मूक-बधिर बेटी ने सुनाई और सुनी दुनिया की आवाज़,, कोक्लियर इम्प्लांट के बाद खुशी गुप्ता ने बोले जीवन के पहले शब्द,, “थैंक्यू योगी जी” सुनकर भावुक हुआ परिवार, योगी सरकार की सरकारी योजना बनी संजीवनी,, थैंक्यू सीएम योगी आदित्यनाथ की योगी सरकार

इन्तजार रजा हरिद्वार- मूक-बधिर बेटी ने सुनाई और सुनी दुनिया की आवाज़,,
कोक्लियर इम्प्लांट के बाद खुशी गुप्ता ने बोले जीवन के पहले शब्द,,
“थैंक्यू योगी जी” सुनकर भावुक हुआ परिवार, योगी सरकार की सरकारी योजना बनी संजीवनी,, थैंक्यू सीएम योगी आदित्यनाथ की योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के कानपुर की 19 वर्षीय खुशी गुप्ता की जिंदगी में 26 जनवरी 2026 का दिन हमेशा के लिए ऐतिहासिक बन गया। जन्म से मूक-बधिर रही खुशी ने कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद पहली बार दुनिया की आवाज़ सुनी और अपने जीवन के पहले शब्द बोले। ऑपरेशन के बाद उनके मुंह से निकले पहले शब्द “थैंक्यू योगी जी” थे, जिन्हें सुनते ही पूरा परिवार भावुक हो उठा। यह सिर्फ एक मेडिकल सफलता नहीं बल्कि एक बेटी के सपनों और उम्मीदों के फिर से जन्म लेने की कहानी बन गई है।
90 किलोमीटर का संघर्ष और मुख्यमंत्री से मुलाकात ने बदली किस्मत
खुशी गुप्ता का जीवन शुरू से ही चुनौतियों से भरा रहा। जन्म से ही वह सुन और बोल नहीं पाती थीं, जिससे उनकी पढ़ाई और सामाजिक जीवन काफी प्रभावित हुआ। परिवार आर्थिक रूप से भी इतना सक्षम नहीं था कि महंगा इलाज करवा सके। लेकिन खुशी ने हार नहीं मानी और अपने हुनर को पहचान बनाकर आगे बढ़ने का फैसला किया।
नवंबर 2025 में खुशी ने अपने परिवार के साथ लगभग 90 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान खुशी ने अपनी बनाई एक खूबसूरत पेंटिंग मुख्यमंत्री को भेंट की। पेंटिंग के जरिए उन्होंने अपनी भावनाएं और संघर्ष व्यक्त किया, जिसने मुख्यमंत्री को बेहद प्रभावित किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुशी की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तुरंत अधिकारियों को उनके इलाज, शिक्षा और आवास की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। सरकार की सक्रियता और संवेदनशीलता के चलते खुशी के इलाज की प्रक्रिया तेजी से शुरू हुई। प्रशासनिक स्तर पर मेडिकल जांच करवाई गई और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की तैयारी शुरू की।
आयुष्मान भारत योजना बनी सहारा, 6-7 लाख की सर्जरी हुई सफल
खुशी के इलाज में सबसे बड़ी बाधा आर्थिक थी, क्योंकि कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी का खर्च लगभग 6 से 7 लाख रुपये तक आता है। लेकिन आयुष्मान भारत योजना और सरकारी सहायता ने इस मुश्किल को आसान बना दिया। इसी योजना के तहत खुशी की सर्जरी का पूरा खर्च वहन किया गया।
26 जनवरी 2026 को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक खुशी का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद जब खुशी ने पहली बार आवाज़ सुनी, तो वह भावुक हो गईं। डॉक्टरों और परिवार के लोगों की मौजूदगी में उन्होंने धीरे-धीरे बोलने की कोशिश की और उनके मुंह से पहला शब्द “थैंक्यू योगी जी” निकला। इस पल ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।
डॉक्टरों के मुताबिक, कोक्लियर इम्प्लांट एक आधुनिक तकनीक है, जो ऐसे लोगों को सुनने में मदद करती है, जिनके कान के अंदर के हिस्से में समस्या होती है। इस सर्जरी के बाद मरीज को नियमित स्पीच थेरेपी की जरूरत होती है, जिससे वह धीरे-धीरे सामान्य रूप से बोलना सीखता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि खुशी नियमित थेरेपी जारी रखती हैं, तो अगले एक साल के भीतर वह सामान्य लोगों की तरह बातचीत करने लगेंगी।
पुलिस अफसर बनने का सपना, नई जिंदगी की नई शुरुआत
खुशी गुप्ता का संघर्ष केवल सुनने और बोलने तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपनी जिंदगी को नए लक्ष्य के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। खुशी का सपना भविष्य में पुलिस अफसर बनने का है। उनका मानना है कि उन्होंने जीवन में जो संघर्ष झेला है, उससे उन्हें दूसरों की पीड़ा समझने की ताकत मिली है और वह समाज की सेवा करना चाहती हैं।
खुशी के परिवार ने मुख्यमंत्री और सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यदि समय पर मदद नहीं मिलती, तो उनकी बेटी शायद कभी दुनिया की आवाज़ नहीं सुन पाती। परिवार का कहना है कि यह सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक संवेदनशीलता का उदाहरण है, जिसने उनकी बेटी के जीवन में नई रोशनी लाई है।
यह घटना समाज के लिए भी एक प्रेरणा बनकर सामने आई है। इससे यह संदेश मिलता है कि अगर सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन किया जाए, तो जरूरतमंद लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल सकती है। आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।
खुशी गुप्ता की कहानी संघर्ष, उम्मीद और सरकारी सहयोग की मिसाल बन गई है। एक समय जो बेटी पूरी तरह खामोश दुनिया में जी रही थी, आज वह आवाज़ सुन रही है और अपने सपनों को नई उड़ान देने के लिए तैयार है। उनके जीवन की यह नई शुरुआत सिर्फ उनके परिवार के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणादायक संदेश लेकर आई है।



