिकारों की सीमाओं के भीतर रहकर ही निर्णय लेना चाहिए। यदि कोई संस्था अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित करती है तो इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं।

इसी आधार पर अधिवक्ता ने प्रमुख सचिव गृह से इस पूरे प्रकरण की विधिक समीक्षा कराने की मांग की है।

डीआईजी जन्मंजय खंडूरी के खिलाफ पारित हुआ है आदेश

प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण द्वारा जो आदेश पारित किया गया है, वह उस समय के हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और वर्तमान डीआईजी उत्तराखंड जन्मंजय खंडूरी से संबंधित है।

अधिवक्ता का कहना है कि इस आदेश को जिस प्रकार से पारित किया गया है, वह कई कानूनी पहलुओं पर खरा नहीं उतरता।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करनी है तो उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया और वैधानिक प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है।

यदि बिना उचित अधिकार क्षेत्र के आदेश पारित किए जाते हैं तो इससे प्रशासनिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

भविष्य में ऐसे आदेशों पर रोक लगाने की मांग

अधिवक्ता ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि यदि इस तरह के आदेशों पर समय रहते स्पष्टता नहीं लाई गई तो भविष्य में भी इस प्रकार के विवाद सामने आ सकते हैं।

उन्होंने प्रमुख सचिव गृह से अनुरोध किया है कि इस मामले की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर ही कार्य करे।

साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि आदेश वास्तव में क्षेत्राधिकार से बाहर पाया जाता है तो उस पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे।

अधिवक्ता का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि कानून और प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना है।

प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक और कानूनी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी संस्था द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया जाता है तो यह गंभीर विषय बन सकता है।

ऐसे मामलों में सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता होती है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का भ्रम या विवाद उत्पन्न न हो।

फिलहाल यह मामला प्रमुख सचिव गृह के संज्ञान में पहुंच चुका है और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।

कानून के दायरे में हो कार्रवाई

अधिवक्ता ने अपने पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि प्रशासनिक संस्थाओं को कानून और अधिकार क्षेत्र के दायरे में रहकर ही कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत है तो उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच और कार्रवाई की जानी चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में सरकार द्वारा स्पष्ट मार्गदर्शन देना जरूरी होता है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

फिलहाल इस मामले ने हरिद्वार और उत्तराखंड के प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है और सभी की नजर अब सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

📢 (नोट: इस समाचार के साथ राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण, अधिवक्ता अरुण भदौरिया तथा डीआईजी जन्मंजय खंडूरी की तस्वीरें प्रकाशित की जाएंगी ।)

Related Articles

Back to top button