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जनता का एक-एक पैसा कराया जाएगा वापस: IAS दीपक रावत,, पिरामिड स्कीम की तर्ज पर निवेश, इंसेंटिव देकर बिचौलियों का जाल,, कंपनी एक्ट उल्लंघन और संगठित वित्तीय धोखाधड़ी पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश

इन्तजार रजा हरिद्वार- जनता का एक-एक पैसा कराया जाएगा वापस: IAS दीपक रावत,,

पिरामिड स्कीम की तर्ज पर निवेश, इंसेंटिव देकर बिचौलियों का जाल,,

कंपनी एक्ट उल्लंघन और संगठित वित्तीय धोखाधड़ी पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश

देहरादून।
उत्तराखंड में निवेश के नाम पर आम जनता से करोड़ों रुपये समेटने वाले एक कथित निवेश मॉडल का भंडाफोड़ हुआ है। जांच में सामने आया है कि निवेश जुटाने के लिए कंपनी ने बिचौलियों का पूरा नेटवर्क खड़ा किया था, जिन्हें मोटे इंसेंटिव दिए जा रहे थे। यह पूरा ढांचा मल्टीलेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड स्कीम की तर्ज पर संचालित किया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीपक रावत ने साफ शब्दों में कहा है कि “जनता का एक-एक पैसा वापस कराया जाएगा और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।”

इंसेंटिव का लालच, भरोसे का सौदा

जांच एजेंसियों की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि कंपनी ने सीधे निवेशकों को लुभाने के बजाय बिचौलियों और एजेंटों के माध्यम से धन जुटाया। इन एजेंटों को नए निवेशक जोड़ने पर कमीशन और इंसेंटिव दिए जाते थे। जितना ज्यादा निवेश, उतना ज्यादा लाभ—यही फॉर्मूला अपनाया गया।
अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका पारंपरिक निवेश मॉडल नहीं बल्कि पिरामिड स्कीम की ओर साफ इशारा करता है, जिसमें शुरुआती निवेशकों को बाद में आने वाले निवेशकों के पैसे से भुगतान किया जाता है। जैसे ही निवेश की रफ्तार धीमी होती है, पूरा सिस्टम ढह जाता है और नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है।

कंपनी एक्ट का उल्लंघन, निवेशकों की राशि का दुरुपयोग

आयुक्त दीपक रावत ने बताया कि यह मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कंपनी एक्ट के गंभीर उल्लंघन भी पाए गए हैं।
जांच में संकेत मिले हैं कि निवेशकों से जुटाई गई रकम को तय उद्देश्यों में लगाने के बजाय दूसरी गतिविधियों में घुमाया गया। कई मामलों में फर्जी दस्तावेज, भ्रामक विज्ञापन और झूठे वादों के जरिए लोगों को निवेश के लिए उकसाया गया।
उन्होंने कहा कि यह संगठित वित्तीय अपराध है, जिसमें योजनाबद्ध तरीके से आम लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बनाया गया।

प्रशासन सख्त, कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी

मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने त्वरित कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कंपनी से जुड़े खातों, संपत्तियों और लेन-देन की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यदि जरूरत पड़ी तो कंपनी और उससे जुड़े लोगों की संपत्तियां जब्त कर निवेशकों को उनका पैसा लौटाया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों—पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़—के साथ समन्वय कर कार्रवाई की जा रही है।

निवेशकों को भरोसा, दोषियों को चेतावनी

दीपक रावत ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा,
“जो लोग मेहनत की कमाई लगाकर ठगे गए हैं, उन्हें न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता है। दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा दी जाएगी।”
साथ ही उन्होंने ऐसे निवेश मॉडलों से सावधान रहने की अपील की, जो असामान्य रूप से ज्यादा मुनाफे का लालच देते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी योजना जो कम समय में दोगुना-तिगुना लाभ का वादा करे, उस पर निवेश से पहले पूरी जांच जरूरी है।

राज्य में बढ़ते निवेश फ्रॉड पर चिंता

इस मामले ने एक बार फिर राज्य में बढ़ते निवेश घोटालों की ओर ध्यान खींचा है। पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से फर्जी निवेश योजनाओं के मामले सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिरामिड और MLM स्कीम अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में तेजी से फैलती हैं, जहां लोग सीमित जानकारी के चलते आसानी से झांसे में आ जाते हैं।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल प्रशासन की नजर इस बात पर है कि कितने निवेशकों से कितनी राशि जुटाई गई और पैसा कहां-कहां लगाया गया। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
एक बात साफ है—प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दे दिया है कि जनता के पैसे से खेलने वालों के लिए उत्तराखंड में कोई जगह नहीं है

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