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सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने किया बाल देखरेख संस्थान कनखल का निरीक्षण,, बच्चों की शिक्षा, भविष्य और रचनात्मकता पर दिया विशेष जोर,, क्राफ्ट आइटमों को सरस बाजार में बिक्री हेतु उपलब्ध कराने के निर्देश

इन्तजार रजा हरिद्वार- सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने किया बाल देखरेख संस्थान कनखल का निरीक्षण,,
बच्चों की शिक्षा, भविष्य और रचनात्मकता पर दिया विशेष जोर,,
क्राफ्ट आइटमों को सरस बाजार में बिक्री हेतु उपलब्ध कराने के निर्देश

हरिद्वार, 11 नवंबर 2025।
जिला बाल संरक्षण समिति की ओर से संचालित बाल देखरेख संस्थान (खुला आश्रय गृह), कनखल का सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संस्थान के सभी कर्मचारी और कुल 22 बच्चे उपस्थित पाए गए।
इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदोरिया, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रियबंधू, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनु शर्मा सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास

निरीक्षण के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदोरिया ने मुख्य विकास अधिकारी को संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में रहने वाले बच्चों को सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित किया गया है ताकि वे सामान्य बच्चों की तरह पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बन सकें।
संस्थान में बच्चों को भिक्षावृत्ति, बाल श्रम और अन्य कुप्रथाओं से दूर रखते हुए उनके समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए नियमित रूप से शिक्षा, खेल, कला और व्यक्तित्व विकास से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

सीडीओ ने बच्चों से किया संवाद, दिया प्रेरक व्याख्यान

निरीक्षण के दौरान सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने बच्चों से उनके भविष्य के सपनों और योजनाओं के बारे में बातचीत की। उन्होंने बच्चों को बताया कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर किया जा सकता है।
डॉ. मिश्रा ने बच्चों से कहा—

“हर बच्चा अपने भीतर अपार प्रतिभा रखता है। जरूरत है उसे पहचानने और सही दिशा में आगे बढ़ने की।”

इस मौके पर बच्चों ने “चिड़िया उड़ी” नामक कविता का सुमधुर पाठ प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित सभी अतिथियों ने सराहा। सीडीओ ने बच्चों की आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया।

क्राफ्ट आइटमों की सराहना, बिक्री व मान्यता के निर्देश

निरीक्षण के दौरान बच्चों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प व क्राफ्ट आइटमों का मुख्य विकास अधिकारी ने बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्य न केवल बच्चों के कौशल को बढ़ाते हैं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
डॉ. मिश्रा ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश दिए कि—

  1. बच्चों के लिए बेहतर सामग्रियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  2. बच्चों द्वारा बनाए गए क्राफ्ट आइटमों को सरस बाजार में बिक्री हेतु प्रदर्शित किया जाए।
  3. उनके कार्यों को मान्यता व उचित मूल्यांकन दिलाने के लिए जिला प्रशासन स्तर पर पहल की जाए।

उन्होंने कहा कि बच्चों की बनाई चीजें अगर बाजार तक पहुंचेंगी, तो उन्हें आत्मविश्वास के साथ-साथ आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलेगा, जिससे वे भविष्य में स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित होंगे।

खाद्य गुणवत्ता और अनुशासन पर सख्त निर्देश

निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने संस्थान में तैयार हो रहे भोजन की गुणवत्ता का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों को स्वच्छ, पौष्टिक और रोस्टर के अनुसार भोजन ही प्रदान किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
साथ ही, संस्थान के कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि बच्चों की दिनचर्या अनुशासनपूर्वक संचालित की जाए और समय-समय पर मानसिक स्वास्थ्य परामर्श (काउंसलिंग) की सुविधा भी सुनिश्चित की जाए।

संवेदनशील प्रशासन की मिसाल

निरीक्षण के अंत में मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि बाल देखरेख संस्थान समाज के उन बच्चों के लिए आशा की किरण है, जो कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए भी कुछ करने का हौसला रखते हैं। उन्होंने बाल कल्याण समिति और जिला प्रोबेशन अधिकारी की टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि—

“हर बच्चा हमारा भविष्य है, उनका संरक्षण और विकास प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”

उन्होंने आगे कहा कि जिला प्रशासन भविष्य में भी ऐसे संस्थानों का समय-समय पर निरीक्षण करता रहेगा ताकि बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा या कमी का सामना न करना पड़े।

उपस्थित अधिकारियों ने दी प्रेरणा

कार्यक्रम के दौरान बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रियबंधू और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनु शर्मा ने भी बच्चों को मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी की राह पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और समाज के हर वर्ग को उनके लिए सहयोगी बनना चाहिए।मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्रा का यह निरीक्षण न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया थी, बल्कि बच्चों के उज्जवल भविष्य की दिशा में उठाया गया संवेदनशील कदम भी था।
संस्थान के बच्चों में जहां इस दौरान उत्साह देखने को मिला, वहीं अधिकारियों की प्रेरक बातों ने उनके भीतर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया।
हरिद्वार जिला प्रशासन के इस प्रयास ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि संवेदनशील शासन ही सशक्त समाज की नींव है।

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