डॉलर ने तोड़ा सभी रिकॉर्ड,, भारतीय रुपया दबाव में, बाजार में हड़कंप,, अबकी बार डॉलर 90 पार, अर्थव्यवस्था पर बढ़ी चुनौती
इन्तजार रजा हरिद्वार- डॉलर ने तोड़ा सभी रिकॉर्ड,,
भारतीय रुपया दबाव में, बाजार में हड़कंप,,
अबकी बार डॉलर 90 पार, अर्थव्यवस्था पर बढ़ी चुनौती

रुपये की गिरावट क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार, तीन प्रमुख कारणों ने इस बार रुपये को भारी गिरावट की ओर धकेला—
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बदलाव के संकेत, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी।
- भूराजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने आयात बिल पर अतिरिक्त दबाव डाला।
- विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार शेयर बाज़ार से पूंजी की निकासी, जिसने रुपये के भविष्य को और कमजोर किया।
इसी बीच एशियाई बाजारों में भी हलचल देखी गई है, जहां कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी दबाव में है। लेकिन भारतीय रुपया जिस तेजी से फिसला है, उसने चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सामान्य जनता पर असर
डॉलर 90 के पार पहुंचने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ने वाला है—
- विदेश यात्रा महंगी हो जाएगी।
- विदेशी शिक्षा और फीस में अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
- इलेक्ट्रॉनिक और आयातित सामानों के दाम बढ़ना तय।
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत कच्चा तेल विदेश से खरीदता है।
आयातक कंपनियां पहले से ही बढ़ते खर्च का दबाव महसूस कर रही हैं, जबकि निर्यातक इसे लाभ की स्थिति बताते हैं। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अत्यधिक अस्थिरता लंबे समय में किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह होती है।
सरकार और आरबीआई क्या करेगी?
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि रिज़र्व बैंक (RBI) रुपये को स्थिर करने के लिए आगे हस्तक्षेप कर सकता है। विदेशी मुद्रा भंडार के उपयोग, बांड मार्केट में कदम और ब्याज दरों से जुड़े फैसले संभव हैं। वहीं केंद्र सरकार आयात लागत कम करने और रुपये को सहारा देने के लिए रणनीतिक निर्णय लेने की तैयारी में है।
शेयर बाज़ार पर तगड़ा असर
डॉलर की ऊंचाई का असर शेयर बाजार में साफ दिखा—
- सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी से उतार-चढ़ाव
- आईटी कंपनियों के शेयरों में बढ़त
- बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में दबाव
स्थिति अभी भी संवेदनशील
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में डॉलर और भी मजबूत हो सकता है। वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और विदेशी निवेश की चाल आने वाले समय में रुख तय करेगी।
डॉलर के 90 के पार पहुंचने को देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, और बाजार पर इसका प्रभाव आने वाले हफ्तों में और गहराई से देखा जाएगा।



