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सशक्त नारी – सशक्त समाज – आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का संघर्ष,, हरिद्वार में आंगनबाड़ी संगठन का हुंकार, मानदेय वृद्धि से लेकर पेंशन तक 12 सूत्रीय मांगों पर आर-पार की चेतावनी,, बायोमेट्रिक, ऐप और केवाईसी पर नाराज़गी,, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजा ज्ञापन, जिला अधिकारी के माध्यम से जल्द निर्णय की मांग

इन्तजार रजा हरिद्वार- सशक्त नारी – सशक्त समाज – आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का संघर्ष,,

हरिद्वार में आंगनबाड़ी संगठन का हुंकार, मानदेय वृद्धि से लेकर पेंशन तक 12 सूत्रीय मांगों पर आर-पार की चेतावनी,,

बायोमेट्रिक, ऐप और केवाईसी पर नाराज़गी,,

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजा ज्ञापन, जिला अधिकारी के माध्यम से जल्द निर्णय की मांग

हरिद्वार, 16 फरवरी 2026।
उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की रीढ़ मानी जाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने अब अपनी मांगों को लेकर खुला मोर्चा खोल दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ती / सेविका / मिनी कर्मचारी संगठन हरिद्वार (उत्तराखण्ड) ने मुख्यमंत्री को जिला अधिकारी हरिद्वार के माध्यम से 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भेजते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन की राह अपनाने को बाध्य होगा।

शिवालिक नगर स्थित संगठन कार्यालय से जारी पत्रांक 3/26 दिनांक 16/02/2026 में जिला अध्यक्ष श्रीमती रितेश चौहान और जिला उपाध्यक्ष श्रीमती निर्देश के हस्ताक्षर से भेजे गए ज्ञापन में सरकार से ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।

मानदेय, पेंशन और सेवानिवृत्ति पर बड़ा सवाल – “सम्मान चाहिए, उपेक्षा नहीं”

ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में प्रतिदिन ₹140 की राज्य स्तर पर वृद्धि और केंद्र सरकार को ₹150 प्रतिदिन बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजने की है। संगठन का कहना है कि महंगाई चरम पर है, लेकिन मानदेय आज भी बेहद कम है। ऐसे में “सशक्त नारी” का नारा केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

दूसरी बड़ी मांग सेवानिवृत्ति से जुड़ी है। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि बिना किसी अतिरिक्त अर्हता के 60 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्त होने वाली कार्यकर्त्रियों को 10 लाख रुपये एकमुश्त देने का शासनादेश जारी किया जाए। जब तक यह जीओ जारी नहीं होता, तब तक ₹300 मासिक कटौती का प्रस्ताव वापस लिया जाए। संगठन ने साफ शब्दों में कहा है कि “जब लाभ तय नहीं, तो कटौती क्यों?”

इसके साथ ही 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाकर 62 वर्ष करने और पेंशन योजना लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। साथ ही सरकार के घोषणा पत्र में किए गए वादे के अनुरूप 60 वर्ष पूर्ण करने वाली कार्यकर्ताओं को एक लाख रुपये एकमुश्त राशि देने का जीओ तत्काल जारी करने की मांग की गई है।

बायोमेट्रिक, ऐप और केवाईसी पर नाराज़गी – “विश्वास कीजिए, संदेह मत कीजिए”

संगठन ने बायोमेट्रिक मशीन से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जोड़ने के निर्णय का भी कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क और तकनीकी संसाधनों की भारी कमी है, जिससे कार्य में अनावश्यक बाधा आती है।

केवाईसी और फेस कैप्चरिंग प्रक्रिया को भी सरलीकृत करने की मांग की गई है। ज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख है कि एक लाभार्थी का केवाईसी और फेस कैप्चरिंग केवल एक बार होनी चाहिए, ऐप में सुधार कर बार-बार की जटिल प्रक्रिया समाप्त की जाए। मोबाइल फोन की खराब स्थिति और अपर्याप्त रिचार्ज राशि पर भी संगठन ने नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन तो दिए गए, लेकिन न तो नेटवर्क ठीक है और न ही रिचार्ज के लिए पर्याप्त धनराशि। “डिजिटल इंडिया” की जिम्मेदारी निभाने वाली कार्यकर्त्रियां खुद डिजिटल समस्याओं से जूझ रही हैं।

भवन किराया, अतिरिक्त कार्य और योजनाओं में हिस्सा – “काम हमारा, सम्मान भी हमारा”

संगठन ने भवन किराए में बढ़ोतरी की मांग करते हुए कहा है कि किराया सीधे माता समिति के खाते में डाला जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

इसके अतिरिक्त, अन्य विभागों के कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लिए जाते हैं, लेकिन उसके एवज में कोई अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जाता। संगठन ने मांग की है कि जिस विभाग का कार्य कराया जाए, वह विभाग प्रति कार्यकर्ता ₹1000 प्रतिमाह भुगतान सुनिश्चित करे।

सुपरवाइजर पदों पर प्रतिवर्ष सीनियरिटी के आधार पर विज्ञप्ति जारी करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है, ताकि वर्षों से सेवा दे रही कार्यकर्त्रियों को पदोन्नति का अवसर मिल सके।

नन्दा गौरा योजना का लाभ आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को भी दिए जाने की मांग की गई है। साथ ही वर्ष 2022-23 में गर्भवती महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) की राशि न मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन का कहना है कि योजना का पैसा समय पर न मिलने से लाभार्थियों के साथ-साथ कार्यकर्त्रियों को भी जवाबदेही का सामना करना पड़ता है।

“जल्द निर्णय लें सरकार, वरना होगा बड़ा आंदोलन”

ज्ञापन के अंत में संगठन ने साफ शब्दों में लिखा है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

जिला अध्यक्ष श्रीमती रितेश चौहान ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां वर्षों से कम मानदेय में समाज की सेवा कर रही हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण से लेकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक हर जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। फिर भी उन्हें न तो स्थायी कर्मचारी का दर्जा मिला और न ही पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा।

संगठन का स्पष्ट संदेश है — “हम दया नहीं, अधिकार मांग रहे हैं।”

अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन मांगों पर कितनी गंभीरता दिखाती है। महिला सशक्तिकरण के दावे तभी सार्थक होंगे जब आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक सम्मान मिलेगा। फिलहाल हरिद्वार से उठी यह आवाज पूरे उत्तराखंड में गूंजने लगी है।

🌸 जिला पदाधिकारी

  • जिला उपाध्यक्ष – श्रीमती निर्देश
  • जिला सचिव – शबनूर
  • प्रदेश कोषाध्यक्ष – पूनम
  • प्रदेश सदस्य – अंजू

🌼 ब्लॉक अध्यक्ष

  • बहादराबाद – 1 – कविता चौहान
  • बहादराबाद – 2 – वन्दना सैनी
  • लक्सर – नीलम रानी
  • रूड़की – ममता पुरी
  • भगवानपुर – लता चौधरी
  • नारसन – अंजू पाल

🌺 ब्लॉक पदाधिकारी (अन्य)

🔹 बहादराबाद – 1

  • ब्लॉक सचिव – किरन
  • ब्लॉक कोषाध्यक्ष – उषा रानी

🔹 बहादराबाद – 2

  • ब्लॉक उपाध्यक्ष – संतोष देवी
  • ब्लॉक सचिव – शिल्पा रावत

🔹 लक्सर

  • ब्लॉक कोषाध्यक्ष – संतो रानी
  • ब्लॉक सचिव – शबनम जहाँ

🔹 भगवानपुर

  • ब्लॉक उपाध्यक्ष – सावित्री देवी
  • ब्लॉक सचिव – मौसम रानी

🔹 नारसन

  • ब्लॉक उपाध्यक्ष – कविता रानी
  • ब्लॉक सचिव – दीक्षा

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