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पिरान कलियर में नए सीईओ की एंट्री, पहला प्रेस नोट बना चर्चा का विषय,, दरगाह की व्यवस्थाओं पर खामोशी, होटल-ढाबों पर सख्त लहजा,, गोलक गबन कांड के निलंबित कर्मचारियों की बहाली की फाइल फिर सक्रिय

इन्तजार रजा हरिद्वार- पिरान कलियर में नए सीईओ की एंट्री, पहला प्रेस नोट बना चर्चा का विषय,,

दरगाह की व्यवस्थाओं पर खामोशी, होटल-ढाबों पर सख्त लहजा,,

गोलक गबन कांड के निलंबित कर्मचारियों की बहाली की फाइल फिर सक्रिय

रुड़की/पिरान कलियर।
पिरान कलियर दरगाह में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के नए सीईओ की पहली एंट्री होते ही इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। शनिवार को सीईओ साहब दरगाह पहुंचे, कर्मचारियों से मुलाकात की, कुछ सामान्य दिशा-निर्देश दिए और इसके बाद एक प्रेस-नोट जारी किया। लेकिन यह प्रेस-नोट व्यवस्था सुधार से ज्यादा सवालों और चर्चाओं का कारण बन गया।

दरअसल, इस प्रेस-नोट में दरगाह की आंतरिक व्यवस्थाओं, वित्तीय हालात या लंबे समय से उठते आ रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की बजाय पूरा जोर होटल-ढाबों और मेडिकल स्टोरों पर दिया गया। सीईओ की ओर से कहा गया कि दरगाह क्षेत्र में मिलने वाला भोजन घटिया गुणवत्ता का नहीं होना चाहिए , खाद्य सामग्री में मिलावट की शिकायतें मिल रही हैं और कुछ मेडिकल स्टोरों द्वारा प्रतिबंधित दवाइयां बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि एक सप्ताह के भीतर सुधार नहीं हुआ तो वे स्वयं औचक निरीक्षण करेंगे।

इसी ब्यान के बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि खाने-पीने और दवाइयों की जांच के लिए जिले में पहले से ही खाद्य सुरक्षा और ड्रग कंट्रोल विभाग मौजूद है। ऐसे में वक्फ बोर्ड के सीईओ का इस मुद्दे पर इतनी सख्ती दिखाना समझ से परे है। चर्चा यह भी है कि क्या वक्फ बोर्ड की प्राथमिकताएं बदल गई हैं?

सबसे अहम बात यह है कि पूरे प्रेस-नोट में दरगाह की व्यवस्थाओं को लेकर एक भी ठोस बात नहीं कही गई। न उन बकायेदारों का जिक्र हुआ, जो वर्षों से वक्फ की रकम जमा नहीं कर रहे हैं। न ठेकों में हो रही कथित अनियमितताओं पर कोई टिप्पणी की गई। न ही करोड़ों रुपये की सालाना आमदनी के बावजूद फैली अव्यवस्था, गंदगी और कुप्रबंधन पर कोई सवाल उठाया गया। यानी दरगाह की “आर्थिक और प्रशासनिक सेहत” पर पूरी खामोशी, लेकिन होटल की थाली और मेडिकल स्टोर की अलमारी पर पूरी नजर।

गौरतलब है कि पिरान कलियर दरगाह उत्तराखंड की सबसे अधिक आय वाली दरगाहों में शुमार है। हर साल यहां से करोड़ों रुपये की आमदनी होती है, इसके बावजूद दरगाह अक्सर बंदरबांट, भ्रष्टाचार और बदइंतजामी के आरोपों में घिरी रहती है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच अव्यवस्थित ठेके, गंदगी और अवैध वसूली जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं। ऐसे में नए सीईओ के पहले दौरे से लोगों को उम्मीद थी कि वे दरगाह के मूल समस्याओं पर सीधा हाथ डालेंगे।

लेकिन पहले ही बयान में जब इन मुद्दों का जिक्र तक नहीं हुआ तो चर्चाएं और तेज हो गईं। इलाके में लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि दरगाह की तिजोरी तक पहुंचना मुश्किल है, लेकिन होटल-ढाबों की रसोई पर सख्ती दिखाना आसान।

इसी बीच एक और गंभीर मामला फिर सुर्खियों में आ गया है—गोलक गबन कांड। इस कांड में निलंबित किए गए कर्मचारियों को लेकर कार्रवाई की फाइलें निलंबन के बाद भले ही आगे न बढ़ी हों, लेकिन अब उनकी बहाली से जुड़ी फाइलें एक बार फिर सक्रिय होती दिखाई दे रही हैं। सूत्रों की मानें तो अंदरखाने बहाली को लेकर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यदि वक्फ बोर्ड वास्तव में सुधार और पारदर्शिता चाहता है तो उसे सबसे पहले गोलक गबन जैसे गंभीर मामलों में सख्त रुख अपनाना चाहिए। दोषियों पर निर्णायक कार्रवाई होनी चाहिए, न कि उनकी बहाली की जमीन तैयार की जाए। नए सीईओ से यह अपेक्षा की जा रही थी कि वे ऐसे मामलों में स्पष्ट संदेश देंगे, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नजर नहीं आ रहा।

कुल मिलाकर, पिरान कलियर दरगाह में नए सीईओ का पहला प्रेस-नोट सुधार की शुरुआत से ज्यादा चर्चाओं और सवालों की वजह बन गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में वक्फ बोर्ड की प्राथमिकता क्या रहती है—दरगाह की आय, व्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार पर ठोस कार्रवाई या फिर होटल-ढाबों और मेडिकल स्टोरों तक सीमित सख्ती।

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