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सर सैयद अहमद ख़ान की जयंती पर डॉ॰ अरशद इक़बाल हुए सम्मानित,, मुजफ्फरनगर और मेरठ में शिक्षा, समाजसेवा और सर सैयद मिशन पर हुआ भव्य आयोजन,, ‘शिक्षा ही सच्ची श्रद्धांजलि है सर सैयद को’ – डॉ॰ अरशद इक़बाल

इन्तजार रजा हरिद्वार- सर सैयद अहमद ख़ान की जयंती पर डॉ॰ अरशद इक़बाल हुए सम्मानित,,
मुजफ्फरनगर और मेरठ में शिक्षा, समाजसेवा और सर सैयद मिशन पर हुआ भव्य आयोजन,,
‘शिक्षा ही सच्ची श्रद्धांजलि है सर सैयद को’ – डॉ॰ अरशद इक़बाल

मुजफ्फरनगर/हरिद्वार, 17 अक्टूबर 2025 —

महान शिक्षाविद, समाज सुधारक और आधुनिक भारत के निर्माता कहे जाने वाले सर सैयद अहमद ख़ान की जयंती 17 अक्टूबर को पूरे देश ही नहीं बल्कि विश्वभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उत्तर भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों, सामाजिक संस्थानों और शिक्षण केंद्रों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। हरिद्वार के मेट्रो अस्पताल के सीईओ डॉ॰ अरशद इक़बाल को इस मौके पर मुजफ्फरनगर के विशेष समारोह में मेहमाने-ख़ुसूसी के रूप में आमंत्रित किया गया, जबकि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के उर्दू विभाग में आयोजित “सर सैयद डे” कार्यक्रम में उन्हें अध्यक्षता का सम्मान प्राप्त हुआ।

“सर सैयद का मिशन आज भी ज़िंदा है” – डॉ॰ अरशद इक़बाल

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ॰ अरशद इक़बाल ने कहा कि “सर सैयद अहमद ख़ान की शिक्षण क्रांति और समाज सुधार की सोच आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उनके दौर में थी। हमें सर सैयद की उस मिशन को जिंदा रखना होगा जो शिक्षा, सेवा और एकता पर आधारित था।” उन्होंने कहा कि समाज के पिछड़े तबके, खासकर गरीबों और मुसलमानों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है।

उन्होंने यह भी कहा कि “अक्सर लोग 17 अक्टूबर के दिन सर सैयद को याद कर लेते हैं, पर सालभर उस मिशन को भूल जाते हैं। असल श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और सामाजिक सेवा केंद्र स्थापित कर समाज को मजबूत बनाएं।”

डॉ॰ अरशद ने आगे कहा कि “हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि देश का हर बच्चा शिक्षित हो, और हर गरीब को इलाज की सुविधा मिले। यही सर सैयद की असली सोच थी — ज्ञान और सेवा से राष्ट्र का पुनर्निर्माण।”

सर-सैयद चैरिटेबल अस्पताल बना मानवता की मिसाल

डॉ॰ अरशद इक़बाल ने बताया कि सरसैयद चैरिटेबल अस्पताल की स्थापना वर्ष 2012 में डॉ॰ असलम पुरी, डॉ॰ इक़बाल, हाजी मुश्ताक सैफी, शैफी सलीम सैफी सहित कई समाजसेवियों ने मिलकर की थी। यह अस्पताल गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ती व गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहा है।

इसी कड़ी में हाजी मुश्ताक सैफी ने हाल ही में एक और अस्पताल की नींव रखी, जो जल्द ही गरीबों की सेवा के लिए समर्पित होगा। डॉ॰ अरशद ने कहा — “हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदारवर पैदा। सर सैयद जैसे लोग सदियों में एक बार आते हैं। उनका आभारी समाज हमेशा शिक्षा और मानवता के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित रहेगा।”

शैक्षणिक संस्थानों में सर सैयद मिशन को जीवंत रखने का संकल्प

डॉ॰ अरशद इक़बाल ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले 22 वर्षों से प्रोफेसर असलम जमशेद पुरी के नेतृत्व में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग ने सर सैयद मिशन को आगे बढ़ाने का काम किया है।
विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और कॉलेजों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार, क्विज़ प्रतियोगिताएं, भाषण व लेखन स्पर्धाएं, बैतबाजी और व्याख्यान श्रृंखला के माध्यम से नई पीढ़ी को सर सैयद की विचारधारा से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि “सर सैयद केवल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं हैं। वे पूरे भारत के हैं, और उनकी सोच आज भी हर भारतीय के विकास का आधार बन सकती है।”

मेरठ विश्वविद्यालय में 3 दिवसीय समारोह का भव्य समापन

गौरतलब है कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के उर्दू विभाग में तीन दिवसीय सर सैयद समारोह का समापन भी 17 अक्टूबर को हुआ। कार्यक्रम में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अबू सूफियान इस्लाही (अरबी विभागाध्यक्ष), प्रोफेसर सगीर अफराम (पूर्व विभागाध्यक्ष उर्दू विभाग एएमयू), डॉ॰ हाशिम रज़ा जैदी, और सैयद अनवर हुसैन (पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एएमयू) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस दौरान डॉ॰ मुश्ताक सदफ़ (एएमयू), प्रोफेसर दिनेश कुमार और प्रोफेसर आराधना (सीसीएसयू इकोनॉमिक्स विभाग) सहित कई शिक्षाविदों ने अपने विचार साझा किए।
मुजफ्फरनगर से डॉ॰ नवेद चांदनी अब्बासी और शाहिद जमा ने अपने दिल छू लेने वाले विचार रखे, जिन्हें सुनकर सभागार तालियों से गूंज उठा।

“शिक्षा और सेवा ही सर सैयद की सच्ची विरासत”

समापन सत्र में वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि आज जरूरत है सर सैयद की शिक्षा और एकता की सोच को समाज में उतारने की। डॉ॰ अरशद इक़बाल ने कहा —
“सर सैयद अहमद ख़ान ने मुसलमानों को अंधकार से निकालकर ज्ञान की रौशनी में लाने का जो काम किया, उसे आगे बढ़ाना हम सबका फर्ज़ है। हमें मिलकर समाज, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में नई इबारत लिखनी होगी।”

उन्होंने कहा कि “हर शिक्षित व्यक्ति एक रोशनी है, और अगर हम सब मिलकर सर सैयद की मशाल थाम लें तो देश में अज्ञान का अंधेरा कभी नहीं रहेगा।”17 अक्टूबर का यह दिन केवल सर सैयद अहमद ख़ान को याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प दोहराने का अवसर है। डॉ॰ अरशद इक़बाल जैसे समाजसेवी और शिक्षाविद जब इस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं, तो निश्चय ही सर सैयद की आत्मा प्रसन्न होगी — क्योंकि उनका सपना था “शिक्षा से इंसान बने, और इंसानियत से राष्ट्र महान बने।”

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