बिजली-पानी की दोहरी मार: एक अप्रैल से उत्तराखंड की जनता पर बढ़ेगा खर्च,, नई दरें लागू होने से घरेलू बजट पर पड़ेगा असर, बिलों में 9 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी,, महंगाई के दौर में जनता परेशान, सरकार के फैसले पर उठने लगे सवाल

इन्तजार रजा हरिद्वार- बिजली-पानी की दोहरी मार: एक अप्रैल से उत्तराखंड की जनता पर बढ़ेगा खर्च,,
नई दरें लागू होने से घरेलू बजट पर पड़ेगा असर, बिलों में 9 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी,,
महंगाई के दौर में जनता परेशान, सरकार के फैसले पर उठने लगे सवाल
उत्तराखंड में महंगाई से जूझ रही आम जनता को एक और बड़ा झटका लगने वाला है। एक अप्रैल से राज्य में बिजली और पानी दोनों की दरों में बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। नई दरें लागू होते ही आम लोगों के मासिक खर्च में सीधा इजाफा होगा। बताया जा रहा है कि बिजली और पानी के बिलों में लगभग 9 प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
सरकारी विभागों और नियामक संस्थाओं की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है और संभावना है कि 31 मार्च तक नई दरों का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा। जैसे ही यह फैसला लागू होगा, अप्रैल महीने से उपभोक्ताओं के बिल बढ़े हुए आने लगेंगे। महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है।
बिजली की दरों में बढ़ोतरी की तैयारी
ऊर्जा विभाग और बिजली वितरण कंपनियों की ओर से बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव पहले ही दिया जा चुका है। ऊर्जा क्षेत्र की तीनों प्रमुख कंपनियों की ओर से आए प्रस्तावों का अध्ययन किया गया है और अब अंतिम निर्णय की प्रक्रिया चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक बिजली की नई दरें 31 मार्च को घोषित की जा सकती हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो उपभोक्ताओं को अप्रैल से ज्यादा बिजली बिल चुकाना पड़ेगा।
बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों पर पड़ने की संभावना है। घरों में पहले से ही बिजली का उपयोग बढ़ रहा है और ऐसे में बिल बढ़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर केवल बिजली बिल तक सीमित नहीं रहेगा। बिजली महंगी होने से छोटे उद्योगों, दुकानों और व्यापारिक गतिविधियों की लागत भी बढ़ेगी, जिसका असर अंततः बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
पानी के बिलों में भी होगा इजाफा
सिर्फ बिजली ही नहीं बल्कि पानी के बिलों में भी बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। हर साल एक अप्रैल से पानी की दरों में संशोधन किया जाता है और इस बार भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार घरेलू श्रेणी में पानी की दरों में करीब 9 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, जबकि व्यावसायिक श्रेणी में यह बढ़ोतरी 15 प्रतिशत तक हो सकती है।
इस बढ़ोतरी का सीधा असर शहरों और कस्बों में रहने वाले लोगों पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां अभी पानी का बिल लगभग 117 रुपये प्रति माह आता है, वह बढ़कर करीब 121 रुपये तक पहुंच सकता है।
वहीं शहरी क्षेत्रों में जहां पानी का मासिक बिल लगभग 360 रुपये के आसपास है, वह बढ़कर लगभग 373 रुपये तक हो सकता है। हालांकि यह बढ़ोतरी देखने में कम लग सकती है, लेकिन साल भर के हिसाब से यह राशि काफी बढ़ जाती है।
महंगाई के दौर में जनता पर बढ़ता आर्थिक बोझ
देश और राज्य में पहले से ही महंगाई लगातार बढ़ रही है। खाद्य पदार्थों, पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें पहले ही लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। ऐसे समय में बिजली और पानी की दरों में बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
आम लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच यदि आवश्यक सेवाओं की कीमतें भी बढ़ती रहेंगी तो परिवार का बजट संभालना मुश्किल हो जाएगा।
विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। ये वे वर्ग हैं जिनकी आय सीमित होती है लेकिन खर्च लगातार बढ़ते रहते हैं।
सरकारी तर्क और जनता की नाराजगी
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि बिजली और पानी की दरों में बढ़ोतरी कई तकनीकी और आर्थिक कारणों से की जाती है। बिजली कंपनियों का तर्क है कि उत्पादन लागत, रखरखाव और वितरण खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इसी तरह जल संस्थान का कहना है कि पाइपलाइन, पंपिंग और जल आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त धन की जरूरत पड़ती है।
हालांकि जनता इन तर्कों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिख रही है। लोगों का कहना है कि सरकार को आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।
कई सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रस्तावित बढ़ोतरी पर चिंता जताई है और मांग की है कि सरकार गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को राहत देने के लिए विशेष योजना बनाए।
एक अप्रैल से लागू हो सकती हैं नई दरें
यदि नियामक आयोग द्वारा प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो बिजली और पानी की नई दरें एक अप्रैल से लागू हो जाएंगी। इसके बाद अप्रैल माह से ही उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल मिलने शुरू हो जाएंगे।
फिलहाल राज्यभर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब महंगाई पहले से ही चरम पर है, तब आवश्यक सेवाओं की कीमतें बढ़ाना कितना उचित है।
उत्तराखंड में एक अप्रैल से लागू होने वाली यह संभावित बढ़ोतरी आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकती है। फिलहाल जनता की नजरें सरकार और नियामक आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
अगर यह बढ़ोतरी लागू होती है तो साफ है कि आने वाले समय में उत्तराखंड के लोगों को बिजली और पानी के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। महंगाई के इस दौर में यह फैसला आम आदमी की जेब पर एक और भारी बोझ बन सकता है।



