अपराधअलर्टइन्वेस्टिगेशनउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरेंऑपरेशन कालनेमिनिरीक्षणनोटिस जारीपॉलिटिकल तड़काप्रतिबंधितप्रशासन

कोडीन माफियाओं पर ड्रग्स विभाग का प्रहार: शासन का कड़ा संदेश, अब नहीं चलेगा नशे का खेल,, कई जिलों में ड्रग्स इंस्पेक्टर्स की योजनाबद्ध अदला-बदली: दबावमुक्त जांच की रणनीति ,देहरादून–हरिद्वार–उधमसिंहनगर में ताबड़तोड़ छापेमारी,, दवा माफियाओं में हड़कंप, प्रतिष्ठान सील–स्टॉक सीज, प्रदेशभर में चरणबद्ध अभियान की दस्तक 

इन्तजार रजा हरिद्वार- कोडीन माफियाओं पर ड्रग्स विभाग का प्रहार: शासन का कड़ा संदेश, अब नहीं चलेगा नशे का खेल,,

कई जिलों में ड्रग्स इंस्पेक्टर्स की योजनाबद्ध अदला-बदली: दबावमुक्त जांच की रणनीति ,देहरादून–हरिद्वार–उधमसिंहनगर में ताबड़तोड़ छापेमारी,,

दवा माफियाओं में हड़कंप, प्रतिष्ठान सील–स्टॉक सीज, प्रदेशभर में चरणबद्ध अभियान की दस्तक 

देहरादून, 23 फरवरी 2026। उत्तराखंड में कोडीन युक्त कफ सिरप और अन्य मनः प्रभावी दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग पर शासन ने आखिरकार निर्णायक चोट कर दी है। युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले अवैध कारोबारियों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा शिकंजा कसा है कि दवा माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में साफ शब्दों में कहा गया—जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को निर्देश दिए गए कि औषधि अनुज्ञप्ति प्रतिष्ठानों पर औचक निरीक्षण कर कड़ी विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।बैठक के बाद प्रदेशभर में सख्ती की नई रणनीति लागू कर दी गई। यह केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क पर सीधा वार है।

कई जिलों में ड्रग्स इंस्पेक्टर्स की योजनाबद्ध अदला-बदली: दबावमुक्त जांच की रणनीति

अपर आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा तीन विशेष टीमें गठित की गईं। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जिलों में तैनात ड्रग्स इंस्पेक्टर्स के प्रभार बदल दिए गए।

  • देहरादून के निरीक्षकों को हरिद्वार भेजा गया
  • हरिद्वार के अधिकारियों को देहरादून का जिम्मा सौंपा गया
  • नैनीताल के निरीक्षकों को उधमसिंहनगर का प्रभार दिया गया

इस अदला-बदली का उद्देश्य स्पष्ट है—स्थानीय प्रभाव, राजनीतिक दबाव या सांठगांठ से मुक्त होकर कार्रवाई। शासन का मानना है कि वर्षों से पनप रहे नेटवर्क को तोड़ने के लिए यही सबसे प्रभावी तरीका है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जहां भी कोडीन युक्त सिरप या अन्य मनः प्रभावी औषधियों के अवैध भंडारण, बिना पर्चे बिक्री या संदिग्ध स्टॉक की सूचना मिले, वहां तत्काल छापेमारी की जाए।

देहरादून में दो प्रतिष्ठान सील, नियमों की खुली अवहेलना पर कसा शिकंजा

जनपद देहरादून के हर्बटपुर क्षेत्र में टीम ने दो प्रतिष्ठानों—M/s Mystic Pharma Healthcare और Trust Way Pharmaceutical—पर औचक छापेमारी की।निरीक्षण के दौरान औषधि अधिनियम के गंभीर उल्लंघन पाए गए। स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक उपलब्ध दवाओं में अंतर, संदिग्ध एंट्री और नियमानुसार दस्तावेजों की कमी सामने आई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों प्रतिष्ठानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। चाबियां संबंधित थाने को सौंप दी गई हैं और आगे की विधिक कार्रवाई प्रारंभ हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार, जब्त दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है ताकि सप्लाई चैन की पूरी कड़ी उजागर हो सके।

हरिद्वार में भी स्टॉक सीज, रिकॉर्ड में गड़बड़ी

जनपद हरिद्वार के सलेमपुर बहादराबाद स्थित M/s Animentis Life Sciences Pvt. Ltd. पर भी टीम ने छापा मारा। निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड और उपलब्ध स्टॉक में गंभीर विसंगतियां मिलीं।

फार्म-15 के अंतर्गत उपलब्ध औषधियों का स्टॉक तत्काल सीज कर दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में दोष सिद्ध होता है तो लाइसेंस निरस्तीकरण से लेकर आपराधिक मुकदमे तक की कार्रवाई की जाएगी। हरिद्वार की वरिष्ठ ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती ने कहा, “लगातार शिकायतें मिल रही थीं। विभाग किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा। अभियान आगे भी जारी रहेगा।”

उधमसिंहनगर में नोटिस, अगली कार्रवाई तय

उधमसिंहनगर के रुद्रपुर में M/s Futec Pharmaceuticals Pvt. Ltd. पर टीम पहुंची तो प्रतिष्ठान बंद मिला। टीम ने औषधि अधिनियम के तहत नोटिस चस्पा कर स्वामी को दूरभाष पर सूचित किया।निर्देश दिए गए कि दुकान टीम की उपस्थिति में खोली जाए, अन्यथा कठोर कार्रवाई होगी। विभाग ने संकेत दिए हैं कि सहयोग न करने पर लाइसेंस निरस्तीकरण और अभियोजन की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी।

चरणबद्ध अभियान: पूरे प्रदेश में निगरानी तंत्र सक्रिय

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में अन्य जिलों—विशेषकर सीमावर्ती और औद्योगिक क्षेत्रों—में भी व्यापक स्तर पर छापेमारी होगी। मेडिकल स्टोरों और औषधि निर्माताओं के लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री विवरण और सप्लाई चैन की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सीधे उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।विशेष निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया गया है ताकि कोडीन युक्त सिरप और अन्य मनः प्रभावी दवाओं की अवैध बिक्री पर स्थायी अंकुश लगाया जा सके।

युवाओं की सुरक्षा सर्वोपरि, आमजन से अपील

विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं भी बिना पर्चे के कोडीन युक्त सिरप की बिक्री, संदिग्ध भंडारण या अवैध वितरण की जानकारी हो तो तत्काल सूचना दें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

शासन का स्पष्ट संदेश है—नशे के सौदागरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।

प्रदेश में दवाओं के नाम पर फैलाए जा रहे इस “धीमे जहर” के कारोबार को जड़ से उखाड़ने के लिए प्रशासन पूरी ताकत से मैदान में है। ड्रग्स इंस्पेक्टर्स के प्रभार बदलने से लेकर प्रतिष्ठानों की सीलिंग तक, हर कदम इस बात का संकेत है कि अब कार्रवाई प्रतीकात्मक नहीं, निर्णायक होगी। दवा माफियाओं के लिए यह चेतावनी है—या तो नियमों के दायरे में आएं, या फिर कानून का कठोर सामना करें। उत्तराखंड में अब कोडीन के नाम पर नशे का खेल नहीं चलेगा।

Related Articles

Back to top button