शासकीय आवास पर गढ़वाल राइफल्स के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. राणा की शिष्टाचार भेंट,, समसामयिक विषयों, राष्ट्रीय सुरक्षा और उत्तराखंड की भूमिका पर हुई सार्थक चर्चा,, सेना–प्रशासन समन्वय, युवाओं में सैन्य भावना और राष्ट्रनिर्माण पर विशेष संवाद
इन्तजार रजा हरिद्वार- शासकीय आवास पर गढ़वाल राइफल्स के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. राणा की शिष्टाचार भेंट,,
समसामयिक विषयों, राष्ट्रीय सुरक्षा और उत्तराखंड की भूमिका पर हुई सार्थक चर्चा,,
सेना–प्रशासन समन्वय, युवाओं में सैन्य भावना और राष्ट्रनिर्माण पर विशेष संवाद

हरिद्वार।
शासकीय आवास पर गढ़वाल राइफल्स के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट एवं भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. राणा ने शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात न केवल औपचारिक थी, बल्कि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, समसामयिक परिस्थितियों, उत्तराखंड की सामरिक भूमिका, युवाओं में सैन्य चेतना और राष्ट्रनिर्माण जैसे अहम विषयों पर गहन एवं सार्थक चर्चा की गई।
लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. राणा का यह दौरा विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि गढ़वाल राइफल्स का उत्तराखंड से ऐतिहासिक और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। राज्य के हजारों युवाओं ने इस गौरवशाली रेजिमेंट के माध्यम से देश की सेवा की है और बलिदान की परंपरा को आगे बढ़ाया है।
गढ़वाल राइफल्स की गौरवशाली परंपरा पर चर्चा
भेंट के दौरान गढ़वाल राइफल्स की वीरता, अनुशासन और बलिदान की परंपरा पर विशेष चर्चा हुई। लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. राणा ने कहा कि गढ़वाल राइफल्स केवल एक सैन्य इकाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस रेजिमेंट ने हर युद्ध और हर चुनौती में राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज के बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में सेना की भूमिका और अधिक जिम्मेदारीपूर्ण हो गई है। ऐसे में सेना और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
समसामयिक विषयों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंथन
मुलाकात के दौरान देश और दुनिया में चल रही समसामयिक घटनाओं, सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति, आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। लेफ्टिनेंट जनरल राणा ने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तकनीक, सूचना और साइबर स्पेस भी आज की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
उन्होंने उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य की रणनीतिक और भौगोलिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में भी सेना की भूमिका हमेशा सराहनीय रही है।
युवाओं में सैन्य भावना और राष्ट्रप्रेम पर जोर
इस अवसर पर युवाओं को सेना से जोड़ने और उनमें राष्ट्रप्रेम, अनुशासन एवं सेवा भावना विकसित करने पर भी विशेष चर्चा हुई। लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. राणा ने कहा कि उत्तराखंड का युवा सदैव से सेना की रीढ़ रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें सही मार्गदर्शन, प्रेरणा और अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि वे देश सेवा के लिए आगे आ सकें।
उन्होंने एनसीसी, सेना भर्ती से जुड़े कार्यक्रमों और युवाओं के लिए प्रेरणादायी संवादों को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सेना और समाज के बीच मजबूत संवाद की आवश्यकता
भेंट के दौरान इस बात पर भी सहमति बनी कि सेना और समाज के बीच संवाद और विश्वास को और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए। सेना केवल सीमाओं पर तैनात संस्था नहीं, बल्कि समाज का अभिन्न अंग है। आपदा, महामारी या किसी भी राष्ट्रीय संकट के समय सेना ने हमेशा आगे बढ़कर नागरिकों की सहायता की है।
लेफ्टिनेंट जनरल राणा ने कहा कि ऐसे संवाद न केवल आपसी समझ को बढ़ाते हैं, बल्कि राष्ट्रहित में बेहतर निर्णय लेने की दिशा में भी सहायक होते हैं।
गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई मुलाकात
शासकीय आवास पर यह भेंट अत्यंत सौहार्दपूर्ण और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। अंत में दोनों पक्षों ने भविष्य में भी इस प्रकार के विचार-विमर्श और सहयोग को निरंतर बनाए रखने की बात कही। लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. राणा का यह दौरा निश्चित रूप से सेना–प्रशासन समन्वय और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश देने वाला रहा।
यह मुलाकात न केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित रही, बल्कि इससे यह स्पष्ट संदेश भी गया कि देश की सुरक्षा, युवाओं का भविष्य और समाज की मजबूती सभी साझा प्रयासों से ही संभव है।



