अपराधअलर्टइन्वेस्टिगेशनउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरें

बहादराबाद के सलेमपुर,दादुपुर में अवैध कबाड़खाना प्लास्टिक गुल्ला रिसाईकलिंग यूनिट्स पर बड़ा खुलासा: बिना अनुमति चल रही फैक्ट्रियों को आखिर कैसे मिले दर्जनों बिजली कनेक्शन? 🟡 प्रदूषण बोर्ड ने लिखा पत्र, क्या अब बिजली विभाग पर भी उठे गंभीर सवाल, कैसे होगी जांच,, ⚠️ अवैध यूनिट्स, लेकिन ‘वैध’ बिजली कनेक्शन—बड़ा विरोधाभास,, 🔵 बहादराबाद क्षेत्र में कबाड़खाना यूनिट्स का खेल, जांच की मांग तेज,, 🟢 कौन जिम्मेदार? सिस्टम की मिलीभगत या बड़ी लापरवाही— बिजली आपूर्ति को लेकर जांच के दायरे में कई……

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 बहादराबाद के सलेमपुर,दादुपुर में अवैध कबाड़खाना प्लास्टिक गुल्ला रिसाईकलिंग यूनिट्स पर बड़ा खुलासा: बिना अनुमति चल रही फैक्ट्रियों को आखिर कैसे मिले दर्जनों बिजली कनेक्शन?

🟡 प्रदूषण बोर्ड ने लिखा पत्र, क्या अब बिजली विभाग पर भी उठे गंभीर सवाल, कैसे होगी जांच,,

⚠️ अवैध यूनिट्स, लेकिन ‘वैध’ बिजली कनेक्शन—बड़ा विरोधाभास,,

🔵 बहादराबाद क्षेत्र में कबाड़खाना यूनिट्स का खेल, जांच की मांग तेज,,

🟢 कौन जिम्मेदार? सिस्टम की मिलीभगत या बड़ी लापरवाही— बिजली आपूर्ति को लेकर जांच के दायरे में कई……


धर्मनगरी हरिद्वार में अवैध रूप से संचालित प्लास्टिक और कबाड़खाना यूनिट्स पर कार्रवाई के बीच अब एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—जब ये यूनिट्स अवैध थीं, तो इन्हें बिजली कनेक्शन किस आधार पर और किसकी अनुमति से दिया गया?

उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) द्वारा बिजली विभाग को इन अवैध इकाइयों के कनेक्शन काटने के लिए पत्र लिखे जाने के बाद अब पूरा मामला और भी गंभीर हो गया है। यह सिर्फ अवैध संचालन का मामला नहीं रह गया, बल्कि अब यह प्रशासनिक लापरवाही या संभावित मिलीभगत की जांच तक पहुंच गया है।

⚠️ अवैध यूनिट्स, लेकिन ‘वैध’ बिजली कनेक्शन—बड़ा विरोधाभास

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने पत्र में साफ कहा है कि कई प्लास्टिक रिसाइक्लिंग और कबाड़खाना यूनिट्स बिना वैध अनुमति के संचालित हो रही हैं। इन यूनिट्स के पास न तो ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ (स्थापना की अनुमति) है और न ही ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (संचालन की अनुमति)।

इसके बावजूद ये यूनिट्स लंबे समय से बिजली का उपयोग कर रही थीं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब ये इकाइयां अवैध थीं, तो बिजली विभाग ने इन्हें कनेक्शन कैसे जारी कर दिया?

यह पूरा मामला खासतौर पर विद्युत वितरण खंड बहादराबाद से जुड़ा हुआ सामने आ रहा है, जहां क्षैत्र में कई संदिग्ध

अवैध कबाड़खाना प्लास्टिक गुल्ला रिसाईकलिंग यूनिट्स संचालित पाई गई हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र में कई कबाड़खाना और प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट्स लंबे समय से चल रही थीं, जिनके पास जरूरी पर्यावरणीय अनुमति नहीं थी।

फिर भी, इन इकाइयों को नियमित बिजली कनेक्शन दिया गया, जिससे इनके संचालन को बढ़ावा मिला। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या बिजली विभाग ने जांच किए बिना ही कनेक्शन जारी कर दिए, या फिर इसमें किसी स्तर पर मिलीभगत रही?

प्रदूषण बोर्ड का सख्त रुख—कनेक्शन काटने के आदेश

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बिजली विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:

  • सभी अवैध यूनिट्स के बिजली कनेक्शन तत्काल प्रभाव से काटे जाएं
  • बिना बोर्ड की अनुमति के किसी भी नई इकाई को कनेक्शन न दिया जाए
  • भविष्य में नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए

इस आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

🚨 जांच की मांग तेज—कौन है जिम्मेदार?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी किस विभाग की है और जवाबदेही किसकी तय होगी?

इस मामले में तीन प्रमुख विभागों की भूमिका सामने आ रही है:

  1. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड – जो अनुमति जारी करता है
  2. बिजली विभाग (UPCL) – जो कनेक्शन देता है
  3. स्थानीय प्रशासन – जो अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखता है

विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली कनेक्शन जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि संबंधित इकाई के पास सभी वैध अनुमति हो। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो यह गंभीर लापरवाही या जानबूझकर की गई अनदेखी मानी जाएगी।

🔥 क्या मिलीभगत का मामला?

स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में केवल लापरवाही ही नहीं, बल्कि मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है।

क्योंकि बिना किसी जांच के लंबे समय तक अवैध यूनिट्स का संचालन और उन्हें बिजली की सप्लाई मिलना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं सिस्टम की आंखें बंद थीं—या बंद कर दी गई थीं।

🗣️ स्थानीय लोगों का गुस्सा—‘अब हो सख्त कार्रवाई’

बहादराबाद और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने इस मुद्दे पर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि इन अवैध यूनिट्स के कारण क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ा, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की।

अब जब मामला सामने आया है, तो लोगों की मांग है कि:

  • जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो
  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं

🛑 प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

यह मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ अवैध यूनिट्स पर कार्रवाई करनी है, तो दूसरी तरफ यह भी जांच करनी है कि सिस्टम में कहां चूक हुई।

अगर जांच में यह साबित होता है कि नियमों की अनदेखी कर कनेक्शन दिए गए, तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।

🔶 आगे क्या? बड़े खुलासों के आसार

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में जल्द ही उच्च स्तर की जांच बैठ सकती है। इसमें यह देखा जाएगा कि:

  • किन अधिकारियों ने कनेक्शन मंजूर किए
  • क्या दस्तावेजों की सही तरीके से जांच हुई थी
  • क्या किसी तरह का दबाव या प्रभाव काम कर रहा था

📢 संदेश साफ—अब नहीं चलेगी लापरवाही

हरिद्वार में अवैध यूनिट्स और उन्हें मिले बिजली कनेक्शन का यह मामला साफ संकेत देता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी खामी है।

अब जरूरत है पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई की, ताकि भविष्य में कोई भी अवैध गतिविधि प्रशासन की आंखों के सामने न पनप सके।

“क्या अवैध यूनिट्स को बिजली देने वालों पर भी गिर सकती गाज” — यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश बनकर सामने आ रहा है।

Related Articles

Back to top button