लक्सर में मनरेगा घोटाले का बड़ा खुलासा,, ग्राम पंचायत शिकारपुर में कागजों में बनी सड़कें, धरातल पर नहीं मिलीं—सीडीओ ने 20.62 लाख की रिकवरी के दिए आदेश,, ग्राम प्रधान समेत चार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई, जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन में मचा हड़कंप

इन्तजार रजा हरिद्वार- लक्सर में मनरेगा घोटाले का बड़ा खुलासा,,
ग्राम पंचायत शिकारपुर में कागजों में बनी सड़कें, धरातल पर नहीं मिलीं—सीडीओ ने 20.62 लाख की रिकवरी के दिए आदेश,,
ग्राम प्रधान समेत चार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई, जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन में मचा हड़कंप
लक्सर/हरिद्वार। जनपद हरिद्वार के लक्सर क्षेत्र की ग्राम पंचायत शिकारपुर में मनरेगा योजना के तहत हुए विकास कार्यों में बड़ी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि कई सड़क निर्माण कार्य केवल कागजों में दिखाए गए, जबकि मौके पर उनका कोई अस्तित्व नहीं मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए हरिद्वार के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने ग्राम प्रधान समेत चार अधिकारियों और कर्मचारियों से 20 लाख 62 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश जारी किए हैं।
सीडीओ के इस आदेश के बाद विकास विभाग और पंचायत तंत्र में हड़कंप मच गया है। जांच में यह भी सामने आया कि मनरेगा के तहत मजदूरों के नाम पर फर्जी तरीके से भुगतान किया गया और कई ऐसे लोगों को भी मजदूर दिखा दिया गया जो या तो दूसरे गांवों के थे, रिश्तेदार थे, बुजुर्ग थे, स्कूली बच्चे थे या फिर विदेश में रह रहे थे।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच, सामने आया बड़ा घोटाला
इस पूरे मामले की शुरुआत लंढौरा क्षेत्र के गांव शिकारपुर निवासी विकास चौधरी की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि ग्राम प्रधान ने अधिकारियों की मिलीभगत से मनरेगा योजना में भारी धांधली की है और करीब एक करोड़ रुपये तक के घोटाले को अंजाम दिया गया है।
शिकायत मिलने के बाद हरिद्वार के सीडीओ ने मामले की जांच के आदेश दिए। जांच टीम ने गांव पहुंचकर मौके पर निरीक्षण किया और दस्तावेजों की पड़ताल की।
जांच के दौरान पाया गया कि कई सड़क निर्माण कार्यों को मनरेगा के तहत स्वीकृत दिखाया गया था और उनके लिए सरकारी धन भी खर्च दिखाया गया, लेकिन जब टीम ने मौके पर जाकर सत्यापन किया तो 15 से अधिक सड़कें धरातल पर बनी ही नहीं थीं।
अर्थात जिन सड़कों को कागजों में बनाकर भुगतान कर दिया गया था, वे वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थीं। इस खुलासे ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।
पहली जांच में 31.76 लाख की धांधली की पुष्टि
जांच टीम ने 4 अगस्त 2025 को अपनी पहली जांच आख्या में पूरे मामले की रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में लगभग 31 लाख 76 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि की गई थी।
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया था कि कई विकास कार्यों में सरकारी धन खर्च दिखाया गया, लेकिन कार्य वास्तविक रूप से नहीं हुए।
हालांकि इसके बाद मामले में नया मोड़ आया। जांच में नाम आने के बाद ग्राम प्रधान, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता (मनरेगा) और रोजगार सेवक ने इस कार्रवाई को रोकने के लिए दोबारा जांच कराने का अनुरोध किया।
उन्होंने प्रशासन से कहा कि मामले की पुनः जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
डीएम के आदेश पर दोबारा जांच, फिर सामने आई सच्चाई
अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुरोध के बाद हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए 2 दिसंबर 2025 को पुनः जांच के आदेश जारी किए।
इसके बाद गठित जांच टीम ने दोबारा पूरे मामले की जांच की। टीम ने विकास कार्यों के दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया।
दूसरी जांच में भी यह स्पष्ट हो गया कि कई विकास कार्य वास्तव में नहीं किए गए थे, लेकिन उनके नाम पर भुगतान कर दिया गया था।
हालांकि पुनः जांच में कुल अनियमितता की राशि पहले की तुलना में कम होकर 20 लाख 62 हजार रुपये पाई गई।
चार लोगों पर रिकवरी, प्रशासन ने दिए सख्त आदेश
पुनः जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद हरिद्वार के सीडीओ ने सख्त कदम उठाते हुए ग्राम प्रधान सहित चार अधिकारियों और कर्मचारियों से वसूली के आदेश जारी कर दिए।
जिन लोगों से रिकवरी के आदेश दिए गए हैं, उनमें शामिल हैं—
- ग्राम पंचायत शिकारपुर की ग्राम प्रधान
- तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी
- कनिष्ठ अभियंता (मनरेगा)
- रोजगार सेवक (मनरेगा)
सीडीओ ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि इन सभी से एक सप्ताह के भीतर 20 लाख 62 हजार रुपये की वसूली की जाए।
यदि निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं कराई जाती है तो आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
कागजों में सड़कें, मजदूरों के नाम पर भी खेल
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि कई सड़क निर्माण कार्यों को कागजों में पूरा दिखाया गया था।
लेकिन जब टीम मौके पर पहुंची तो वहां सड़कें बनी ही नहीं थीं। इससे स्पष्ट हो गया कि सरकारी धन का उपयोग वास्तविक विकास कार्यों में नहीं किया गया।
इसके अलावा मजदूरी भुगतान में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। आरोप है कि—
- दूसरे गांवों के लोगों को मजदूर दिखाया गया
- रिश्तेदारों के नाम पर भुगतान किया गया
- स्कूली बच्चों को भी मजदूर दिखाया गया
- बुजुर्गों के नाम पर मजदूरी निकाली गई
- विदेश में रहने वाले लोगों के नाम पर भी भुगतान दिखाया गया
इन खुलासों ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
- कार्रवाई से पंचायत और विकास विभाग में मचा हड़कंप
सीडीओ के रिकवरी आदेश के बाद पंचायत विभाग और विकास विभाग में हलचल तेज हो गई है।
- यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना और विकास कार्य कराना है। लेकिन यदि इसी योजना में इस तरह की अनियमितताएं सामने आती हैं तो इससे सरकार की योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।प्रशासन का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।



