दिल्ली में आधुनिक पार्किंग तकनीक का अध्ययन,, ब्रिडकुल की टीम ने इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्किंग प्रणालियों का किया निरीक्षण,, हरिद्वार, रुड़की और नैनीताल में बनने वाली परियोजनाओं के लिए जुटाई तकनीकी जानकारी

इन्तजार रजा हरिद्वार- दिल्ली में आधुनिक पार्किंग तकनीक का अध्ययन,,
ब्रिडकुल की टीम ने इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्किंग प्रणालियों का किया निरीक्षण,,
हरिद्वार, रुड़की और नैनीताल में बनने वाली परियोजनाओं के लिए जुटाई तकनीकी जानकारी
शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती वाहनों की संख्या और सीमित भूमि के कारण पार्किंग की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए अब आधुनिक तकनीक आधारित इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्किंग प्रणालियों को प्रभावी समाधान माना जा रहा है। इसी दिशा में उत्तराखंड सरकार की निर्माण एजेंसी ब्रिडकुल (BRIDCUL) की एक तकनीकी टीम ने दिल्ली में निर्मित विभिन्न इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्किंग स्थलों का निरीक्षण किया।
यह निरीक्षण 5 अप्रैल 2026 से 6 अप्रैल 2026 के बीच किया गया। इस दौरान टीम ने दिल्ली में विभिन्न कंपनियों द्वारा विकसित और संचालित पार्किंग प्रणालियों का विस्तृत अध्ययन किया और उनकी कार्यप्रणाली, क्षमता, सुरक्षा और संचालन व्यवस्था का गहन अवलोकन किया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के शहरों में प्रस्तावित पार्किंग परियोजनाओं के लिए सर्वोत्तम तकनीक और प्रबंधन प्रणाली का चयन करना था।
चार प्रमुख आधुनिक पार्किंग प्रणालियों का किया गया अध्ययन
निरीक्षण के दौरान ब्रिडकुल की टीम ने चार प्रमुख इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्किंग प्रणालियों का तकनीकी अध्ययन किया। इन प्रणालियों को विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में सीमित भूमि में अधिक वाहनों को पार्क करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
सबसे पहले टीम ने टॉवर पार्किंग सिस्टम (Tower Parking System) का निरीक्षण किया। यह एक ऊर्ध्वाधर संरचना आधारित पार्किंग प्रणाली है, जिसमें वाहन एक टॉवर जैसी संरचना में अलग-अलग स्तरों पर पार्क किए जाते हैं। इसमें ऑटोमेटेड लिफ्ट और प्लेटफॉर्म की मदद से वाहन ऊपर-नीचे ले जाए जाते हैं। इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह बहुत कम जमीन पर बड़ी संख्या में वाहनों की पार्किंग की सुविधा प्रदान करती है।
इसके बाद पज़ल पार्किंग सिस्टम (Puzzle Parking System) का अवलोकन किया गया। इस प्रणाली में वाहनों को एक ग्रिड संरचना में रखा जाता है और प्लेटफॉर्म को स्लाइड करके वाहन को बाहर निकाला जाता है। यह प्रणाली विशेष रूप से मध्यम आकार के व्यावसायिक परिसरों और अपार्टमेंट क्षेत्रों में काफी उपयोगी मानी जाती है।
तीसरी प्रणाली स्टैकर पार्किंग सिस्टम (Stacker Parking System) है। इसमें एक वाहन के ऊपर दूसरे वाहन को पार्क करने की व्यवस्था होती है। यह प्रणाली आमतौर पर छोटी पार्किंग जगहों, होटल परिसरों और आवासीय भवनों में इस्तेमाल की जाती है और कम लागत में पार्किंग क्षमता बढ़ाने का विकल्प प्रदान करती है।
चौथी प्रणाली रोटरी पार्किंग सिस्टम (Rotary Parking System) है। इसमें वाहन गोलाकार ढांचे में ऊपर-नीचे घूमते हुए पार्क किए जाते हैं। यह प्रणाली पूरी तरह स्वचालित होती है और बहुत कम जगह में बड़ी संख्या में वाहनों की पार्किंग संभव बनाती है।
निरीक्षण के दौरान इन सभी प्रणालियों के संचालन, सुरक्षा मानकों, रख-रखाव की प्रक्रिया और तकनीकी आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
पारंपरिक पार्किंग से 3 से 5 गुना अधिक क्षमता
विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्किंग प्रणालियां पारंपरिक पार्किंग व्यवस्था की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावी साबित हो रही हैं। सामान्य पार्किंग में जितनी भूमि पर 20 वाहन पार्क हो सकते हैं, उसी स्थान पर इन आधुनिक प्रणालियों की मदद से लगभग 60 से 100 वाहन पार्क किए जा सकते हैं।
इसका सीधा लाभ शहरों में भूमि उपयोग की दक्षता बढ़ाने में मिलता है। इसके साथ ही सड़कों पर अवैध या अव्यवस्थित पार्किंग कम होती है, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम हो सकती है।
इन प्रणालियों का एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ यह है कि पार्किंग प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित होती है। वाहन को प्लेटफॉर्म पर खड़ा करने के बाद पूरी प्रक्रिया मशीनों द्वारा संचालित होती है, जिससे दुर्घटना या वाहन क्षति की संभावना काफी कम हो जाती है।
इसके अलावा वाहन पार्क करने और निकालने में भी कम समय लगता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को अधिक सुविधा मिलती है।
हरिद्वार, रुड़की और नैनीताल में बनेंगी आधुनिक पार्किंग परियोजनाएं
ब्रिडकुल को उत्तराखंड के तीन प्रमुख शहरों – हरिद्वार, रुड़की और नैनीताल – में इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्किंग परियोजनाओं के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन शहरों में बढ़ती वाहनों की संख्या और सीमित शहरी भूमि के कारण पार्किंग की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर हरिद्वार जैसे धार्मिक शहर में त्योहारों और यात्रा सीजन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने से पार्किंग व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है।
इसी प्रकार रुड़की में शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं नैनीताल जैसे पर्यटन स्थल पर पर्यटक सीजन के दौरान पार्किंग की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।
इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने आधुनिक तकनीक आधारित पार्किंग परियोजनाओं को विकसित करने की योजना बनाई है।
दिल्ली में किए गए इस निरीक्षण का उद्देश्य इन परियोजनाओं के लिए उपयुक्त तकनीक और संचालन मॉडल का चयन करना था, ताकि भविष्य में इन शहरों में स्मार्ट और व्यवस्थित पार्किंग प्रणाली विकसित की जा सके।
ब्रिडकुल की तकनीकी टीम ने किया निरीक्षण
दिल्ली में किए गए इस निरीक्षण में ब्रिडकुल के चार तकनीकी अधिकारियों की टीम शामिल रही। टीम का नेतृत्व इंजीनियर अभिषेक भारद्वाज, आवासीय अभियंता (विद्युत/यांत्रिक) ने किया।
निरीक्षण दल में शामिल अन्य सदस्य थे –
- इंजीनियर वाजिद अली, आवासीय अभियंता (सिविल)
- इंजीनियर चंद्रकांत बड़ौनी, कनिष्ठ अभियंता (विद्युत/यांत्रिक)
- इंजीनियर उपेंद्र सिंह रावत, कनिष्ठ अभियंता (विद्युत/यांत्रिक)
टीम ने विभिन्न कंपनियों द्वारा स्थापित पार्किंग प्रणालियों का निरीक्षण करते हुए उनकी संरचना, तकनीकी विशेषताओं और संचालन व्यवस्था का गहन अध्ययन किया।
शहरी क्षेत्रों के लिए प्रभावी समाधान : अभिषेक भारद्वाज
निरीक्षण दल के नेतृत्वकर्ता इंजीनियर अभिषेक भारद्वाज ने बताया कि इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्किंग प्रणाली तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में भूमि की कमी की समस्या का एक प्रभावी समाधान है।
उन्होंने कहा कि इन प्रणालियों की मदद से सीमित स्थान में अधिक वाहनों की पार्किंग संभव होती है, जिससे शहरी भूमि का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है।
उनके अनुसार यह प्रणाली पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी लाभकारी है। क्योंकि इससे सड़क किनारे होने वाली अव्यवस्थित पार्किंग कम होती है, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य की परियोजनाओं में इस प्रकार की आधुनिक तकनीकों को अपनाना शहरों के बेहतर प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भविष्य की परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा निरीक्षण
ब्रिडकुल द्वारा किया गया यह तकनीकी निरीक्षण आगामी परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि उत्तराखंड के शहरों में बनने वाली पार्किंग परियोजनाएं आधुनिक, सुरक्षित और प्रभावी हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट शहरों के विकास के साथ-साथ इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्किंग प्रणालियों की मांग तेजी से बढ़ेगी।
यदि हरिद्वार, रुड़की और नैनीताल जैसे शहरों में इन आधुनिक पार्किंग व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो इससे न केवल पार्किंग समस्या का समाधान होगा बल्कि शहरों की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी।
इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि भविष्य की परियोजनाओं में सर्वोत्तम तकनीक, सुरक्षा मानक और प्रबंधन प्रणाली को अपनाते हुए शहरी क्षेत्रों में आधुनिक पार्किंग समाधान उपलब्ध कराए जा सकें।



