डिलीवरी के बाद महिला लेखपाल की मौत,, तीन चिकित्सकों पर लापरवाही का मुकदमा दर्ज,, लेखपाल संघ का आक्रोश, निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी की मांग,, नॉर्मल डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत, समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप,, कार्डियक अरेस्ट का तर्क और विशेषज्ञ न बुलाने पर सवाल,, गिरफ्तारी और अस्पताल सील करने की मांग
डिलीवरी के बाद महिला लेखपाल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने हरिद्वार जनपद में हड़कंप मचा दिया है। कोतवाली गंगनहर पुलिस ने मृतका के पति की तहरीर पर रुड़की स्थित डॉक्टर शिरोमणि हॉस्पिटल के तीन चिकित्सकों के खिलाफ उपचार में लापरवाही बरतने का मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामला सामने आने के बाद न केवल पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ है, बल्कि उत्तराखण्ड लेखपाल संघ ने भी इसे गंभीर चिकित्सीय लापरवाही बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इन्तजार रजा हरिद्वार- डिलीवरी के बाद महिला लेखपाल की मौत,,
तीन चिकित्सकों पर लापरवाही का मुकदमा दर्ज,,
लेखपाल संघ का आक्रोश, निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी की मांग,,
नॉर्मल डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत, समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप,,
कार्डियक अरेस्ट का तर्क और विशेषज्ञ न बुलाने पर सवाल,,
गिरफ्तारी और अस्पताल सील करने की मांग

रुड़की।
डिलीवरी के बाद महिला लेखपाल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने हरिद्वार जनपद में हड़कंप मचा दिया है। कोतवाली गंगनहर पुलिस ने मृतका के पति की तहरीर पर रुड़की स्थित डॉक्टर शिरोमणि हॉस्पिटल के तीन चिकित्सकों के खिलाफ उपचार में लापरवाही बरतने का मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामला सामने आने के बाद न केवल पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ है, बल्कि उत्तराखण्ड लेखपाल संघ ने भी इसे गंभीर चिकित्सीय लापरवाही बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
नॉर्मल डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत, समय पर नहीं मिला उपचार
प्राप्त जानकारी के अनुसार नेहरू नगर निवासी पंकज कुमार पुत्र शमशेर सिंह, जो स्वयं राजस्व उप निरीक्षक हैं, ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी पत्नी मोनिका भावे (राजस्व उप निरीक्षक/लेखपाल), जो हरिद्वार तहसील के एक गांव में तैनात थीं, को 25 दिसंबर 2025 को डिलीवरी के लिए नेहरू स्टेडियम के पास स्थित डॉक्टर शिरोमणि हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।
शाम करीब 4:20 बजे डॉक्टर पूनम गुप्ता और उनके स्टाफ द्वारा नॉर्मल डिलीवरी कराई गई, जिसमें एक पुत्री का जन्म हुआ। डिलीवरी के बाद मोनिका को लेबर रूम से रूम नंबर 101 में शिफ्ट कर दिया गया। आरोप है कि इसके कुछ ही समय बाद मोनिका की हालत अचानक बिगड़ने लगी और वह असहनीय दर्द से कराहने लगीं।
पंकज कुमार का आरोप है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद डॉक्टर पूनम गुप्ता उन्हें देखने नहीं आईं। काफी देर बाद दो नर्सें आईं और स्थिति गंभीर बताकर डॉक्टर को सूचना दी। इसके बाद डॉक्टर पूनम गुप्ता मौके पर पहुंचीं और मोनिका को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, जहां डॉक्टर संजय कंसल, डॉक्टर आशीष गुप्ता और एक अन्य महिला चिकित्सक को भी बुलाया गया।
रेफर करने से पहले की गई कथित जबरदस्ती, बाउंसरों पर गंभीर आरोप
तहरीर में पंकज कुमार ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने पत्नी की गंभीर हालत को देखते हुए उच्च केंद्र (हायर सेंटर) रेफर करने की बात कही तो उन्हें नजरअंदाज किया गया। करीब दो घंटे बाद, जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तब अस्पताल प्रबंधन ने खुद एंबुलेंस बुलाकर उनकी पत्नी को जबरन ज्वालापुर स्थित भूमानंद अस्पताल रेफर कर दिया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब पंकज कुमार ने डॉक्टर पूनम गुप्ता से पत्नी की हालत के बारे में जानकारी लेनी चाही तो अस्पताल में तैनात बाउंसरों को बुला लिया गया। आरोप है कि बाउंसरों ने पिस्तौल दिखाकर उन्हें धमकाया और दबाव बनाकर एंबुलेंस में बैठने को मजबूर किया।
भूमानंद अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित
पंकज कुमार के अनुसार शाम करीब 7:50 बजे जब वे अपनी पत्नी को लेकर भूमानंद अस्पताल पहुंचे, तो वहां के चिकित्सकों ने एंबुलेंस में ही मोनिका को मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों ने कुछ प्रयास जरूर किए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद ज्वालापुर पुलिस को सूचना दी गई और हरमिलाप मिशन राजकीय अस्पताल, हरिद्वार में पोस्टमार्टम कराया गया।
मृतका के पति का स्पष्ट आरोप है कि डॉक्टर पूनम गुप्ता और अन्य सहयोगी चिकित्सकों की जानबूझकर की गई लापरवाही, सही स्थिति न बताने और समय पर उचित उपचार न देने के कारण उनकी पत्नी की मौत हुई।
तीन चिकित्सकों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
मामले में तहरीर मिलने के बाद कोतवाली गंगनहर पुलिस ने डॉक्टर पूनम गुप्ता, डॉक्टर संजय कंसल और एक अन्य चिकित्सक के खिलाफ उपचार में लापरवाही की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। कोतवाली प्रभारी मनोहर भंडारी ने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रारंभ कर दी गई है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच अधिकारी के रूप में निरीक्षक राजीव उनियाल को नामित किया गया है।
लेखपाल संघ का फूटा गुस्सा, संयुक्त जांच पर उठाए सवाल
मामले को लेकर उत्तराखण्ड लेखपाल संघ, शाखा जनपद हरिद्वार की 29 दिसंबर 2025 को रुड़की तहसील स्थित लेखपाल सभागार में आकस्मिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से डॉक्टरों की कथित लापरवाही की घोर निंदा की गई और कई गंभीर सवाल उठाए गए।
संघ का आरोप है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा गठित संयुक्त जांच आख्या संदिग्ध है। जांच में जिन तीन चिकित्सकों के हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं, उनमें से केवल एक चिकित्सक की मौके पर उपस्थिति बताई गई है, जबकि अन्य दो चिकित्सकों के हस्ताक्षर कैसे हुए, यह स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा जांच रिपोर्ट में यह भी गलत उल्लेख किया गया कि मरीज को आशा कार्यकर्ता द्वारा अस्पताल लाया गया, जबकि वास्तविकता कुछ और है।
कार्डियक अरेस्ट का तर्क और विशेषज्ञ न बुलाने पर सवाल
संघ ने यह भी सवाल उठाया कि जब डॉक्टर पूनम गुप्ता ने अपने बयान में मृत्यु का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया है, तो उस स्थिति में किसी हृदय रोग विशेषज्ञ को मौके पर क्यों नहीं बुलाया गया। यह तथ्य भी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं किया गया है। प्रोग्रेस शीट में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर संजय कंसल सहित अन्य चिकित्सकों की उपस्थिति दर्शाई गई है, जिससे जांच में विरोधाभास और गहरा जाता है।
गिरफ्तारी और अस्पताल सील करने की मांग
लेखपाल संघ ने जिलाधिकारी हरिद्वार को ज्ञापन भेजते हुए मांग की है कि प्रकरण में निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की नई संयुक्त टीम गठित की जाए। साथ ही, एफआईआर संख्या 0649 दिनांक 29.12.2025 के तहत नामजद डॉक्टरों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए।
इसके अलावा, अस्पताल में सशस्त्र बाउंसरों की तैनाती को गंभीर अपराध बताते हुए उनके शस्त्र लाइसेंस तत्काल निरस्त करने और पूर्व में भी विवादों में रहे डॉक्टर शिरोमणि हॉस्पिटल को सील करने की मांग की गई है।
प्रशासन और पुलिस पर टिकी निगाहें
कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार महिला लेखपाल मोनिका भावे की मौत को न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राजस्व विभाग के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और दोषियों पर कब तक सख्त कार्रवाई की जाती है।



