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देवभूमि परिवार योजना को मिली कैबिनेट की मंजूरी,, धामी सरकार ने दिखाई संवेदनशीलता: आपदा सहायता बढ़ाई, संविदा-कर्मी होंगे नियमित,, उपनल कर्मचारियों के लिए उपसमिति गठित, 12 बड़े प्रस्तावों पर लगी मुहर

इन्तजार रजा हरिद्वार- देवभूमि परिवार योजना को मिली कैबिनेट की मंजूरी,,
धामी सरकार ने दिखाई संवेदनशीलता: आपदा सहायता बढ़ाई, संविदा-कर्मी होंगे नियमित,,
उपनल कर्मचारियों के लिए उपसमिति गठित, 12 बड़े प्रस्तावों पर लगी मुहर

देहरादून, 12 नवम्बर 2025 —
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इनमें सबसे प्रमुख निर्णय “देवभूमि परिवार योजना” को लागू करने का रहा। इसके साथ ही आपदा सहायता राशि बढ़ाने, संविदा और तदर्थ कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा उपनल कर्मचारियों के लिए उपसमिति गठित करने जैसे फैसलों पर भी कैबिनेट ने मुहर लगाई।

देवभूमि परिवार योजना: हर परिवार को मिलेगा यूनिक आईडी नंबर

राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘देवभूमि परिवार योजना’ लागू करने का निर्णय लिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुंचे।
सचिव शैलेष बगौली ने बताया कि ग्राम पंचायतों के परिवार रजिस्टर में दर्ज सभी परिवारों की पहचान हेतु एक विशिष्ट परिवार पहचान संख्या (Unique Family ID) बनाई जाएगी।इस योजना से सरकार को एक ही प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी मिल सकेगी कि कौन-सा परिवार किन-किन योजनाओं का लाभ ले रहा है और वह किन योजनाओं के लिए पात्र है। यानी, अब लाभार्थियों को योजनाओं की जानकारी और लाभ “एक क्लिक” में मिल सकेगा।

सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र परिवार योजनाओं से वंचित न रहे।
यह कदम उत्तराखंड को डिजिटल कल्याण शासन (Digital Welfare Governance) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

आपदा सहायता राशि में वृद्धि: संवेदनशील शासन का उदाहरण

कैबिनेट ने आपदा से मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली सहायता राशि को चार लाख से बढ़ाकर पाँच लाख रुपये करने का फैसला किया।
इसी तरह आपदा में क्षतिग्रस्त पक्के मकानों के लिए पाँच लाख रुपये, और कच्चे मकानों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से एक लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता देने का निर्णय हुआ। व्यावसायिक भवनों को हुई क्षति के मामलों में भी “केस टू केस” आधार पर सहायता देने की अनुमति दी गई है।
यह फैसला आपदाग्रस्त परिवारों के लिए सरकार की संवेदनशीलता और तत्परता को दर्शाता है।

संविदा, तदर्थ, दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को मिलेगा स्थायित्व

लंबे समय से राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा, तदर्थ, दैनिक वेतन, अंशकालिक और कार्यप्रभारित कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता भी कैबिनेट ने साफ कर दिया है। जिन कर्मचारियों ने वर्ष 2018 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें नियमित करने का निर्णय लिया गया है।भविष्य के लिए कट ऑफ डेट तय करने हेतु मंत्रिमंडल की एक समिति गठित की जाएगी, जो सभी संबंधित विभागों से चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।यह निर्णय न केवल हजारों कर्मचारियों के भविष्य को स्थायित्व देगा, बल्कि राज्य प्रशासन में कार्यकुशलता और मनोबल भी बढ़ाएगा।

उपनल कर्मचारियों के लिए बनी उपसमिति, दो माह में रिपोर्ट देगी

राज्य में उपनल कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर लंबे समय से चल रहे आंदोलन को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने मंत्रिमंडल उपसमिति गठित करने का निर्णय लिया है।
यह उपसमिति उपनल कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर न्यूनतम वेतन, महंगाई भत्ता और नियमितीकरण से संबंधित प्रस्ताव तैयार करेगी।

उपनल कर्मचारियों के प्रकरणों पर दो माह के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि धामी सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुन रही है और समाधान की दिशा में ठोस प्रयास कर रही है।

शहरी विकास निदेशालय में बनेगी पीएमयू

15वें वित्त आयोग के तहत शहरी क्षेत्रों में लोक स्वास्थ्य सुधार के लिए परियोजना प्रबंधन यूनिट (PMU) का गठन शहरी विकास निदेशालय में किया जाएगा।
इस यूनिट में एक वरिष्ठ चिकित्साधिकारी, एक वित्त नियंत्रक, एक एमआईएस एक्सपर्ट और एक सहायक लेखाकार के पद सृजित किए जाएंगे।

यह इकाई शहरी निकायों में स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी, प्रशिक्षण और वित्तीय पर्यवेक्षण का काम करेगी।
राज्य में यह कदम शहरी क्षेत्रों में लोक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

अन्य कैबिनेट फैसले

कैबिनेट बैठक में लिए गए अन्य निर्णयों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली 2025 में संशोधन कर बीड सिक्योरिटी में इंश्योरेंस सिक्योरिटी बांड को भी मान्यता दी गई।
  • राजकोषीय नियोजन एवं संसाधन निदेशालय में आउटसोर्स आधार पर वाहन चालक का एक अतिरिक्त पद सृजित करने की मंजूरी।
  • कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग में सूचना प्रौद्योगिकी विंग का गठन, जिसमें दो कंप्यूटर प्रोग्रामर और दो सहायक ऑपरेटर नियुक्त होंगे।
  • मधुग्राम योजना के तहत अब 40 प्रतिशत सब्सिडी बागवानी मिशन के माध्यम से दी जाएगी।
  • विधानसभा विशेष सत्र के सत्रावसान की मंजूरी दी गई।
  • उपनल के माध्यम से पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की अनुमति दी गई।
  • उत्तराखंड स्थापना दिवस के रजत जयंती समारोह की सफल आयोजन के लिए आभार प्रस्ताव पारित किया गया।

जनहित और प्रशासनिक सुधार की दिशा में संतुलित कैबिनेट

धामी कैबिनेट के ये फैसले यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि सरकार ने जनकल्याण और प्रशासनिक सुधारों को एक साथ प्राथमिकता दी है।
जहाँ “देवभूमि परिवार योजना” राज्य के हर परिवार को योजनाओं से जोड़ने वाला डिजिटल कदम है, वहीं संविदा कर्मियों और आपदाग्रस्तों के प्रति लिए गए निर्णय सरकार की संवेदनशीलता और जनहितकारी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बैठक उत्तराखंड की प्रशासनिक दक्षता और कर्मचारी कल्याण दोनों के बीच संतुलन साधने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इन निर्णयों से जनता में सरकार की विश्वसनीयता और जवाबदेही और मजबूत होने की संभावना है।

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