उत्तराखंड पुलिस कर्मियों के लिए सम्मानजनक रैंक की मांग,, सेवानिवृत्ति से एक माह पहले एक पद ऊपर सम्मानजनक पद देने का प्रस्ताव,, हरिद्वार के भदौरिया अधिवक्ताओं और कानून के विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री व डीजीपी को भेजा सुझाव
हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट, चेतन भदोरिया (LLB अध्ययनरत), आयुष जायसवाल (LLB अध्ययनरत) और शाहनवाज मलिक (LLB अध्ययनरत) द्वारा एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को भेजा गया

इन्तजार रजा हरिद्वार- उत्तराखंड पुलिस कर्मियों के लिए सम्मानजनक रैंक की मांग,,
सेवानिवृत्ति से एक माह पहले एक पद ऊपर सम्मानजनक पद देने का प्रस्ताव,,
हरिद्वार के भदौरिया अधिवक्ताओं और कानून के विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री व डीजीपी को भेजा सुझाव
हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस के हजारों कर्मचारियों की सेवा परिस्थितियों और सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। हरिद्वार के अधिवक्ता और कानून के विद्यार्थियों के एक समूह ने राज्य सरकार के समक्ष एक प्रस्ताव भेजते हुए मांग की है कि पुलिस कर्मियों को सेवानिवृत्ति से पहले सम्मानजनक पद दिया जाए, ताकि दशकों की सेवा के बाद उन्हें सामाजिक और संस्थागत सम्मान मिल सके।
इस संबंध में हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट, चेतन भदोरिया (LLB अध्ययनरत), आयुष जायसवाल (LLB अध्ययनरत) और शाहनवाज मलिक (LLB अध्ययनरत) द्वारा एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को भेजा गया है।
प्रस्ताव में पुलिस कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति, सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले सीमित सम्मान और उससे उत्पन्न होने वाली मनोवैज्ञानिक समस्याओं को विस्तार से बताया गया है।
दशकों की सेवा के बाद भी कई कर्मी निचले पदों पर ही हो जाते हैं सेवानिवृत्त
प्रस्ताव में बताया गया है कि उत्तराखंड पुलिस में अधिकांश कर्मचारियों की सेवा अवधि लगभग 60 वर्ष तक होती है। सरकारी नियमों के अनुसार 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त होना पड़ता है।
लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि कई पुलिसकर्मी अपने जीवन के लगभग 30 से 35 वर्ष तक सेवा देने के बावजूद बहुत निम्न पदों जैसे हेड कांस्टेबल, एएसआई या एसआई के पद पर ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
कई मामलों में तो पुलिस कर्मी कांस्टेबल के पद से शुरू होकर दशकों तक सेवा देने के बाद भी बिना किसी औपचारिक सम्मान या पदोन्नति के ही सेवा से विदा हो जाते हैं।
प्रस्ताव भेजने वाले अधिवक्ताओं का कहना है कि यह स्थिति न केवल कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित करती है बल्कि उनके सामाजिक सम्मान पर भी असर डालती है।
उनका कहना है कि पुलिस जैसी अनुशासित और चुनौतीपूर्ण सेवा में कार्य करने वाले कर्मचारियों को सेवा समाप्ति के समय सम्मान मिलना बेहद आवश्यक है।
सम्मान की कमी से कर्मचारियों में पैदा होती है उपेक्षा और तनाव की भावना
प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद यदि किसी कर्मचारी को सम्मानजनक पहचान नहीं मिलती, तो उसके मन में स्वयं को कम आंका जाने की भावना पैदा हो जाती है।
ऐसी स्थिति में कई सेवानिवृत्त कर्मियों को यह महसूस होता है कि उनके दशकों के समर्पण और मेहनत को पर्याप्त मान्यता नहीं मिली।
अधिवक्ताओं ने बताया कि सम्मान की कमी से कई प्रकार की मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी सामने आती हैं, जिनमें शामिल हैं—
- स्वयं को उपेक्षित महसूस करना
- भावनात्मक तनाव
- पहचान और प्रतिष्ठा की कमी
- सामाजिक तुलना में कमी का अनुभव
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि सशस्त्र बलों में सेवानिवृत्ति के समय सम्मानजनक रैंक और औपचारिक सम्मान की परंपरा है, जिससे सैनिकों को सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है।
इसके विपरीत कई पुलिस कर्मियों को ऐसा सम्मान नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें असमानता की भावना महसूस होती है।
इसके अलावा, सम्मानजनक पहचान न होने के कारण सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और पेशेवर गतिविधियों में भाग लेने के अवसर भी सीमित हो जाते हैं।
सेवानिवृत्ति से पहले एक पद ऊपर देने का सुझाव
इस समस्या के समाधान के लिए अधिवक्ताओं द्वारा एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि उत्तराखंड पुलिस में कांस्टेबल से लेकर आईजी रैंक तक के सभी कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि से एक माह पूर्व एक पद ऊपर का सम्मानजनक पद दिया जाए।
इस पदोन्नति का उद्देश्य केवल सम्मान देना होगा और इसका कोई वित्तीय या पेंशन संबंधी प्रभाव नहीं होगा।
अर्थात यह पद केवल सम्मानजनक पहचान के लिए होगा, जिससे कर्मचारी अपने करियर के अंत में गर्व और सम्मान के साथ सेवा से विदा ले सकें।
प्रस्ताव से मिलने वाले संभावित लाभ
भदोरिया एसोसिएट्स द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में इस व्यवस्था के कई सकारात्मक प्रभाव भी बताए गए हैं।
इनके अनुसार यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो—
- पुलिस कर्मियों की समर्पित सेवा को औपचारिक मान्यता मिलेगी
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों की गरिमा और आत्मसम्मान में वृद्धि होगी
- राज्य में मजबूत कल्याणकारी संस्कृति विकसित होगी
- कर्मचारियों में संस्थागत सम्मान और गर्व की भावना बढ़ेगी
- सेवा के अंतिम चरण में कर्मियों का मनोबल मजबूत होगा
इसके अलावा सम्मानजनक पद मिलने से सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों को समाज में बेहतर पहचान मिल सकेगी और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ सामाजिक जीवन में सक्रिय रह सकेंगे।
मुख्यमंत्री और डीजीपी से की गई पहल पर विचार की मांग
अधिवक्ताओं और कानून के विद्यार्थियों द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव में राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से इस व्यवस्था को लागू करने पर गंभीरता से विचार करने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा है कि यह कदम केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होगा, बल्कि यह उन हजारों पुलिस कर्मियों के सम्मान से जुड़ा हुआ मुद्दा है जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा कानून व्यवस्था बनाए रखने में समर्पित किया है।
यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है तो यह उत्तराखंड पुलिस के कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी पहल साबित हो सकती है और सेवा के अंतिम चरण में उन्हें सम्मान और गर्व के साथ विदाई देने की परंपरा स्थापित हो सकती है।



