अपराधअलर्टइन्वेस्टिगेशनउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरेंऑपरेशन कालनेमिखुलासागबनघोटालाधर्म और आस्थानिरीक्षणनिलंबितन्यायपॉलिटिकल तड़काप्रतिबंधितप्रशासनवक्फ बोर्ड उत्तराखंडसमीक्षा बैठक

दरगाह साबिर पाक में “साफ़-सफ़ाई” और व्यवस्थाओ को लेकर सीईओ मौ.आरिफ ने की समीक्षा बैठक, कहीं निलंबित गोलक गबन कांड में भीतर ही भीतर बड़ा सियासी खेल तो नहीं खेल गए एम्पायर? गोलक गबन कांड के निलंबित आरोपियों के चेहरों पर लौटी मुस्कान, नए CEO के आते ही निलंबितो के बदले सुर,, जांच कमेटी बनी, लेकिन आरोपी दफ्तर में सक्रिय—क्या प्रभावित होगी निष्पक्ष जांच? बैठक में भी ज्येष्ठ कुर्सी से हलचल बढ़ी 

इन्तजार रजा हरिद्वार- दरगाह साबिर पाक में “साफ़-सफ़ाई” और व्यवस्थाओ को लेकर सीईओ मौ.आरिफ ने की समीक्षा बैठक, कहीं निलंबित गोलक गबन कांड में भीतर ही भीतर बड़ा सियासी खेल तो नहीं खेल गए एम्पायर?

गोलक गबन कांड के निलंबित आरोपियों के चेहरों पर लौटी मुस्कान, नए CEO के आते ही निलंबितो के बदले सुर,,

जांच कमेटी बनी, लेकिन आरोपी दफ्तर में सक्रिय—क्या प्रभावित होगी निष्पक्ष जांच? बैठक में भी ज्येष्ठ कुर्सी से हलचल बढ़ी 

पिरान कलियर (हरिद्वार)।
वक़्फ़ दरगाह साबिर पाक पिरान कलियर में 30 जनवरी 2026 को आयोजित एक अहम बैठक ने जहाँ एक ओर बेहतर प्रबंधन, साफ़-सफ़ाई और जायरीन सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए, वहीं दूसरी ओर दरगाह के गलियारों में गोलक गबन कांड को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राज्य सरकार एवं उत्तराखण्ड शासन की अपेक्षाओं के क्रम में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) उत्तराखण्ड वक्फ बोर्ड श्री मोहम्मद आरिफ ने दरगाह के समस्त कार्मिकों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के निर्देश दिए। बैठक में जायरीन को “साबरी मेहमान” बताते हुए सम्मानजनक व्यवहार, साफ-सफाई, पेयजल, प्याऊ, वजूखाना, ड्रेस कोड, शिकायत पेटिका, ऑनलाइन भुगतान, रैन बसेरा और नौचंदी जुमेरात पर विशेष इंतजामों की लंबी सूची गिनाई गई।

लेकिन असल सवाल यह है कि जब मंच पर सुधारों की बातें हो रही थीं, उसी वक्त गोलक गबन कांड में निलंबित कर्मचारियों के चेहरों पर मुस्कान क्यों लौट आई? क्या नए CEO के आने से किसी “बड़े उलटफेर” की पटकथा लिखी जा रही है?

निलंबित आरोपी फिर सक्रिय? दफ्तर से दूर रखने की मांग

दरगाह से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गोलक गबन कांड में जिन कर्मचारियों पर गंभीर आरोप हैं और जो निलंबित बताए जा रहे हैं, वे कथित तौर पर फिर से दफ्तर के आसपास सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति न केवल जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, बल्कि फाइलों में हेरफेर और प्रपत्रों के “उथल-पुथल” की आशंका भी बढ़ाती है।

कई कर्मचारियों का कहना है कि जांच कमेटी गठित होने के बावजूद यदि आरोपी कार्यालयी दायरे में बने रहते हैं, तो जांच कैसे स्वतंत्र और पारदर्शी रह पाएगी? क्या यह नियमों की खुली अनदेखी नहीं है?

मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा मामला

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब दरगाह के एक कर्मचारी मानवाधिकार आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। आयोग में प्रस्तुत आख्या में बताया गया कि प्रकरण में जांच समिति का गठन किया गया है और जांच शीघ्र पूरी की जाएगी। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए कि शिकायतकर्ता को आख्या की प्रति भेजी जाए और प्रबंधक/तहसीलदार दरगाह पिरान कलियर नियत तिथि तक की गई कार्यवाही की अद्यतन स्थिति आयोग को अवगत कराएं।

आयोग ने पत्रावली दिनांक 16.03.2026 को पेश करने के निर्देश भी दिए हैं। सवाल यह है कि जब मामला आयोग के संज्ञान में है, तब भी आरोपित कर्मचारियों को कथित तौर पर राहत कैसे मिल रही है?

तीन सदस्यीय समिति—पारदर्शिता या ?

CEO द्वारा दरगाह की बाह्य व्यवस्थाओं के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने की बात कही गई, जिसमें राज्य हज समिति के अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत पिरान कलियर के अधिशासी अधिकारी और दरगाह सुपरवाइजर इन्तेखाब आलम को शामिल किया गया। समिति को साफ-सफाई, पेयजल, अतिक्रमण, कूड़ा स्थल, गड्ढों और विद्युत व्यवस्था पर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

“मैं CEO हूँ, पर खादिम बनकर काम करूंगा”……………..

CEO मोहम्मद आरिफ का यह कहना कि वे दरगाह में खादिम की तरह काम करेंगे, सुनने में विनम्र है, लेकिन कर्मचारियों और जायरीन के बीच चर्चा है कि क्या यह कथन ज़मीनी हकीकत में भी उतरेगा?
या फिर यह बयान सिर्फ़ माहौल को नरम करने और कुछ पुराने मामलों पर परदा डालने की कोशिश है? आने वाला समय खुद इसकी पुष्टि कर ही देगा,,    बैठक में प्याऊ, डस्टबिन, कूड़ा उठाने के वाहन, शिकायत पेटिका, ऑनलाइन भुगतान और रैन बसेरा जैसी सुविधाओं की घोषणाएँ ज़रूर की गईं, लेकिन नये सीईओ साहब का गोलक गबन जैसे गंभीर आर्थिक अपराध पर कोई ठोस सार्वजनिक वक्तव्य या सख़्त रुख सामने नहीं आया।

यही कारण है कि अब जायरीन ही नहीं, स्थानीय लोग भी पूछ रहे हैं—
क्या दरगाह में सुधार सिर्फ़ दिखावे तक सीमित रहेगा, या जवाबदेही भी तय होगी?

अब निगाहें 16 मार्च पर

फिलहाल, सभी की निगाहें 16 मार्च 2026 पर टिकी हैं, जब मानवाधिकार आयोग के समक्ष पत्रावली पेश होनी है। देखना यह होगा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में सच सामने आता है या फिर फाइलों में कोई “चमत्कार” हो जाता है।

दरगाह साबिर पाक आस्था का केंद्र है, लेकिन आस्था के नाम पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अब ज़रूरत है साफ़ नीयत, सख़्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच की—वरना सवाल और शक दोनों और गहराते जाएंगे।

Related Articles

Back to top button